फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   Second innings: It's not age but enthusiasm that matters in the group

दूसरी पारी: समूह में उम्र नहीं, उत्साह मायने रखता है

Fri, 22 May 2026 07:42 AM IST
Pavan अमर उजाला
अमर उजाला Published by: Pavan Updated Fri, 22 May 2026 07:42 AM IST
सार

वरिष्ठ नागरिकों को यह एहसास कराने के लिए कि वे अकेले नहीं हैं, ‘बुजुर्गों का समूह’ सहायक होता है। सामूहिक वार्ताओं और समूह आधारित कार्यक्रमों से जुड़कर बुजुर्ग न केवल अपने सुख-दुख आपस में साझा कर सकते हैं, बल्कि ऐसे कौशल भी सीखते हैं, जिनसे वे आत्मनिर्भर बनकर खुशहाल जीवन व्यतीत कर सकें।  

विज्ञापन
Second innings: It's not age but enthusiasm that matters in the group
दूसरी पारी: समूह में उम्र नहीं, उत्साह मायने रखता है - फोटो : Freepik

विस्तार

वृद्धावस्था में सबसे बड़ी जरूरत केवल दवाइयों की नहीं, बल्कि सहारे, अपनत्व और सही मार्गदर्शन की भी होती है। यही कारण है कि आज कई स्थानों पर सामूहिक वार्ताओं और समूह आधारित कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इनका उद्देश्य केवल बातचीत करना नहीं, बल्कि बुजुर्गों के जीवन को अधिक स्वस्थ, सुरक्षित और आनंदमय बनाना है।
विज्ञापन


इन सामूहिक बैठकों/कार्यक्रमों की सबसे बड़ी खूबी यह होती है कि ये वृद्धों को यह एहसास कराते हैं कि वे अकेले नहीं हैं। समाज उनके साथ खड़ा है। जब एक उम्र के लोग साथ बैठते हैं, अपने अनुभव साझा करते हैं और एक-दूसरे की समस्याओं को समझते हैं, तो मन का बोझ हल्का हो जाता है। इसके अलावा, कई बार जो बात डॉक्टर या किताबें नहीं समझा पातीं, वह साथी बुजुर्गों की साधारण सलाह समझा देती है। इन बैठकों या कार्यक्रमों में भोजन और पोषण पर भी चर्चा होती है, क्योंकि बढ़ती उम्र में सबसे बड़ी चिंता इन्हें लेकर ही रहती है। समूह में हर कोई अपने-अपने अनुभव साझा करता है। उनकी छोटी-छोटी जानकारियां बाकी लोगों के लिए बड़े काम की साबित होती हैं। कुछ बुजुर्ग महिलाएं रसोई में ही उपलब्ध चीजों से पौष्टिक व्यंजन व पेय बनाने की विधियां एक-दूसरे को सिखाती हैं। इससे स्वास्थ्य तो सुधरता ही है, उनका आत्मविश्वास भी बढ़ता है।
विज्ञापन


प्रबल यात्रा कार्यक्रम जैसे प्रयासों में घर के आसपास सब्जियां उगाने पर विशेष जोर दिया गया है। गांवों में कई बुजुर्ग अपने आंगन या घर के पीछे थोड़ी-सी जमीन में ही हरी सब्जियां उगा लेते हैं। इससे एक तो ताजी सब्जियां मिलती हैं और बागवानी करने से मन को सुकून भी। कई बुजुर्ग तो मजाक में कहते हैं कि पेड़-पौधे हमारे सबसे शांत दोस्त होते हैं, उन्हे पानी दो, तो मुस्कुरा उठते हैं। अक्सर वरिष्ठ नागरिक यह सोचकर व्यायाम नहीं करते कि अब उम्र निकल गई है। पर, हल्की-फुल्की शारीरिक गतिविधि वृद्धावस्था  में और भी जरूरी हो जाती है। इसलिए, ऐसी बैठकों में बेहद आसान व्यायाम भी सिखाए जाते हैं। कई गांवों में तो बुजुर्ग समूह बनाकर पार्क या चौपाल में ही व्यायाम करते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


मानसिक स्वास्थ्य को ठीक रखने के लिए भी कई रोचक उपाय किए जाते हैं। कोई पहेलियां पूछता है, कोई पुरानी कहावतें याद दिलाता है, तो कोई गीत गुनगुनाता है। कई जगह स्मृति बढ़ाने वाले खेल भी खेले जाते हैं। इससे अकेलापन कम होने के साथ दिमाग भी चुस्त बना रहता है। वृद्धावस्था में शरीर कमजोर होने के कारण कई बार फिसलन, टूटी सीढ़ियां या अंधेरा दुर्घटनाओं का कारण बन जाते हैं। इसलिए, इन कार्यक्रमों या समूहों में घर और आसपास के सुरक्षित वातावरण पर भी चर्चा की जाती है।

आज जरूरत केवल अस्पताल और दवाइयों की नहीं, बल्कि ऐसे संवेदनशील समाज की है, जहां वरिष्ठ नागरिक सम्मान व खुशी के साथ जीवन बिता सकें। यदि गांव, मोहल्ले व परिवार मिलकर छोटे-छोटे प्रयास करें, तो वृद्धावस्था जीवन का शांत व सुंदर पड़ाव बन सकती है। जिसने जीवन भर दूसरों को सहारा दिया, उसके कांपते हाथों को थाम लेना ही सच्ची संवेदना है। बुजुर्ग किसी घर का पुराना सामान नहीं, बल्कि उस दीपक की तरह होते हैं, जिसकी लौ भले धीमी हो जाए, पर वह घर को रोशन करना कभी नहीं छोड़ती। -पूनम पांडे

जिंदगी की दूसरी पारी बहुत महत्वपूर्ण होती है। हर शुक्रवार इस पर आपको नया पढ़ने को मिलेगा। आप अपने विचार, अनुभव या समस्याएं edit@amarujala.com पर भेज सकते हैं, विशेषज्ञों की मदद से हम कोशिश करेंगे कि संवाद का पुल बन सके।  

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed