यादों में पंकज उधास: खामोश हो गई आम आदमी के दिल को सुकून देने वाली आवाज
एक दौर था जब 'चिट्ठी आई है' जैसी गजल गाकर पंकज उधास ने बेशुमार लोकप्रियता कमाई और वे उस दौर में रेडियो के माध्यम से हर घर में गूंजने वाली आवाज बन गए।
एक दौर था जब 'चिट्ठी आई है' जैसी गजल गाकर पंकज उधास ने बेशुमार लोकप्रियता कमाई और वे उस दौर में रेडियो के माध्यम से हर घर में गूंजने वाली आवाज बन गए।
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पद्मश्री पंकज उधास हिंदुस्तानी संगीत में गजल की वो आवाज रहे, जिन्होंने गजल की जटिल परंपरा से बाहर निकाल कर उसे हर आदमी तक पहुंचाया। पंकज उधास ने न केवल गली-मोहल्लों, चौक-चौराहों, छोटी जगह के लोगों के दिलों को गजल के सुकून से परिचित कराया, बल्कि आम आदमी के दुख-दर्द को पहचानने वाली आवाज भी बने।
एक दौर था जब 'चिट्ठी आई है' जैसी गजल गाकर पंकज उधास ने बेशुमार लोकप्रियता कमाई और वे उस दौर में रेडियो के माध्यम से हर घर में गूंजने वाली आवाज बन गए। पंकज उधास देश-परदेस में रहने वाले और अपने देश को छोड़कर काम काज करने वाले व्यक्ति के दर्द की आवाज थे। आज पंकज उधास हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन उनकी आवाज हमेशा हमारे दिलों पर राज करती रहेगी।
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लेजेंडरी सिंगर पंकज उधास ने 72 साल की उम्र में अंतिम सांस ली। इस बात की खबर पंकज की बेटी नायाब उधास ने एक पोस्ट के जरिए साझा की है, जिसमें उन्होंने लिखा- 'बहुत दुख के साथ हमें बताना पड़ रहा है कि पद्मश्री पंकज उधास का 26 फरवरी 2024 को निधन हो गया है। वह लंबे समय से बीमार थे और उम्र संबंधी बीमारियों का सामना कर रहे थे।' इस खबर के बाद संगीत जगत में शोक की लहर छा गई है। पंकज जैसे गायक का इस तरह दुनिया छोड़कर चले जाना उनके फैंस को गमगीन कर गया है। सोशल मीडिया पर लोग नम आंखों के साथ पंकज उधास को श्रद्धांजलि दे रहे हैं।
कैसे शुरू हुआ म्यूजिकल करियर?
पंकज उधास के संगीत के सफर की शुरुआत 6 साल की उम्र से ही हो गई थी। उनके घर शुरू से ही संगीत का माहौल था, पंकज उधास को संगीत विरासत में मिला था। यही वजह है कि संगीत की दुनिया में कदम रखने के बाद वह हमेशा के लिए उसी के होकर रह गए। उन्हें संगीत का पहला एक्सपोजर स्कूल में प्रार्थना करने से मिला और ये सफर इतना आगे बढ़ता चला गया कि आज उनके निधन के बाद भी लोग उनकी आवाज को दिल से लगाकर रखे हुए हैं।
पंकज उधास का पहला एल्बम 'आहट' 1980 में आया था, जिसमें उन्होंने कई गजलें गाई थीं। वहीं आम आदमी के दिलों में बसने वाले उनके कुछ मशहूर गानों की बात करें तो 'जिएं तो जिएं कैसे बिन आपके...', 'चांदी जैसा रंग है तेरा, 'चिट्ठी आई है...,' ना कजरे की धार, ना मोतियों के हार...', सोने जैसे बाल...', जैसे कई गाने शामिल हैंं।
भावना की डोर-
गजल संगीत का वो जोनर है जो हर दिल को कहीं न कहीं छेड़ने की ताकत रखता है। ऐसे में इसकी गायकी करना लोगों के दिलों को छेड़ने से कम नहीं माना जाता है। इसे यूं कहा जा सकता है कि गजल गाने वाले गायकों के हाथ में लोगों की भावनाओं की एक डोर होती है। यदि इसे कम या ज्यादा छेड़ दिया जाए तो काम खराब हो सकता है, इसलिए गजल गायकों के कंधों पर एक बड़ी जिम्मेदारी होती है, जिसे पंकज उधास ने बखूबी निभाया है।
पंकज उधास के गानों में दर्द और जुदाई की टीस ने लोगों की आत्मा को छू लिया। ऐसा भी कहा जा सकता है कि उनकी रुमानी आवाज उनके निजी जीवन की देन थी।
लव स्टोरी
गजल के सम्राट पंकज उधास की लव स्टोरी भी इतनी आसान नहीं थी। पत्नी फरीदा से पहली मुलाकात में ही पंकज उन्हें अपना दिल दे बैठे थे। लेकिन इस बीच उनके प्यार के बीच धर्म की एक बहुत बड़ी दीवार थी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। संगीत की दुनिया पर राज करने वाले पंकज ने फरीदा से शादी करके ये साबित कर दिया कि संगीत का कोई मजहब नहीं होता।पांच दशक तक संगीत प्रेमियों के दिलों पर राज करने वाले पंकज उधास को उनकी बेहतरीन आवाज के लिए कई पुरस्कार भी मिले। उन्हें साल 2006 में पद्मश्री, 2012 में महाराष्ट्र गौरव पुरस्कार, 1985 में एल.एस. गाल पुरस्कार, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (2003) और इंडियन फिल्म एंड टेलीविजन एकेडमी (IIFA) अवॉर्ड से नवाजा गया। फिल्म ‘नाम’ का गीत ‘चिट्ठी आई है’ के पंकज को बेस्ट प्लेबैक सिंगर कैटेगरी में फिल्मफेयर अवॉर्ड (1988) भी मिला था।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।