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राजस्थान की राजनीति: कांग्रेस के गले की फांस बने राजेंद्र सिंह गुढ़ा

Mon, 24 Jul 2023 04:30 PM IST
Vinod Patahk विनोद पाठक
Updated Mon, 24 Jul 2023 04:30 PM IST
सार

उदयपुरवाटी से विधायक राजेंद्र सिंह गुढ़ा के आखिर एकाएक सुर क्यों बदले? वो पहले गहलोत गुट का अहम हिस्सा हुआ करते थे। गुढ़ा की भांति कांग्रेस के ओसियां से विधायक दिव्या मदेरणा भी आए दिन कानून व्यवस्था पर सरकार को आईना दिखा रही हैं।

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Rajendra Gudha sacked Rajasthan minister will affect state politics
राजेंद्र गुढ़ा - फोटो : Twitter

विस्तार

मणिपुर में हिंसा के बजाय राजस्थान की कानून व्यवस्था पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को गिरेबान में झांकने की सलाह देने पर राजेंद्र सिंह गुढ़ा मंत्रिमंडल से बर्खास्त भले कर दिए गए हैं, लेकिन अब वो कांग्रेस पार्टी के लिए गले की फांस बनते जा रहे हैं। वो ऐसे आत्मघाती नेता बन रहे हैं, जो कांग्रेस को संकट में डालते रहेगा।

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गुढ़ा ने मुख्यमंत्री के बेहद खास और आरटीडीसी के चेयरमैन धर्मेंद्र राठौड़ के घर ईडी और इनकम टैक्स के छापे के दौरान ‘लाल डायरी’ में कई राज होने की बात कहकर नया बम फोड़ दिया है। गुढ़ा ने यहां तक कहा कि ‘लाल डायरी’ को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत बेचैन थे। उन्हें इन छापों के दौरान ‘लाल डायरी’ निकालकर लाने का टास्क दिया था, जिसे उन्होंने पूरा किया।
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गुढ़ा ने चुप न रहने और सोमवार को विधानसभा में नया खुलासा करने का ऐलान भी किया है। गुढ़ा कभी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेहद करीबी थे, लेकिन अब उन्हें ही मुश्किल में डाल रहे हैं।

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राजेंद्र सिंह गुढ़ा के बदले सुर

झुंझुनूं के उदयपुरवाटी से विधायक राजेंद्र सिंह गुढ़ा के आखिर एकाएक सुर क्यों बदले? वो पहले गहलोत गुट का अहम हिस्सा हुआ करते थे। वर्ष 2018 में वो बसपा के टिकट पर जीतकर आए थे, लेकिन बसपा के छह विधायकों को लेकर उन्होंने पाला बदला और कांग्रेस ज्वाइन कर ली थी। सबकुछ ठीक चल रहा था।


जून-जुलाई 2020 में जब सचिन पायलट ने कांग्रेस से बगावत की, तब भी राजेंद्र सिंह गुढ़ा ने अशोक गहलोत का साथ दिया था, जबकि उस समय बसपा से ही कांग्रेस में आए रमेश मीणा, सचिन पायलट के साथ मानेसर चले गए थे। दरअसल, बसपा से कांग्रेस में शिफ्ट हुए विधायकों में भी आपस में प्रतिद्वंद्विता बनी हुई थी। कभी बसपा में रहे विधायक रमेश मीणा को कैबिनेट मंत्री बनाया गया और गुढ़ा को राज्यमंत्री, जबकि वो स्वयं को मीणा का सीनियर मानते हैं।
 

यही कारण था कि डेढ़ साल से वह पायलट के संग हो लिए थे। पिछले दिनों जब सचिन पायलट ने अजमेर से जयपुर तक भ्रष्टाचार को लेकर पदयात्रा की थी और पदयात्रा के समापन पर गुढ़ा ने सरकार पर भ्रष्टाचार को लेकर सीधा हमला बोला था, तभी लग रहा था कि वो ज्यादा दिन तक मंत्रिमंडल में नहीं टिक पाएंगे।

चंद रोज पहले जब एआईएमआईएम के सुप्रीमो असदुद्दीन ओवैसी जयपुर आए थे तो राजेंद्र सिंह गुढ़ा ने उसने भी मुलाकात की थी, जबकि ओवैसी को कांग्रेस अपने वोट काटने वाला बता रही है। ओवैसी ने गुढ़ा की कैमरों के आगे जमकर तारीफ की थी। एक तरह से राजेंद्र सिंह गुढ़ा विपक्ष के ब्लू आइड बॉय बने हुए हैं। गुढ़ा के नए-नए खुलासों पर कांग्रेस के लिए जवाब देना आसान नहीं होगा।

Rajendra Gudha sacked Rajasthan minister will affect state politics
राजेंद्र सिंह गुढ़ा और राजनीति - फोटो : Twitter

अगला नंबर दिव्या मदेरणा का?

दूसरी ओर, राजेंद्र सिंह गुढ़ा की भांति कांग्रेस के ओसियां से विधायक दिव्या मदेरणा भी आए दिन कानून व्यवस्था पर सरकार को आईना दिखा रही हैं। वो खुद को पुलिस सुरक्षा में भी असुरक्षित बता चुकी हैं। राजनीतिक के जानकार मान रहे हैं कि राजेंद्र सिंह गुढ़ा के बाद अगला नंबर दिव्या मदेरणा का हो सकता है। हालांकि, दिव्या को हटाना आसान नहीं होगा, क्योंकि दिव्या जिस जाट समुदाय से आती हैं, उसे कांग्रेस नाराज नहीं करना चाहेगी।

गुढ़ा और दिव्या ही केवल अशोक गहलोत के लिए परेशानी का सबब नहीं बने हुए हैं। उनके मंत्रिमंडल के कुछ अन्य सदस्य उन्हीं के पार्टी के नेताओं के निशाने पर हैं। मंत्री प्रमोद जैन भाया और जाहिदा खान पर विधायक उंगली उठाते रहते हैं।

25 सितंबर 2022 को अशोक गहलोत गुट की बगावत के बाद कांग्रेस आलाकमान के निशाने पर मंत्री शांति धारीवाल, महेश जोशी और आरटीडीसी के चेयरमैन धर्मेंद्र सिंह राठौड़ भी हैं। तीनों मुख्यमंत्री के बेहद खास हैं और कांग्रेस आलाकमान ने तीनों को संगठन के कार्यों से दूर कर दिया है।

इस बार कांग्रेस चुनाव से दो महीने पहले प्रत्याशियों की घोषणा करने की बात कह रही है। जिस तेजी से कांग्रेस संगठन में नियुक्तियां हो रही हैं ऐसे में लग रहा है कि पार्टी की चुनावी तैयारियां काफी आगे चल रही हैं, लेकिन जिस तरह से कांग्रेस के अंदर बगावत हो रही है तो सवाल उठ रहा है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जो एक के बाद एक लोकलुभावन योजनाओं का ऐलान कर रहे हैं, तो क्या पार्टी की गुटबाजी में वो वोटरों को रिझा पाएंगे?

यदि गुटबाजी, बयानबाजी और बगावत यूं ही बनी रही तो कांग्रेस के लिए वर्ष 2013 की स्थिति भी बन सकती है, जब अशोक गहलोत मुख्यमंत्री थे और पार्टी को शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा था। तब पार्टी 21 सीटों पर सिमट गई थी।


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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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