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राजस्थान विधानसभा चुनाव : कांग्रेस-भाजपा पर भगवा रंग, कहीं संत मैदान में तो कहीं दिग्गज मंदिरों की चौखट पर

Sat, 04 Nov 2023 01:41 PM IST
Vinod Patahk विनोद पाठक
Updated Sat, 04 Nov 2023 01:41 PM IST
सार

भाजपा के साथ कांग्रेस प्रत्याशी भी मंदिरों से अपने चुनाव प्रचार की शुरुआत कर रहे हैं और उनकी पूरी कोशिश है कि वो भी वोटरों के बीच हिंदूवादी नजर आएं।

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भाजपा के साथ कांग्रेस प्रत्याशी भी मंदिरों से अपने चुनाव प्रचार की शुरुआत कर रहे हैं और उनकी पूरी कोशिश है कि वो भी वोटरों के बीच हिंदूवादी नजर आएं। - फोटो : Amar Ujala Digital

विस्तार

राजस्थान विधानसभा चुनाव में अब भगवा रंग चढ़ने लगा है। वैसे तो भगवा पर भाजपा पहला अधिकार मानती है, लेकिन इस बार कांग्रेस भी पीछे नहीं है। पार्टी ने जहां साधु-संतों को चुनावी मैदान में उतारा है, वहीं कांग्रेस की भी कोशिश है कि वो संत समाज से कुछ चेहरों को पाले में लेकर आए। भाजपा के साथ कांग्रेस प्रत्याशी भी मंदिरों से अपने चुनाव प्रचार की शुरुआत कर रहे हैं और उनकी पूरी कोशिश है कि वो भी वोटरों के बीच हिंदूवादी नजर आएं।

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भाजपा की उम्मीदवारों की पहली सूची में अलवर से सांसद महंत बालकनाथ को तिजारा सीट से टिकट दिया गया। महंत बालकनाथ नाथ संप्रदाय से आते हैं। नाथ को जिस तिजारा सीट से मैदान में उतर गया है, वहां धुव्रीकरण होता आया है। महंत बालकनाथ के नामांकन के समय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और फायर ब्रांड नेता योगी आदित्यनाथ भी पहुंचे और उन्होंने तालिबान से लेकर हनुमान की गदा तक का जिक्र किया।

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एक तरह से योगी आदित्यनाथ से एक टोन चुनावों के लिए सेट कर दी। भाजपा ने पोखरण सीट से महंत प्रतापपुरी को टिकट दिया है। महंत प्रतापपुरी वर्ष 2018 के चुनाव में इस सीट पर चंद वोटों से हार गए थे।

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इस सीट पर भी ध्रुवीकरण होता है, क्योंकि यहां से कांग्रेस ने मुस्लिम धर्मगुरु गाजी फकीर के बेटे सालेह मोहम्मद को एक बार फिर टिकट दिया है। वर्ष 2018 में सालेह मोहम्मद ने ही महंत प्रतापपुरी को हराया था और अशोक गहलोत सरकार में मंत्री बने थे। गाजी फकीर का प्रभाव पाकिस्तान तक है।

 

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भगवा ध्वज उठाने में कांग्रेस भी पीछे नहीं है। कांग्रेस ने भाजपा से टिकट की कोशिश कर रहीं साध्वी अनादि को पार्टी में शामिल कराया है। - फोटो : Social Media

भाजपा ने कहां खेला है कार्ड? 

भाजपा ने सिरोही सीट से ओटाराम देवासी को एकबार फिर टिकट दिया है। देवासी समाज से आने वाले ओटाराम वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में जीतकर आए थे और वसुंधरा राजे सरकार में उन्हें देवस्थान विभाग का मंत्री बनाया गया था। हालांकि, वो मंत्री रहते हुए मुंडारा स्थित चामुंडा माता मंदिर में पुजारी रहे। मंदिर की करोड़ों रुपए की संपत्तियां हैं और लाखों रुपए का दान आता है।


राजधानी जयपुर की हवामहल सीट से भाजपा ने बालमुकुंद आचार्य को टिकट दिया है। बालमुकुंद आचार्य कुछ दिन पहले तक टिकटों की दौड़ में कहीं नहीं थे, लेकिन महीनाभर पहले वो एकाएक हवामहल क्षेत्र में मंदिरों को तोड़ने को लेकर सक्रिय हुए। उन्हें विश्व हिंदू परिषद का भी साथ मिला। वो बालाजी हाथोज धाम के महंत हैं। मात्र एक महीने की सक्रियता पर उन्हें टिकट मिल गया है।

 

यह भी माना जा रहा है कि वो न केवल हवामहल, बल्कि किशनपोल, आदर्श नगर और सिविल लाइंस सीट पर भी हिंदू वोटों को साधने का काम करेंगे। पार्टी ने अभी पश्चिमी राजस्थान की पचपदरा सीट से प्रत्याशी घोषित नहीं किया है और यहां पर भजन गायक प्रकाश माली दावेदारी जाता रहे हैं। खास बात यह है कि संत समाज भी भाजपा पर लगातार अधिक से अधिक संतों को टिकट देने का दबाव बनाता रहा है।


कांग्रेस अपनी तरह से चल रही है हिंदुत्व की चाल 

भगवा ध्वज उठाने में कांग्रेस भी पीछे नहीं है। कांग्रेस ने भाजपा से टिकट की कोशिश कर रहीं साध्वी अनादि को पार्टी में शामिल कराया है। सिंधी समाज से आने वाले साध्वी अनादि की ज्वाइनिंग के समय न केवल मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, बल्कि कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा भी मौजूद थे।


पिछले दिनों पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने अपने नामांकन से पहले टोंक के भूतेश्वर महादेव मंदिर में पूजा अर्चना की। इसी तरह कई और प्रत्याशी भगवा पट्टा डालकर नामांकन करने जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी राजस्थान में मंदिरों के दर्शन कर चुके हैं।


कुल मिलाकर गहलोत सरकार को तुष्टीकरण के मुद्दे पर घेरने वाली भाजपा को कांग्रेस भी हिंदुत्व के मुद्दे पर टक्कर देने की कोशिशों में जुटी है।

स्वयं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कई बार कह चुके हैं कि क्या हम हिंदू नहीं हैं?


गहलोत सरकार में मंत्री और सिविल लाइंस सीट से कांग्रेस प्रत्याशी प्रताप सिंह खाचरियावास खुद को भगवान राम का वंशज बता रहे हैं। अब देखना है कि हार्डकोर हिंदुत्व वाली भाजपा और सॉफ्ट हिंदुत्व की राह पर चल रही कांग्रेस में से प्रदेश की जनता किसे पसंद करती है?
 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकताु, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

 

 

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