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जनरल रावत को श्रद्धांजलि: एक ऐसा नायक जिसकी मौजूदगी ही दुश्मनों के लिए काफी थी

Fri, 10 Dec 2021 05:12 PM IST
Abhilash Srivastava Abhilash Srivastava
Updated Fri, 10 Dec 2021 05:12 PM IST
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tribute to general bipin rawat, a person who defeated enemies intherir house
सीडीएस बिपिन रावत - फोटो : Twitter

कैसे यकीन कर लें कि जिसकी एक दाहड़ से दुश्मनों के पसीने छूट जाते थे, वह नि:शब्द, आंखें बंद किए लेटा हुआ है, फिर कभी न उठने के लिए। जनरल बिपिन रावत के रूप में देश ने सिर्फ एक चीफ ऑफ डिफेंस ही नहीं खोया है, एक ऐसा योद्धा भी खो दिया है, जिसकी मौजूदगी ही दुश्मनों को हिला कर रख देने के लिए काफी होती थी। नियति के क्रूर निर्णय ने असमय ही जनरल रावत को छीन लिया। जवान कभी मरता नहीं, अमर हो जाता है, पर यकीन मानिए जनरल रावत के ओजस्वी तस्वीरों को देखने के बाद एक बार को दिल मान ही नहीं रहा, जो हम मस्तिष्क को जबरदस्ती मनवाने की कोशिश कर रहे हैं। वेलिंगटन स्थित डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज में लैंड करने से ठीक सात मिनट पहले हेलीकॉप्टर क्रैश कर गया। काश वो सात मिनट, आठ दिसंबर के दिन के 24 घंटे में आए ही न होते। यह भी तो संयोग ही है कि जिस कॉलेज में संबोधन के लिए जनरल रावत जा रहे थे, वहीं से उन्होंने स्नातक भी किया था। दिमाग में ऐसे न जाने कितने क्यों, कैसे और काश, जैसे सवाल कुरेद रहे हैं, पर हकीकत वही है कि जो दिल मानने को तैयार नहीं है।

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मौत को दे चुके थे मात
सेना के जवान हर सहज-असहज परिस्थितयों से मुकाबले को तैयार होते हैं, जनरल रावत तो तीनों सेनाओं के सुप्रीम थे। साल 2015 में वह मौत को भी मात दे चुके थे। बतौर लेफ्टिनेंट जनरल, नागालैंड में उनकी तैनाती थी। तीन फरवरी की रोज एक कर्नल और दो पायलेट के साथ जनरल रावत चीता हेलीकॉप्टर में सवार थे। हेलीकॉप्टर हवा में कुछ ऊपर पहुंचा ही था कि इंजन फेल हो गया। देखते-देखते हेलीकॉप्टर जमीन पर आ गिरा। हेलीकॉप्टर में सवार जवानों और पायलेट को गंभीर चोट आई, लेकिन कहते हैं न 'शो मस्ट गो ऑन'। हेलीकॉप्टर क्रैश होने के कुछ घंटे के बाद जनरल रावत ने दूसरे हेलीकॉप्टर से उड़ान भरी और मिशन पर निकल गए। काश आठ दिसंबर की रोज भी कुछ ऐसा हो गया होता।

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अंतिम यात्रा पर सीडीएस बिपिन रावत। - फोटो : अमर उजाला

जनरल रावत के पहले सीडीसी नियुक्त होते ही दिल को इस बात की तसल्ली हो गई थी, कि सेना अब ऐसे हाथों में है, जो दुश्मनों को सिर उठाते ही कुचलने की क्षमता रखता है। सर्जिकल स्ट्राइक में उनकी कूटनीति के बाद से देश ही नहीं, पड़ोसियों तक भी संदेश पहुंच गया था कि जनरल रावत 'बर्दाश्त' करने वाले लोगों में से नहीं हैं। कश्मीर हो या पूर्वोत्तर के हिस्से, जनरल रावत ने आतांकियों के दांत खट्टे कर रखे थे। चीन हो या पाकिस्तान, सब अच्छी तरह से जानते थे कि जनरल रावत के रहते भारत की तरफ आंख उठाना, उन्हें अंधा बना सकता है।

पहली गोली हम नहीं मारेंगे, पर...
साहस और बहादुरी, कुदरती तौर पर खून में होती है और जनरल रावत का खून इस मामले में 'बहुत गाढ़ा' था। सीमा पर पाकिस्तान का आतंक बढ़ता जा रहा है। दुश्मनों की इस हरकत से तंग, जनरल रावत ने स्पष्ट संदेश दे दिया-

पहली गोली हमारी तरफ से नहीं चलेगी, लेकिन जब हम चलाना शुरू करेंगे तो इसकी गिनती  भी नहीं करेंगे।

सर्जिकल स्ट्राइक में पाकिस्तान को उन्होंने यह प्रमाणित करके भी दिखा दिया। कई सैन्य अधिकारियों ने साक्षात्कारों में इस बात का जिक्र किया है कि जनरल रावत जितने शालीन और मृदुभाषी थे, उन्हें पहली बार देखकर इस बात का अंदाजा ही नहीं लगाया जा सकता, कि वह इतने अद्भुत सैन्य अधिकारी हैं। 

सेना में बदलाव की शुरुआत
बतौर सीडीएस, जनरल रावत में सेना में कई तरह के बदलावों की शुरुआत कर दी थी। सेना में महिलाकर्मियों की संख्या बढ़ाने की कवायद हो या थियेटर कमान के रूप में सेना के एकीकरण प्रक्रिया की, जनरल रावत के कार्यकाल में एक नई ऊर्जा देखने को मिलने लगी थी। जल-थल-नभ, तीनों सेनाओं में आधुनिकीकरण के वह समर्थक थे, पर अब वह बस यादों में रह गए हैं। देश ने एक अमूल्य हीरा खो दिया है। आंखें नम हैं, गला भर आता है, लेकिन जवानों को नम आंखों से नहीं, सलामी देकर विदा किया जाता है। मां भारती के अमर सपूत को विनम्र श्रद्धांजलि। आप हमेशा याद आएंगे रावत साब।

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