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दूसरा पहलू: क्या खत्म हो जाएगा समुद्री जीवन?
Tue, 07 Jul 2026 07:05 AM IST
Devesh Tripathi
कैथरीना जे पीटर्स
कैथरीना जे पीटर्स
Published by: Devesh Tripathi
Updated Tue, 07 Jul 2026 07:05 AM IST
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समुद्री जीवन पर खतरा क्यों?
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विस्तार
विशाल महासागर दूर से जितने निर्मल और असीम दिखाई देते हैं, उनकी गहराइयों में उतनी ही चिंताजनक कहानी छिपी है। कभी प्रकृति की सबसे सुरक्षित शरणस्थली माने जाने वाले ये समुद्र अब ऐसे रासायनिक प्रदूषण की चपेट में हैं, जो पीढ़ियों तक बना रहता है। व्हेल व डॉल्फिन जैसे विशाल समुद्री स्तनधारी भी इससे सुरक्षित नहीं हैं। एक हालिया वैश्विक अध्ययन ने संकेत दिया है कि इनके शरीर में पीएफएएस, यानी ‘फॉरएवर केमिकल्स’ का स्तर लगातार बढ़ रहा है।पीएफएएस कृत्रिम रसायनों का ऐसा समूह है, जो प्राकृतिक रूप से नष्ट नहीं होता। इन्हें नॉन-स्टिक बर्तनों, पानीरोधी कपड़ों, दाग-रोधी कालीनों और कई औद्योगिक उत्पादों के निर्माण में व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाता है। कारखानों का अपशिष्ट, सीवेज, औद्योगिक बहाव और आग बुझाने वाले रसायन इन्हें नदियों तक पहुंचाते हैं, जहां से ये अंततः समुद्र में प्रवेश कर जाते हैं। समुद्र में मौजूद सूक्ष्म जीवों और मछलियों के जरिये ये रसायन अंत में व्हेल व डॉल्फिन के शरीर में पहुंचते हैं। हर स्तर पर पीएफएएस की मात्रा बढ़ती जाती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि पीएफएएस प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर कर सकते हैं, हार्मोनल असंतुलन पैदा कर सकते हैं और प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं। चिंताजनक यह है कि मादाएं गर्भावस्था तथा स्तनपान के दौरान इन रसायनों को अपने बच्चों तक भी पहुंचा देती हैं, जिससे अगली पीढ़ी जन्म लेते ही इनके संपर्क में आ जाती है। हालांकि भारत, इंडोनेशिया और अफ्रीका के कई समुद्री क्षेत्रों से अभी पर्याप्त वैज्ञानिक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, पर विशेषज्ञों के अनुसार, यह समस्या वैश्विक समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक गंभीर चुनौती है।
फिर भी, ओजोन परत को नुकसान पहुंचाने वाले रसायनों पर वैश्विक प्रतिबंधों ने पहले भी सकारात्मक परिणाम दिए हैं। यूरोप में कुछ पीएफएएस रसायनों पर सख्ती के बाद इनके स्तर में गिरावट दर्ज की गई है। यह बताता है कि मजबूत नीतियां और सख्त नियम बदलाव ला सकते हैं। समुद्र में पहुंचा हर प्रदूषक अपने-आप समाप्त नहीं होता और ‘फॉरएवर केमिकल्स’ इसके सबसे बड़े उदाहरण हैं। प्रकृति को बचाने के लिए हमें तुरंत ठोस कदम उठाने होंगे, यही सबसे बड़ा उपाय है।
-साथ में, फ्रेडरिक साल्ट्रे तथा कैरेन स्टॉकिन (द कन्वर्सेशन)