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दूसरी पारी: पॉलिसी के पैसों से सपनों वाला रिटायरमेंट

Fri, 19 Dec 2025 07:19 AM IST
लव गौर पवन पांडेय
पवन पांडेय Published by: लव गौर Updated Fri, 19 Dec 2025 07:19 AM IST
सार

पॉलिसी की मैच्योरिटी वाली रकम बुजुर्गों के लिए सहारा बन सकती है। इससे वे न सिर्फ अपनी जरूरतें पूरी कर सकते हैं, बल्कि भविष्य की योजनाएं बनाने व बच्चों की पढ़ाई-शादी जैसे जरूरी लक्ष्य भी पूरे कर सकते हैं।

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Second innings: A dream retirement funded by Insurance policy money
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

विस्तार

62 साल की कमला सुबह-सुबह मंदिर से लौटी, तो घर में बीमा एजेंट बैठा था। दुआ-सलाम के बाद एजेंट ने बताया कि आपकी एलआईसी की दो पुरानी पॉलिसियां मैच्योर हो रही हैं। मैच्योरिटी की रकम के लिए फॉर्म पर आपके हस्ताक्षर और एक कैंसिल चेक चाहिए। कमला को याद आया उनके दिवंगत पति हमेशा कहा करते थे, ‘कमला, मैं रहूं या न रहूं, तुम्हें कभी किसी के सामने हाथ नहीं फैलाने दूंगा।’ कमला की आंखें नम हो गईं। मन में सवाल उठा कि इतने पैसों का मैं करूंगी क्या?
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किन पॉलिसियों में मैच्योरिटी रकम मिलती है: आमतौर पर उन पारंपरिक बीमा पॉलिसियों में मैच्योरिटी पर रकम मिलती है, जिनमें बीमा के साथ बचत एवं निवेश का विकल्प होता है, जैसे-एंडोमेंट प्लान, मनी-बैक पॉलिसी या टर्म प्लान विद रिटर्न ऑफ प्रीमियम। इस रकम का इस्तेमाल बुजुर्ग अपने या परिवार के लिए स्वास्थ्य बीमा खरीदने, परिवार का भविष्य संवारने, कर्ज उतारने या इमरजेंसी फंड तैयार करने में कर सकते हैं।
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स्वास्थ्य बीमा: वित्तीय योजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा स्वास्थ्य बीमा (हेल्थ इंश्योरेंस) है, क्योंकि सेवानिवृत्ति में आपकी आमदनी, बचत/निवेश और उससे होने वाली आय पर निर्भर होती है। ऐसे में अगर इलाज पर 15-20 लाख का खर्च अचानक आ जाए, तो पूरी जमा-पूंजी एक झटके में साफ हो सकती है। इससे बचने के लिए पर्याप्त कवरेज का स्वास्थ्य बीमा जरूरी है। अब कोई भी व्यक्ति स्वास्थ्य बीमा ले सकता है। बुजुर्ग विशेष तौर पर तैयार पॉलिसियों का रुख भी कर सकते हैं।
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आय का साधन: फिनकार्ट के संस्थापक तनवीर आलम बताते हैं कि वरिष्ठ नागरिक पारंपरिक बीमा पॉलिसी की मैच्योरिटी रकम मिलने पर अपने वित्तीय लक्ष्य और जोखिम उठाने की क्षमता के अनुसार निवेश करें। लंबी अवधि (पांच साल से ज्यादा) का लक्ष्य है, तो इक्विटी में अधिक हिस्सा रखें, ताकि आपका पैसा बढ़ सके। छोटे से मध्यम अवधि का नजरिया है, तो डेट व हाइब्रिड फंड तथा छोटी अवधि के फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश कर सकते हैं। नियमित आय के लिए म्यूचुअल फंड में सिस्टमैटिक विड्रॉल प्लान के जरिये निकासी की जा सकती है। जोखिम से बचने के लिए बचत योजनाएं भी हैं।

उच्च ब्याज वाले कर्ज से मुक्ति
सेवानिवृत्ति के बाद नियमित आय के अभाव में उच्च ब्याज वाले कर्ज आपकी बचत या बचत से होने वाली आय को खा सकते हैं। जैसे-क्रेडिट कार्ड का बकाया बिल न चुका पाने पर सालाना 48 फीसदी तक का ब्याज व पर्सनल लोन की ब्याज दर 10 से 25 फीसदी तक हो सकती है। इनको निपटाने में ही भलाई है।  

उपहार या बच्चों का भविष्य संवारना: मैच्योरिटी की रकम बुजुर्गों के लिए सहारा बन सकती है। इससे उपहार, बच्चों की पढ़ाई-शादी जैसे लक्ष्य पूरे किए जा सकते हैं। अल्पकाल के लिए बैंक एफडी या पोती हेतु सुकन्या समृद्धि योजना में निवेश के विकल्प हैं।   

इमरजेंसी फंड
जीवन की दूसरी पारी में आप मैच्योरिटी की राशि का एक हिस्सा इमरजेंसी फंड बनाने में इस्तेमाल कर सकते हैं। इस मद में आपको अपने 12 महीने के जरूरी खर्च के बराबर पैसा रखना होता है। इनमें से कुछ पैसे बचत खाते में रख सकते हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर वे तुरंत निकाले जा सकें। बाकी पैसों को डेट म्यूचुअल फंड या एक से तीन साल की एफडी में रख सकते हैं।

घूमना-फिरना भी जरूरी है
सेवानिवृत्ति के बाद अगर आपकी वित्तीय योजना चुस्त-दुरुस्त है और सारे वित्तीय लक्ष्य पूरे हो चुके हैं, तो आप कुछ पैसों का इस्तेमाल घूमने-फिरने या मनोरंजन के लिए कर सकते हैं। इससे जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाने में मदद मिलती है। नई जगहों की सैर से मानसिक स्वास्थ्य सुधरता है तथा परिवार के साथ नई यादें बनाने का मौका मिलता है।

यूलिप हो सकता है बढ़िया विकल्प
तनवीर आलम बताते हैं कि पहले एंडोमेंट और मनी-बैक जैसी पॉलिसियां अच्छा रिटर्न देती थीं, पर अब ऐसा नहीं है। अब यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान (यूलिप) बढ़िया विकल्प हो सकता है। इसमें प्रीमियम का एक हिस्सा बीमा और दूसरा इक्विटी व डेट में जाता है। मैच्योरिटी रकम टैक्स-फ्री होती है। सेक्शन 80सी के तहत कर कटौती का लाभ मिलता है। जीरो कॉस्ट यूलिप में प्रीमियम एलोकेशन चार्ज व पॉलिसी एडमिनिस्ट्रेशन चार्ज शून्य होते हैं। बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के बीच में ही स्विच करने की सुविधा मिलती है। यही खूबियां इन्हें म्यूचुअल फंड की तुलना में आकर्षक बनाती हैं। हालांकि, पांच साल का लॉक-इन पीरियड इसका एक नकारात्मक बिंदु भी है।

वरिष्ठ नागरिकों के लिए काम की संस्थाएं
ह्यूमैनिफाई फाउंडेशन जरूरतमंद बुजुर्गों के लिए भोजन, वस्त्र व नियमित मेडिकल चेकअप की व्यवस्था करता है। यहां उनके मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य का भी विशेष ख्याल रखा जाता है। भजन, संगीत तथा दिन में दो बार सामूहिक मंत्र-जाप का आयोजन भी कराया जाता है। उन्हें हमेशा खुश रखने के उद्देश्य से नृत्य-संगीत के कार्यक्रम भी नियमित रूप से संचालित किए जाते हैं। फाउंडेशन द्वारा आनंदम ओल्ड एज होम में बुजुर्गों को सुरक्षित, प्रेमपूर्ण व सम्मानजनक माहौल प्रदान किया जाता है। अधिक जानकारी के लिए इसकी आधिकारिक वेबसाइट humanify.in/index या 9810295333 पर संपर्क कर सकते हैं।

ब्लिसफुल ओल्ड एज होम फाउंडेशन मुख्य रूप से बेघर बुजुर्गों को भोजन, कपड़े, आश्रय और मेडिकल सहायता जैसी जरूरी सुविधाएं देकर उनकी मदद करता है। यह फाउंडेशन बुनियादी जरूरतों व सहायक माहौल और गरिमा पर ध्यान देता है। अधिक जानकारी के लिए इसकी आधिकारिक वेबसाइट www.blissfuloldagehomefoundation.org या 9899990862 पर संपर्क कर सकते हैं।


नोट-जिंदगी की दूसरी पारी बहुत महत्वपूर्ण होती है। हर शुक्रवार इस पर आपको नया पढ़ने को मिलेगा। आप अपने विचार, अनुभव या समस्याएं edit@amarujala.com पर भेज सकते हैं, विशेषज्ञों की मदद से हम कोशिश करेंगे कि संवाद का पुल बन सके।                  
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