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जीवन और संरक्षण: हिम तेंदुए को बचाने की कहानी

Thu, 02 May 2024 03:54 PM IST
karma sonam कर्मा सोनम
Updated Thu, 02 May 2024 03:54 PM IST
सार

उभरते वन्यजीव प्रबंधन दृष्टिकोण को अपनाने में समुदायों की रूचि और क्षमता को प्रदर्शित भी करती है। यह संरक्षण प्रथाओं के लिए एक मॉडल के रूप में कार्य करता है जो सांस्कृतिक विरासत और मनुष्यों और वन्यजीवों के बीच स्थायी संबंध का सम्मान करता है।

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Wildlife Conservation: The Story Of Saving Lost Leopard
सामुदायिक भावना का सराहनीय प्रदर्शन करते हुए ग्रामीण तत्काल ही तेंदुए को बचाने की तैयारी में लग गए। - फोटो : Tsewang Rigzin

विस्तार

अनुवाद प्रियंवदा बागरिया 

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भारतीय गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या 25 जनवरी, 2024 पर हिम तेंदुए का एक युवा शावक जो लगभग आठ से नौ महीने का होगा अपनी मां से बिछड़ गया और भूलवश खारदोंग गांव पहुंच गया। वहां उसे कई जंगली कुत्तों ने घेर लिया था। जंगली कुत्तों से बचने के लिए शावक हिम तेंदुआ एक स्तूप पर चढ़ गया। अगली सुबह, ग्रामीणों को इस स्थिति का पता चला जब उन्होंने उस धार्मिक संरचना के ऊपर शरण ले रहे शानदार हिम तेंदुए के बच्चे को देखा।

सामुदायिक भावना का सराहनीय प्रदर्शन करते हुए ग्रामीण तत्काल ही तेंदुए को बचाने की तैयारी में लग गए। बिना घबराए उन्होंने तुरंत वन्यजीव संरक्षण विभाग को स्थिति की सूचना दी और शावक हिम तेंदुए की सुरक्षा के बारे में अपनी चिंता व्यक्त की। उन्हें आभास था कि जंगली कुत्तों को भगाने की प्रक्रिया शावक को भी डरा सकती है, और संभवतः वह स्तूप से नीचे उतरकर भागने का प्रयास करने की कोशिश में स्वयं कुत्तों का शिकार बन सकता है, इसलिए वे 50 मीटर की दूरी पर खड़े होकर बचाव दल के आने तक फंसे हुए शावक हिम तेंदुए पर नजर रखते रहे।
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इधर, वन्यजीव संरक्षण के प्रति समुदाय की प्रतिबद्धता तब उजागर हुई जब वे चीजों को अपने हाथों में लेने के बजाए पेशेवर सहायता की प्रतीक्षा करते हुए धैर्यपूर्वक खड़े रहे। इस संबंध में इस समुदाय के प्रयास का नेतृत्व करने के लिए खारदोंग गांव के अनुभवी पत्रकार और वन्यजीव उत्साही त्सेवांग रिगज़िन का उल्लेख करना आवश्यक है।
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लेह के वन्यजीव वार्डन धवन रावत, आई.एफ.एस., के नेतृत्व में बचाव दल अपने समर्पित अधिकारियों, रेंज अधिकारी, फुंटसोग वांगतक, बचाव प्रभारी, स्मांला त्सेरिंग और टीम के सदस्यों परवीज़ अहमद और गुलाम रसूल के सहयोग से घटनास्थल पर सूचना मिलने के तीन से चार घंटे बाद पहुंच गए।

इस अवधि के दौरान त्सेवांग रिगज़िन जैसे स्थानीय ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी से कुत्तों को दूर रखने का समन्वित प्रयास किया गया। यह उदाहरण देता है कि कैसे स्थानीय समुदाय और सरकारी एजेंसियां वन्यजीवों के संरक्षण के लिए आपसी सहयोग से काम कर सकती हैं।

Wildlife Conservation: The Story Of Saving Lost Leopard
यह रेस्क्यू ऑपरेशन हिम तेंदुए के संरक्षण के लिए की गई बिश्केक घोषणा के अनुरूप ही है जिस पर भारत भी एक हस्ताक्षरकर्ता है। - फोटो : Tsewang Rigzin

शावक हिम तेंदुए की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई घंटों के प्रयासों के बाद, उसे रासायनिक रूप से स्थिर किया गया, स्तूप से उतारा गया और शाम तक गांव से कुछ किलोमीटर दूर एक जाल-पिंजरे में निगरानी में रखा गया।

इधर, एक बार जब अंधेरा हो गया तो शावक को गांव के किनारे ले जाया गया जहां उसे पहली बार देखा गया और पिंजरे से छोड़ दिया गया। रात करीब साढ़े आठ बजे टीम ने शावक हिम तेंदुए को उसकी मां से मिलाने की असाधारण उपलब्धि हासिल की। टीम ने शावक को अंधेरे में अपनी मां के पीछे चलते देखा। मां और फंसे हुए शावक का सफल पुनर्मिलन वन्यजीव संरक्षण विभाग के सक्रिय सामुदायिक प्रयास और व्यावसायिकता की सफल परिणति है।

यह रेस्क्यू ऑपरेशन हिम तेंदुए के संरक्षण के लिए की गई बिश्केक घोषणा के अनुरूप ही है जिस पर भारत भी एक हस्ताक्षरकर्ता है। यह घोषणा वैश्विक हिम तेंदुआ और पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण कार्यक्रम (जीएसएलईपी) में सक्रिय भूमिका निभाती है, जो हिम तेंदुआ श्रेणी के देशों के बीच एक अद्वितीय बहु-देशीय सहयोगात्मक पहल है।

2020 में जीएसएलईपी कार्यक्रम ने मानव-हिम तेंदुआ संघर्ष स्थितियों के प्रबंधन के लिए नीति सलाह पत्र प्रकाशित किया था। खारदोंग में स्थानीय समुदाय के सदस्यों और वन्यजीव संरक्षण विभाग द्वारा की गई घटनाओं और कार्यों का क्रम इन दिशानिर्देशों के साथ निकटता से मेल खाता है। वे शान्त रहे, घबराए नहीं और स्थिति को संभालने के लिए अधिकारियों का इंतजार करते रहे। अपनी ओर से, अधिकारियों ने इसे एक असाधारण परिस्थिति की संज्ञा दी क्योंकि शावक एक बस्ती के अंदर था और जंगली कुत्तों का सामना किए बिना उसके लिए वापस लौटना मुश्किल था, इसलिए अधिकारियों ने शावक को रासायनिक रूप से स्थिर करने के उपरांत उपयुक्त स्थिति और स्थान देखते हुए शावक को गांव से कुछ दूर छोड़ दिया।

24 घंटे के भीतर शावक की मां हिम तेंदुए के साथ सफल पुनर्मिलन ग्रामीणों और वन्यजीव संरक्षण विभाग द्वारा संयुक्त रूप से की गई सहानुभूति, व्यावसायिकता और कुशल कार्यों का प्रमाण है। मैं खारदोंग गांव से परिचित हूं क्योंकि यह वन्यजीव संरक्षण के लिए आशा की किरण बनकर उभरा है। अतीत में मैंने अक्टूबर 2023 में पांचवें शांगडोंग से स्तूप परियोजना के हिस्से के रूप में इस समुदाय के साथ सहयोग किया है।

शांगडोंग उल्टे चिमनी के आकार की पत्थर की दीवारों के साथ बड़े पारंपरिक गड्ढे होते हैं। यह आमतौर पर गांवों या चरवाहों के शिविरों के पास स्थित होता है और भेड़ या बकरी के चारे से भेड़ियों को फंसाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

Wildlife Conservation: The Story Of Saving Lost Leopard
यह प्रयास, संस्कृति, आजीविका और संरक्षण के बीच के एक अटूट बंधन को बनाती है। - फोटो : Tsewang Rigzin

एक बार फंसने के बाद भेड़ियों को दुर्भाग्य का सामना करना पड़ता है। यह समुदायों और वन्यजीवों के बीच के जटिल संबंधों को उजागर करता है। हालांकि पांचवें शांगडोंग से स्तूप परियोजना के दौरान खारदोंग गांव का संरक्षण के प्रति समर्पण स्पष्ट था। अधिक मानवीय दृष्टिकोण की ओर एक महत्वपूर्ण बदलाव को चिह्नित करने के लिए ग्रामीणों ने स्वेच्छा से गांव के पास एक शांगडोंग को निष्क्रिय कर दिया। यह स्थानीय लोगों, धार्मिक नेताओं और युवा समूहों के साथ व्यापक विचार-विमर्श की परिणति थी। शांगडोंग को स्तूप में परिवर्तित करना एक कठिन प्रक्रिया है।

किसी भी फंसे हुए जानवर के लिए भागने का रास्ता बनाने के लिए कुछ पत्थरों को सावधानीपूर्वक हटा दिया जाता है। ऐसा करने से संरक्षण लक्ष्यों के साथ साथ संरचना की पारंपरिक अखंडता को को भी संरक्षित किया जाता है। यह सावधानीपूर्वक निराकरण की विधि, बौद्ध के करुणा सिद्धांतों को एकीकृत करते हुए परंपरा का भी सम्मान करता है। यह पारंपरिक और आधुनिक संरक्षण मूल्यों के सामंजस्यपूर्ण मिश्रण का उदाहरण है।

यह प्रयास, संस्कृति, आजीविका और संरक्षण के बीच के एक अटूट बंधन को बनाती है। उभरते वन्यजीव प्रबंधन दृष्टिकोण को अपनाने में समुदायों की रुचि और क्षमता को प्रदर्शित भी करती है। यह संरक्षण प्रथाओं के लिए एक मॉडल के रूप में कार्य करता है जो सांस्कृतिक विरासत और मनुष्यों और वन्यजीवों के बीच स्थायी संबंध का सम्मान करता है।

खारदोंग गांव में सहयोगात्मक प्रयास और हिम तेंदुए के शावक की रक्षा के लिए उनके बाद के प्रयास मानव समुदायों और स्थानीय जैव विविधता के बीच सामंजस्यपूर्ण सह-अस्तित्व प्राप्त करने के लिए धारणीय और नैतिक प्रथाओं के महत्व पर बढ़ती जागरूकता को दर्शाते हैं।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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