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गणतंत्र दिवस 2020 विशेषः 26 जनवरी को ही बना था भारत पूर्ण संप्रभुता संपन्न

Jay singh Rawatजयसिंह रावत Updated Sun, 26 Jan 2020 01:09 PM IST
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देश सम्पूर्ण प्रभुता संपन्न लोकतांत्रिक गणराज्य 26 जनवरी 1950 को अपना संविधान लागू करने के बाद ही बन सका था।
देश सम्पूर्ण प्रभुता संपन्न लोकतांत्रिक गणराज्य 26 जनवरी 1950 को अपना संविधान लागू करने के बाद ही बन सका था। - फोटो : ANI
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लगभग दो सदियों की अंग्रेजों की गुलामी के बाद भारत को 15 अगस्त 1947 को आजादी तो अवश्य मिली मगर यह देश सम्पूर्ण प्रभुता संपन्न लोकतांत्रिक गणराज्य 26 जनवरी 1950 को अपना संविधान लागू करने के बाद ही बन सका था। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भी पूरे 29 महीनों तक भारत पर अंग्रेजों द्वारा बनाई गई 1935 की राज व्यवस्था चलती रही और भारत स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के अनुसार साम्राज्ञी की पदवी तो समाप्त हो गई थी, मगर 26 जनवरी 1950 तक उनका प्रतिनिधि के रूप में गवर्नर जनरल भारत का भी राष्ट्र प्रमुख बना रहा। इसलिए हम कह सकते हैं कि हम भारत के लोगों का सम्प्रभुता सम्पन्न, समाजवादी, धर्म निरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य की जीवन यात्रा शुरू हुई।
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आजादी के बाद भी अंग्रेजों की राज व्यवस्था चली
सदियों के संघर्ष के बाद जब 15 अगस्त 1947 को देश ब्रिटिश उपनिवेशवाद से आजाद तो हुआ मगर भारत के पास राजकाज चलाने के लिये अपना कोई संविधान नहीं था। इतने विशाल और विविधताओं से भरपूर देश की शासन व्यवस्था चलाने के लिए रातोंरात एक संविधान नहीं बनाया जा सकता था। इसलिए ब्रिटिश संसद द्वारा 5 जुलाई 1947 को पारित और राजशाही द्वारा 18 जुलाई 1947 को अनुमोदित ‘भारत स्वतंत्रता अधिनियम’ में नया संविधान बनने और उसके लागू होने तक ‘भारत सरकार अधिनियम 1935  या भारत राजव्यवस्था अधिनियम 1935 के अनुसार शासन व्यवस्था चलाये रखने का प्रावधान किया गया था। सन् 1935 के अधिनियम द्वारा प्रांतों को स्वायत्तता प्रदान की गई।

प्रांतीय विषयों पर विधि बनाने का अधिकार प्रांतों को दिया गया था। केंद्रीय सरकार का कार्य एक प्रकार से संघात्मक होता था। प्रांत की कार्यपालिका शक्ति गवर्नर में निहित थी तथा वह इसका प्रयोग ब्रिटिश सरकार की तरफ से करता था। प्रांत की कार्यपालिका शक्ति गवर्नर में निहित थी तथा वह इसका प्रयोग ब्रिटिश सरकार की तरफ से करता था। भारत स्वतंत्रता अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार नए राष्ट्र का शासन भले ही भारतीय नेता जवाहरलाल नेहरू को सौंप दिया गया था और साम्राज्ञी की पदवी समाप्त कर दी गई थी लेकिन गवर्ननर जनरल का पद जारी रखा गया जो कि ब्रिटिश राजशाही या साम्राज्ञी का ही प्रतिनिधि होता था। इसलिए कहा जा सकता है कि देश के आजाद होने के बाद भी 29 महीनों तक भारत पर अंग्रेजों का ही शासन विधान चलता रहा।

अनुच्छेद 395 से मिली उपनिवेशवाद से पूर्ण मुक्ति
26 जनवरी 1950 को भारत का अपना संविधान जब लागू हुआ तो उसके अनुच्छेद 395 के प्रावधानों तहत ब्रिटिश पार्लियामेंट द्वारा पारित भारत सरकार अधिनियम 1935 और भारत स्वतंत्रता अधिनियम 1947 का निरसन या उन्हें समाप्त कर दिया गया। इसके साथ ही गवर्नर जनरल की जगह राष्ट्रपति ने ले ली। इसी तरह पाकिस्तान के संविधान की धरा 221 के तहत भारत सरकार अधिनियम 1935 समाप्त कर दिया गया। देखा जाय तो इसी के बाद भारत एक सम्प्रभुता सम्पन्न राष्ट्र बन पाया। क्योंकि इसके बाद न तो ब्रिटिश संसद द्वारा बनाया गया कानून और ना ही साम्राज्ञी का प्रतिनिधि गवर्नर जनरल राष्ट्र का मुखिया रह गया था।

भारत का संविधान दुनिया के सभी संविधानों में सबसे बड़ा होने के साथ ही हस्तलिखित संविधान है। हमारा संविधान 465 अनुच्छेद, 12 अनुसूचियां और 22 भागों में बंटा हुआ है। इस संविधान को बनाने में 2 साल 11 महीने और 18 दिन लगे। संविधान सभा द्वारा विश्व का सबसे बड़ा और सबसे लचीला हस्तलिखित संविधान 26 नवम्बर 26 नवम्बर को अंगीकृत किया गया और 26 जनवरी 1950 को यह संविधान लागू हुआ। 
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