वरिष्ठ नागरिक: सेवानिवृत्ति के बाद तनावमुक्त बुढ़ापा चाहिए, इन गलतियों से बचें
सेवानिवृत्ति के बाद बेहतर जीवनयापन के लिए अलग-अलग तरीके से बचत की जरूरत होती है। इन्हें ऐसे निवेश करें कि इन पर बेहतर रिटर्न मिले। इसे कई भाग में बांट सकते हैं। जैसी जरूरत, वैसा निवेश। हम अक्सर पैसों से जुड़ी गलतियां करते हैं। इन्हें टालकर यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि सेवानिवृत्ति के बाद जीवन तनावमुक्त हो।
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कोई भी व्यक्ति अपनी स्थिति के आधार पर सेवानिवृत्ति का प्रबंधन करने के तरीकों का पता लगा सकता है। याद रखें, सेवानिवृत्ति की सबसे सही परिभाषा होती है कि जब किसी व्यक्ति की कोई आय नहीं होती है। यदि पेंशन मिलती है, तो आप भाग्यशाली हैं, क्योंकि आपके पास कुछ ऐसा है जो बहुतों के पास नहीं है। ऐसे तीन अलग-अलग आयु वर्ग हैं जब सेवानिवृत्ति अधिकांश लोगों के लिए प्राथमिकता या चिंता का कारण बन जाती है।
सेवानिवृत्ति का पहला चरण...40 से 60 की उम्र
पहला चरण 40-60 वर्ष की उम्र का है, जो सेवानिवृत्ति से पहले का चरण है। इसमें व्यक्ति को किसी समय पर योजना बनाने की जरूरत का एहसास होता है और पर्याप्त धन होने या न होने की चिंता होती है। यह वह चरण भी है, जब कोई व्यक्ति अपने जीवन में कई वित्तीय आकांक्षाएं पूरी करने में कामयाब होता है। अगर आप नौकरी करते हैं तो संभावना है कि आप कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) या राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) का हिस्सा होंगे। इनका उपयोग सेवानिवृत्ति के बाद कर सकते हैं। यदि आप इस आयु वर्ग में हैं, तो उस राशि से कोई समझौता न करें, जो आपके सेवानिवृत्ति के लिए है। यह लक्ष्य पाने के लिए जितना संभव हो, बचत का प्रयास करें। आक्रामक तरीके से जितना संभव हो उतना इक्विटी में निवेश करें, क्योंकि 10-15 वर्षों में इक्विटी के जरिये महंगाई को मात देने व धन सृजन की संभावना अधिक है।
दूसरा चरण...समस्याओं का करना होगा सामना
दूसरा चरण सेवानिवृत्ति के पहले 10-15 वर्ष हैं। इसमें व्यक्ति को दो सामान्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। पहला, आप बहुत तेजी से खर्च करते हैं या आपके पास जो कुछ है उसके प्रति आप अति रूढ़िवादी हैं। दोनों ही आपके विरुद्ध जाते हैं। इस चरण में आपका प्राथमिक उद्देश्य सेवानिवृत्ति की बचत को पूरा करना नहीं है। अपनी रकम में से एक निश्चित राशि का उपयोग करें, जो कुल रकम का चार-पांच फीसदी हो। यह आंकड़ा इस आधार पर निकाला जाता है कि कोई अति रूढ़िवादी व्यक्ति बैंक खाते के ब्याज से कितनी कमाई करेगा। यह आपके पास मौजूद कोष पर एक सुरक्षा प्रदान करेगा। अपना सारा पैसा बैंक में रखने की गलती न करें और ब्याज आय से गुजारा करने की उम्मीद न करें। आपको सेवानिवृत्ति बचत को तीन-चार जगह रखना चाहिए। पहली दो जगह में इतना पैसा होना चाहिए कि आपको अगले पांच-सात वर्षों में अपने नियमित खर्चों के प्रबंधन के लिए इसकी जरूरत होगी। शेष राशि में से 50 फीसदी रकम आपको उन वित्तीय साधनों में रखना चाहिए, जिससे महंगाई को सहन करने के लिए बहुत कम इक्विटी जोखिम हो। शेष 50 फीसदी इक्विटी में निवेश करें, जहां बहुत ज्यादा रिटर्न मिल सके।
आपको इसकी चिंता नहीं करनी है कि कितनी रकम बचाने की जरूरत है। आप जितना बचा सकते हैं, उससे ज्यादा बचत की कोशिश करें और इसी लक्ष्य के लिए निवेश करें। इस दौर में आपके अधिकांश वित्तीय लक्ष्य समाप्त हो चुके हैं, इसलिए पूरा ध्यान सेवानिवृत्ति पर होना चाहिए। अपने बच्चों के लिए अत्यधिक बचत करने की गलती न करें और उन्हें स्वयं अपनी देखभाल करने के लिए तैयार करें, प्रेरित करें। इसी तरह, ऋण (डेट) और निश्चित रिटर्न माध्यमों पर ज्यादा भरोसा ना करें, क्योंकि ये आपकी पूंजी को सुरक्षित तो रखेंगे लेकिन ठीक-ठाक पैसा बनाने के लिए उचित रिटर्न नहीं दिलाएंगे। अगर आप उन लोगों में से हैं, जो सेवानिवृत्ति या किराये से आमदनी के लिए दूसरे घर के बारे में सोच रहे हैं, तो ऐसा न कर धन सृजन पर ध्यान दें।
इक्विटी: लंबे समय में बेहतर लाभ
आपको 15 साल बाद जिस पैसे की जरूरत होगी, उसके लिए इक्विटी और हाई इक्विटी आवंटन का कारण उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित है। यह दर्शाता है कि इक्विटी में निवेश किए गए पैसे का मूल्य इतनी लंबी अवधि में शायद ही कभी घटता है। ऐतिहासिक रूप से 7-10 वर्षों में निफ्टी और सेंसेक्स में शायद ही कभी पैसा कम हुआ हो। अपना सारा पैसा निश्चित रिटर्न वाले साधन में रखने की गलती से बचें और अत्यधिक रूढ़िवादी न बनें। अपनी पसंद की चीजों पर खर्च करने के लिए खुद को कुछ पैसे दें क्योंकि हो सकता है कि आपको कुछ चीजों पर पैसा खर्च करने का दूसरा मौका न मिले।