{"_id":"3178","slug":"Yashwant-Vyas-3178-","type":"story","status":"publish","title_hn":"ऐसे हुआ चोर का हृदय परिवर्तन","category":{"title":"Opinion","title_hn":"नज़रिया ","slug":"opinion"}}
ऐसे हुआ चोर का हृदय परिवर्तन
Yashwant Vyas
Updated Thu, 06 Sep 2012 12:00 PM IST
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हमारे जीवन में कभी-कभी ऐसी घटनाएं भी घट जाती हैं, जो हमारे अंदर प्रभु के प्रति विश्वास रखने की प्रेरणा जगा देती है और हम सांसारिक मोह-माया को छोड़कर भक्ति-आस्था को अपने जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य बना लेते हैं। इंग्लैंड का पादरी जोसेफ करुणा की आध्यात्मिक शक्ति में अटूट विश्वास रखता था। दीन-हीन तथा बेसहारा लोगों के लिए उसके दरवाजे हमेशा खुले रहते थे।
एक दिन एक कुख्यात अपराधी पुलिस की निगाहों से बचता हुआ पादरी के निवास स्थान तक पहुंच गया। पादरी ने उसे शरण दी, भोजन कराया तथा रात्रि को विश्राम करने की स्वीकृति दे दी। अपराधी ने देखा कि पादरी की मेज पर चांदी के दो दीपदान रखे हैं। पादरी सो गया, तो उसने दीपदान उठाकर जेब में रख लिए तथा वहां से भाग निकला। वह कुछ ही दूर जा पाया था कि पुलिस के हत्थे चढ़ गया। उसने पुलिस को बता दिया कि ये दीपदान उसने पादरी के घर से चुराए हैं। पुलिस उसे पादरी के पास लेकर आई।
पादरी को दीपदानों की चोरी का पता लग गया था। पादरी ने इंस्पेक्टर से कहा, इसे छोड़ दीजिए। ये दीपदान तो मैंने स्वेच्छा से इसे भेंट में दिए थे। चोर पादरी के शब्द सुनकर पानी-पानी हो गया। उसने उसी समय प्रभु ईसा मसीह के चित्र के समक्ष भविष्य में अपराध न करने का संकल्प लिया। अब वह पादरी जोसेफ के शिष्य के रूप में दीन-हीनों की सेवा के कार्य में समर्पित हो गया था।
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एक दिन एक कुख्यात अपराधी पुलिस की निगाहों से बचता हुआ पादरी के निवास स्थान तक पहुंच गया। पादरी ने उसे शरण दी, भोजन कराया तथा रात्रि को विश्राम करने की स्वीकृति दे दी। अपराधी ने देखा कि पादरी की मेज पर चांदी के दो दीपदान रखे हैं। पादरी सो गया, तो उसने दीपदान उठाकर जेब में रख लिए तथा वहां से भाग निकला। वह कुछ ही दूर जा पाया था कि पुलिस के हत्थे चढ़ गया। उसने पुलिस को बता दिया कि ये दीपदान उसने पादरी के घर से चुराए हैं। पुलिस उसे पादरी के पास लेकर आई।
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पादरी को दीपदानों की चोरी का पता लग गया था। पादरी ने इंस्पेक्टर से कहा, इसे छोड़ दीजिए। ये दीपदान तो मैंने स्वेच्छा से इसे भेंट में दिए थे। चोर पादरी के शब्द सुनकर पानी-पानी हो गया। उसने उसी समय प्रभु ईसा मसीह के चित्र के समक्ष भविष्य में अपराध न करने का संकल्प लिया। अब वह पादरी जोसेफ के शिष्य के रूप में दीन-हीनों की सेवा के कार्य में समर्पित हो गया था।
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