Bengal Municipal Election 2020: बंगाल में 'मिनी विधानसभा चुनावों' पर गरमाती सियासत
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पश्चिम बंगाल में कोलकाता नगर निगम समेत सौ से ज्यादा स्थानीय निकायों के चुनावों पर सियासत गरमाने लगी है। राज्य की ममता बनर्जी सरकार ने दो चरणों में चुनाव कराने का फैसला किया है। इमें से कोलकाता और हावड़ा नगर निगम के लिए मतदान 12 अप्रैल औऱ बाकी तमाम नगरपालिकाओं के लिए 26 अप्रैल को मतदान कराने का फैसला किया है। कोलकाता नगर निगम चुनाव को मिनी विधानसभा चुनाव भी कहा जाता है। इस बीच, भाजपा ने इन चुनावों में केंद्रीय बलों को तैनात करने की मांग उठाई है। दूसरी ओर, माकपा ने भी विकास के मुद्दे पर सत्तारुढ़ तृणणूल कांग्रेस की खिंचाई की है।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि राज्य सरकार 12 से 26 अप्रैल के बीच चुनाव प्रक्रिया को पूरी कर लेना चाहती है। उसने चुनाव आयोग को अपनी पसंदीदा तारीख बता दी है, लेकिन अब तक इसका औपचारिक एलान नहीं किया गया है। चुनाव की रणनीति पर विचार के लिए तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी ने 20 फरवरी को उन तमाम नगर निगमों और नगरपालिकाओं के अध्यक्षों और उपाध्यक्षों की बैठक बुलाई है जिनके बोर्ड पर पार्टी का कब्जा है।
दूसरी ओर, चुनावों की सुगबुगुहाट शुरू होते ही राजनीतिक दलों में दावों और आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। संसदीय मामलों के राज्य मंत्री औऱ तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तापस राय दावा करते हैं कि बीते पांच साल सैकड़ों विकास परियोजनाएं पूरी की गई हैं। इसलिए अबकी इन चुनावों में पार्टी का क्लीन स्वीप तय है।
दूसरी ओर भाजपा ने मुक्त व निष्पक्ष चुनावों के लिए केंद्र से भारी तादाद में अर्धसैनिक बलों की तैनाती की मांग उठाई है। पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष जय प्रकाश मजुमदार कहते हैं कि राज्य पुलिस तृणणूल कांग्रेस के काडर में बदल गई है। यहां केंद्रीय बलों की मौजूदगी के बिना मुक्त व निष्पक्ष चुनाव संभव नहीं हैं। उनका दावा है कि अबकी लोग तृणमूल कांग्रेस को धूल चटा देंगे। बंगाल में भाजपा ही तृणमूल का एकमात्र विकल्प है।
भाजपा के लिए यह चुनाव कई वजहों से अहम हैं। बीते लोकसभा चुनावों में भारी कामयाबी के बावजूदउसके बाद हुए उपचुनावों में उसे मुंहकी खानी पड़ी है। साथ ही उसके वोट भी घटे हैं। ऐसे में उसके सामने लोकसभा चुनावो की कामयाबी को जारी रखने की अहम चुनौती है। इसके अलावा स्थानीय निकायों पर कब्जे की स्थिति में साल भर बाद होने वाले विधानसभा चुनावों में काफी फायदा मिलेगा। उन चुनावों से पहले यह राजनीतिक दलों के शक्तिपरीक्षण का आखिरी मौका है।
दूसरी ओर, माकपा ने भी विकास के मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस की आलोचना की है। माकपा नेता मोहम्मद सलीम कहते हैं कि ममता बनर्जी व उनकी पार्टी ने बंगाल के विकास का एक मिथक तैयार किया है। हकीकत में यहां विकास के नाम पर कोई काम नहीं हुआ है। माकपा नेता का कहना है कि राज्य में बीते चार साल के दौरान एक फ्लाईओवर तक का निर्माण शुरू नहीं हो सका है।
तृणमूल का विकास कागजों पर ही हो रहा है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि स्थानीय निकाय चुनावों की तारीखों के सामने आते ही सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। प्रशांत किशोर की सलाह पर ममता ने जहां अपनी चुनावी रणनीति को अंतिम रूप दे दिया है, वहीं भाजपा भी स्थानीय मुद्दे तलाश रही है। इन मुद्दों पर फैसला करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी एक मार्च को कोलकाता दौरे पर आ रहे हैं।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।