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फिर बाढ़, फिर तबाही

Sun, 02 Aug 2015 07:33 PM IST
अमर उजाला, नई दिल्ली
अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 02 Aug 2015 07:33 PM IST
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Again flood, again Disaster

बंगाल की खाड़ी में उठे तूफान कोमेन के अब भले शांत पड़ जाने की उम्मीद हो, पर देश के कई हिस्सों में इसने जो तबाही मचाई है, वह चिंताजनक होने के साथ आपात तैयारी के मोर्चे पर हमारी कमियों के बारे में भी बताती है। मूसलाधार बारिश ने कोलकाता और भोपाल जैसे शहरों को जलमग्न कर दिया, तो अहमदाबाद के कुछ इलाकों में बाढ़ का पानी घुसने के कारण सेना को राहत कार्य चलाना पड़ा है।

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गुजरात में विगत जून में भी बाढ़ से सौराष्ट्र इलाके में भारी तबाही फैली थी। अब बाढ़ ने बनासकांठा और अहमदाबाद में कहर ढाया है। पिछले दिनों आई बाढ़ से वन्यजीवों, खासकर गिर वन के सिंहों पर कमोबेश असर पड़ने की बात कही गई थी, तो इस बाढ़ में करीब एक लाख मवेशियों के मारे जाने की सूचना है, जिसका डेयरी उद्योग पर असर पड़े, तो आश्चर्य नहीं। इसी तरह पश्चिम बंगाल के दक्षिणी हिस्से में तमाम नदियां खतरे के निशान से ऊपर हैं, बारह जिलों के करीब अट्ठारह लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं, और मरने वालों की संख्या चालीस से भी अधिक है। बारिश के अलावा बांधों से पानी छोड़ने के कारण भी वहां स्थिति गंभीर हुई है। पर वहां न सिर्फ राहत कार्य नाकाफी बताया जा रहा है, बल्कि संकट की घड़ी में राज्य की तृणमूल सरकार ओछी राजनीति करने से भी नहीं हिचक रही। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मदद के मामले में केंद्र पर कटाक्ष करने के साथ यह फरमान भी जारी कर दिया है कि राहत कार्य के लिए सिर्फ सरकार ही अधिकृत है। इसके बजाय अगर वह पूरे राज्य और देश से मदद की अपील करतीं, तो लोगों को लाभ होता। पर प्राकृतिक आपदा के समय भी राजनीति हावी है।
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पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में हालांकि अब हालात सामान्य हैं, पर मूसलाधार वर्षा, बाढ़ और भूस्खलन ने वहां जैसी तबाही मचाई है, वैसी पिछले कई दशकों में नहीं देखी गई। पूर्वोत्तर सिर्फ केंद्र से दूर ही नहीं है, दुर्गम भौगोलिक स्थिति भी वहां पहुंचने में बाधक है। इसी कारण भीषण बाढ़ के बावजूद शुरुआत में वहां राहत कार्यों में वैसी तेजी नहीं थी। यह ठीक है कि प्राकृतिक विपत्तियों पर किसी का वश नहीं है, लेकिन पहले ही अगर दूरदर्शिता का परिचय दिया जाए, तथा विपत्ति के समय युद्ध स्तर पर राहत कार्य शुरू किया जाए, तो नुकसान का आंकड़ा निश्चित तौर पर कम हो जाएगा।

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