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हे..! अश्लील महत्वाकांक्षा से भरे समय के रणवीरों, यह "समय" तुम्हारे मां-पिता को भी शर्मिंदा कर रहा है..!

Tue, 11 Feb 2025 02:20 PM IST
Sarang Upadhyay सारंग उपाध्याय
Updated Tue, 11 Feb 2025 02:20 PM IST
सार

समय-समय की बात है और आज समय -समय का तकाजा है। कम्बख्त इतनी फुरसती, और फूहड़  महत्वाकांक्षा में  डूबी पीढ़ी है कि  हर क्षण ही क्रिएटिव हो रही है। रचनात्मकता के सोते मानों देह के रोम-रोम से फूट रहे हैं। क्या अद्भुत समय है ना कि समय जब काटे नहीं कट रहा है तो चौक-चौराहों पर, पंडाल चौपालों पर और पनवाड़ियों  के अड्डे पर अश्लील बातें  मनोरंजन का नया ट्रेंड बन गई है। 

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samay raina show india's got latent controversy ranveer allahbadia comment on parents
कम्बख्त इतनी फुरसती, और फूहड़  महत्वाकांक्ष में डूबी पीढ़ी है कि हर क्षण ही क्रिएटिव हो रही है। - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

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एक पीढ़ी अपना लाभ देखकर आगामी सब पीढ़ियों का भविष्य बिगाड़ने की क्रिया में लगी है-
हरिशंकर परसाई 


यूं तो परसाई ने बहुत कुछ कहा है, लेकिन जब-जब जितना जो-जो कहा है उसकी कसौटी हर काल में उतनी ही  सिद्ध हुई जितनी कहते वक्त हुई थी। जाहिर है कहे गए का हिसाब और रह गए का लेखा-जोखा समय ही तो करता है। जैसे परसाई का एक जगह यह भी कहना कि- 

व्यस्त आदमी को अपना काम करने में जितनी अक्ल की ज़रूरत पड़ती है, उससे ज़्यादा अक्ल बेकार आदमी को समय काटने में लगती है। 

 


बहरहाल..!

समय-समय की बात है और समय -समय का तकाजा है। कम्बख्त इतनी फुरसती और फूहड़ महत्वाकांक्षा में डूबी पीढ़ी है कि हर क्षण ही क्रिएटिव हो रही है। रचनात्मकता के सोते मानों देह के रोम-रोम से फूट रहे हैं। क्या अद्भुत समय है ना कि समय जब काटे नहीं कट रहा है तो चौक-चौराहों पर, पंडाल चौपालों पर और पनवाड़ियों के अड्डे पर अश्लील बातें मनोरंजन का नया ट्रेंड बन गई हैं। 

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खैर..!

यह तो होना भी  चाहिए। इंडिया टेलेंटेड हो रहा है। पीढ़ियां फुरसती हैं और समय का ऐसा सदुपयोग हो रहा है कि दिन-रात के फेरे में  गर्म  चटपटी बातों को रस्ते और गुमठियों से निकलकर बाथरूम, बेडरूम और मां-बाप की निजता तक ले आना भी टेलेंट से कम थोड़ी ही है। टेलेंट भी ऐसा है कि पढ़े-लिखे बंदे गालियां बेचकर सिद्धि, प्रसिद्धि और जस का गान प्राप्त कर रहे हैं। 

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क्या महान दौर आया है इस देश में । इतिहास के हर कालखंड और समय चक्र से परे गंदी गालियों से,  स्त्री-पुरुषों के गुप्तांगों के साथ टांग खिंचाई कीजिए और चोखा दाम लीजिए।

 

परसाई कह तो रहे हैं- 

एक पीढ़ी अपना लाभ देखकर आगामी सब पीढ़ियों का भविष्य बिगाड़ने की क्रिया में लगी है।   


लेकिन उन्हें क्या पता यहां तो लाभ से दूर गालियां कमाई का नया धंधा  बन गया है। नई इंडस्ट्री लगी है और गजब का मुनाफा हो  रहा है। पीढ़ियां बर्बाद नहीं हो रही बल्कि Generation-Z ने तो करियर की नई लाइन सामने खड़ी कर दी है। सरकार के पास दिमाग नहीं। आला अफसर बेरोजगारी के आंकड़े दूर करने में अटके हैं लेकिन यहां समाधान खुद ब खुद सामने आ रहा है-

यह टैलेंट ही तो-  

 

-गालियां देने के पैसे मिल रहे. 

-गोबर खाने से और कीचड़ में लोट लगाने से पैसे मिल रहे 

-अपमान करके प्रसिद्ध का यशगान हो रहा-
-देखो रोजगार का संकट कैसे खत्म हुआ जा रहा- 


क्या शिक्षा और क्या  संस्कार?


छोड़ो कल की बातें
कल की बात पुरानी
नए दौर में लिखेंगे  मिलकर नई कहानी
हम हिंदुस्तानी-
 

हे..! "समय " 
हे..!  रण के वीर 

तुम दोनों ही  रण बांकुरे हो  प्रभुओं 


तुम दोनों ही  भारत की अति टेलेंडेट, अति प्रतिभाशाली, अति  वाक् चातुर्य रखने  वाली पीढ़ी हो। तुम्हारी अग्नि, वायु, जल, थल और नभ तक वायरल हो जाने वाली  क्षमता के आगे  ये जग बौरा रहा है युवाओं- 
 

देखो-

धर्म, अध्यात्म, विज्ञान, तकनीक, संस्कृति, समाज, मनोरंजन , यूट्यूब, पॉड कास्ट  सहित हर जगह और हर प्लेटफॉर्म पर अति..अति..अति..अति..अति.. और महाअति तक रचनात्मकता पैदा करने वालों और पैंट को फाड़कर रुमाल कर देने वाली  पीढ़ी  के नायकों, तुमने  इंडियाज गॉट लेटेंट' जैसा अद्वितीय, अद्भुत ,अलौकिक  समय रच देने के लिए तुम्हारे माता-पिता तुम्हें  कोटि-कोटि आभार दे रहे होंगे- 

 


 हे..समय के साथ चलने वाले रण के वीरों-
 

देखो आखिर क्या गलत कहा है तुमने डूड, सब ओपन ही तो है। यह संसार मैथुन से ही तो चल रहा है। चराचर जगत् की व्याति में स्त्री और पुरुष ही तो  हैं। मां-पिता के सम्मान की , घर की, संस्कृति की, परंपराओं की और समाज  में अश्लीलता फैलाने की  और तो और तुम्हारी छोटी सी फूहड़ महत्वकांक्षाओं की यह समाज इज्जत ना कर सका डूडो। 
 

तुम एकदम सही हो प्यारों -देखो खरी-खरी कहने वाले स्वयं कबीर तुम्हारा समर्थन कर रहे हैं- 
 

साधो, देखो जग बौराना।
सांची कहौ तो मारन धावै झूंठे जग पतियाना।
कहैं कबीर सुनो भाई साधो, इनमें कौन दिवाना


तुमसे हमदर्दी है सृजनधारियों। तुम्हारे टेलेंट को यह दुनिया आज नहीं कल समझेगी। लेकिन समझेगी जरूर। यह भी आज एक "समय" की बात है कि परसाई का लिखा अपने समय में फिर समयातीत नहीं हुआ। कबीर भी कहां भुलाए गए। सब यूं ही बना रहा। सबकुछ आज भी उतना ही ताजा और रिलेवेंसी के साथ है।

फिर तो यह आज जिंदा भी हुआ  है 'इंडियाज गॉट लेटेंट' में।


समय के साथ 21वी सदी का नया  "समय" रच रही पीढ़ियों  के लिए  प्रगतिशीलता की नई धारा रच देने वाले  मेरे "समय" इस देश में  जैसे राम ने, जैसे श्रवण कुमार ने जैसे नचिकेता ने, जैसे परशुराम ने  जैसे अष्टावक्र ने  पिता और मां की आज्ञा  को  ही शिरोधार्य करके ही जगत् में जगह बनाई, नाम कमाया, दिक् काल तक बने रहे हैं, वैसे तुम भी  इस समय पर अपने  निशान छोड़ जाओगे  कालजयी  रणवीरों। 

निश्चिंत रहो  समय के दूतों। आज  यह भी शो भले ही बंद हो जाए  लेकिन अश्लीलता और फूहड़ महत्वकांक्षाओं से भरे तुम्हारे चिटकुलों को  तुम क्या, तुम्हारे माता-पिता क्या और यह देश  क्या कोई भी भुला नहीं पाएगा-



देखो कबीर क्या कह रहे हैं- 

मूरख कौं पोथी दई बांचन कौं गुन गाथ।
जैसैं निर्मल आरसी दई अंध के हाथ..!

 


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

 

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