फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   multiverse theory is real or just imagination of science

क्या मल्टीवर्स सच में होते हैं?: यह पासा फेंकने के समान, जहां परिणाम निश्चित नहीं, केवल संभावनाएं हैं

Tue, 14 Apr 2026 07:40 AM IST
Nitin Gautam जैकरी स्लेपियन, अमर उजाला
जैकरी स्लेपियन, अमर उजाला Published by: Nitin Gautam Updated Tue, 14 Apr 2026 07:40 AM IST
सार

मल्टीवर्स यानी सभी संभावित ब्रह्मांडों के एक काल्पनिक संग्रह का विचार विज्ञान गल्प के प्रशंसकों को बहुत पसंद आता है।

विज्ञापन
multiverse theory is real or just imagination of science
मल्टीवर्स की थ्योरी क्या है - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मल्टीवर्स यानी सभी संभावित ब्रह्मांडों के एक काल्पनिक संग्रह का विचार विज्ञान गल्प (साइंस फिक्शन) के प्रशंसकों को बहुत पसंद आता है। लेकिन क्या मल्टीवर्स वास्तव में मौजूद है? इसका उत्तर देने से पहले यह समझना जरूरी है कि ‘वास्तविक’ होने का अर्थ क्या है। सामान्य रूप से हम उसी चीज को वास्तविक मानते हैं, जिसे हम अपनी इंद्रियों से देख, सुन या छू सकें। लेकिन कई ऐसी चीजें भी होती हैं, जिन्हें हम सीधे महसूस नहीं कर सकते, फिर भी वे मौजूद होती हैं। जैसे भोजन को गर्म करने वाली माइक्रोवेव की तरंगें या प्राचीन जीवों के अस्तित्व के प्रमाण। इसी आधार पर यह प्रश्न दो तरह से पूछा जा सकता है। पहला, क्या हम मल्टीवर्स को सीधे अनुभव कर सकते हैं? दूसरा, यदि नहीं, तो क्या उसके प्रभावों का कोई प्रमाण मिल सकता है? वैज्ञानिकों के अनुसार, हम इसे सीधे अनुभव नहीं कर सकते, लेकिन कुछ अप्रत्यक्ष संकेतों की संभावना से इन्कार भी नहीं किया जा सकता।
विज्ञापन


मल्टीवर्स बहुत-बहुत छोटी चीजों, जैसे कि परमाणुओं और उप-परमाणु कणों के व्यवहार को समझने का एक तरीका है। वैज्ञानिक उन नियमों को ‘क्वांटम यांत्रिकी’  कहते हैं, जो इन बहुत छोटी चीजों के व्यवहार को नियंत्रित करते हैं। क्वांटम यांत्रिकी में, किसी प्रयोग का परिणाम क्या होगा, यह कभी निश्चित नहीं होता। यह पासा फेंकने के समान है, जहां परिणाम निश्चित नहीं होता, केवल संभावनाएं होती हैं। इसी विशेषता को समझाने के लिए एक विचार प्रस्तुत किया गया, जिसके अनुसार हर संभव परिणाम वास्तव में होता है और हर परिणाम एक नए ब्रह्मांड का निर्माण करता है। इस दृष्टिकोण में हर घटना के साथ नए ब्रह्मांड बनते रहते हैं। हालांकि यह केवल एक व्याख्या है, इसका कोई ठोस प्रमाण अभी तक नहीं मिला है।
विज्ञापन


मल्टीवर्स से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण विचार यह है कि ब्रह्मांड के मूल कण ऊर्जा के सूक्ष्म कंपन से बने हो सकते हैं और ब्रह्मांड में हमारे ज्ञात तीन आयामों से अधिक आयाम भी हो सकते हैं। यदि ऐसा है, तो अलग-अलग ब्रह्मांडों में भौतिक नियम और स्थितियां अलग-अलग हो सकती हैं, जिससे अनेक प्रकार के ब्रह्मांडों की संभावना बनती है। फिर भी, अब तक ऐसा कोई निश्चित प्रमाण नहीं मिला है, जो यह साबित कर सके कि मल्टीवर्स वास्तव में मौजूद है। यदि अलग-अलग ब्रह्मांड अस्तित्व में हों, तो संभव है कि वे एक-दूसरे से पूरी तरह अलग हों और हम उनके बारे में सीधे कभी जान न सकें। हालांकि भविष्य में वैज्ञानिक प्रयोगों और खोजों से कुछ अप्रत्यक्ष प्रमाण मिल सकते हैं, जो इसे मजबूती दे सकते हैं। फिलहाल, मल्टीवर्स एक आकर्षक और संभावनाओं से भरा विचार है, पर यह अभी तक सिद्ध नहीं हुआ है। कौन जाने भविष्य में क्या हो!      -द कन्वर्सेशन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed