मप्र: क्या जीत की गारंटी के शंखनादों के बीच भाजपा में भरोसे का साइलेंट ब्रांड बन रहे हैं शिवराज?
मप्र की सियासत में शिवराज सिंह चौहान राजनीतिक कीर्तिमानों का सबसे उभरता हुआ स्तंभ हैं। भारतीय जनता पार्टी को दिया गया लंबा छात्र जीवन, आरएसएस के सामाजिक और राजनीतिक अनुषांगिक संगठनों में आंदोलन में होम हुई उम्र, संसद में पांच बार की सांसदी और तकरीबन तीन दशक तक फैला हुआ सीएम पद - क्या 2023 के ये चुनाव में भाजपा की विजय के वे असली नायक हैं?
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विज्ञापनराजनीति पहुंचने से ज्यादा यात्रा की महत्वकांक्षा है और मंजिल से ज्यादा सफर की इच्छा। जो यहां अनुभव से सधा है वह धैर्य से बंधा है, और जो धैर्य से गुंथा है वह सत्ता में दीर्घकाल तक स्थापित रहा है- फिर चाहे वह दो दशक से ज्यादा तक पश्चिम बंगाल पर राज करने वाले मुख्यमंत्री ज्योतिबसु रहे हों या फिर 2023 के विधानसभा चुनावों में टिकट तक ना मिल पाने की अफवाहों में करियर की सांझ तक करा बैठे मप्र के सीएम शिवराज सिंह चौहान हों-
-दोनों ही सीएम सियासत की बिसात पर अनुभव की लंबी यात्रा की बानगी हैं। फिलहाल वामपंथ का सियासी सितारा अस्त हो चुका है, लेकिन देश की दक्षिणपंथ की राजनीति में एक तारा सियासत का थोड़ा नायाब सितारा बनने की जगह तलाश रहा है-
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भाजपा में शिवराज सिंह चौहान का होनादरअसल, मप्र की सियासत में शिवराज सिंह चौहान राजनीतिक कीर्तिमानों का सबसे उभरता हुआ स्तंभ हैं। भारतीय जनता पार्टी को दिया गया लंबा छात्र जीवन, आरएसएस के सामाजिक और राजनीतिक अनुषांगिक संगठनों में आंदोलन में होम हुई उम्र, संसद में पांच बार की सांसदी और तकरीबन तीन दशक तक फैला हुआ मप्र के सबसे ज्यादा बार सीएम पद के कार्यकाल का खिताब संजोने वाले शिवराज को गर भाजपा में भरोसे का उभरता हुआ साइलैंट ब्रैंड कहा जाए तो अतिशियोक्ति नहीं होगी।
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खास यह कि साइलैंट होता हुआ ये ब्रांड यदि 2023 के इन चुनावों में दोबारा मप्र का सीएम बनता है, तो भाजपा में वे वाइब्रैंट भी होंगे, जिसकी संभावना कभी भाजपा के उस सबसे बुजुर्ग राजनेता ने जताई थी जो अपने सियासी जीवन में देश के पीएम बनने की इच्छा पूरी किए बिना ही राजनीति से रिटायर हो गया।
बानगी दूं तो यूट्यूब पर उस वीडियो को खंगाला जा सकता है, जब आडवाणी ने कभी उनकी तुलना करते हुए उन्हें मोदी से श्रेष्ठ बताया था। यह वह दौर था जब मोदी गुजरात की सरहदों से पहली बार संसद में पहुंचने की तैयारियां कर रहे थे जबकि मोदी के बरक्स पीएम पद के लिए शिवराज अपनी बेहद शाइस्ता सी नजर रखते थे।
बहरहाल, सियासत में वर्तमान की जड़ें सुदूर अतीत से रिसते किस्सों और इतिहास की पेचिंदा घटनाओं से सिंचित होती रहीं हैं। दौर बदलते हैं और राजनीति अपने औजारों में धार करती चलती है। आज प्रधानमंत्री मोदी का रसूख, रुतबा और लोकप्रियता आसमान की बुलंदियों पर है। मप्र, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में क्षेत्रिय नेता नहीं बल्कि उनका चेहरा चुनावी जीत की गारंटी था। ऐसा उन्होंने हर रैली से जयघोष किया।
यह एक तरह से 2024 के लोकसभा चुनावों में प्रधानमंत्री पद के तीसरे कार्यकाल की गारंटी का शंखनाद ही रहा। परिवर्तन भी ऐसे ही हुए। मप्र में जब टिकट बंटे तो प्रदेश भाजपा में हलचल हुई। दिग्गज अपनी-अपनी सीटों पर विधायकी जीतने दिल्ली से उतारे गए। लेकिन बदलाव के इस दौर में सबसे आखिर में करियर की सांझ ढलने की अफवाह के बीच टिकट मिला भाजपा के सबसे अनुभवी शख्स को।
भाजपा के गणित में चुनावी टिकट और शिवराज
भाजपा संगठन में देश के इस हृदय प्रदेश में चुनावी सियासत को लेकर इस बार अलग गणित था। हालांकि देर से ही सही शिवराज को टिकट मिला लेकिन प्रदेश में लगे उन पोस्टर में जगह नहीं मिली जिसके वे हकदार थे।
इस समय मप्र में चुनावी रिजल्ट सामने हैं। सीटों के समीकरण में पिछला रिकॉर्ड और बेहतर हुआ है। जीत का सहरा भले ही पीएम मोदी की गारंटी के माथे बांधा जा रहा है लेकिन प्रदेश की राजनीति को करीब से जानने वाले और जमीनी पत्रकार, राजनीतिक पंडित इस बात को मुखरता से कहते रहे हैं कि भाजपा की इस जीत के असली नायक शिवराज सिंह चौहान ही हैं।
लंबी यात्राएं, जमीनी संपर्क, ग्रामीण और आंचलिक जीवन में गाहे-बगाहे हिस्सेदारी, सत्ता में रहते हुए जनप्रिय योजनाओं के बीच जनता से सीधा संपर्क और अंत में मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना का चमत्कार, यह सब भाजपा की झोली में जीत की असली वजह हैं।
अतीत पर नजर डालें तो कभी 2018 में मंदसौर किसान गोली कांड, भ्रष्टाचार के आरोप और आंतरिक सियासत से अपनी ही छवि में कैद रहे शिवराज सिंह के लिए कांग्रेस एक चुनौती बनी थी। लेकिन उस दौर के बाद साइलैंट काम करने वाला यह वाइब्रैंट नेता अपनी कार्य की शैली बदल चुका है।
शिवराज विनम्र हुए हैं जो वे पहले से थे ही। राजनीति में छवि की कीमत समझने लगे हैं और दिए जाने बयानों की संवदेनशीलता भी। वे छवि सुधारने को आतुर दिखते हैं। आदिवासी पर पेशाब कांड जैसी घटना पर पैर धोकर देशभर के आदिवासियों से तुरंत माफी, लॉ एंड ऑर्डर, किसानों से संपर्क और काम का सबसे ज्यादा फोकस महिलाओं से जुड़ी योजनाओं पर होना और उसकी डायरेक्ट मॉनिटरिंग करना, दरअसल ऐसा बहुत कुछ है जो शिवराज सिंह चौहान को भाजपा में एक सधा, कुशल और अनुभव में पका हुआ राजनेता बनाती है।
अच्छी बात यही रही कि वे भाजपा ने अपने इस नेता के तजुर्बे को सर्वे के तराजु में तौलकर जगह दे दी क्योंकि गारंटी के कितने ही शंखनाद लाउड स्पीकर में छोड़ दिए जाएं और हेलिकॉप्टर से कितने ही नेता उतार लिए जाएं और रैलियों में भीड़ इकट्ठी कर ली जाए, लेकिन क्षेत्रीय नेता जमीन पर यदि काम ना कर पाएं तो चुनाव जीतना आसान नहीं होता।
देखना यह है कि शिवराज फिर से सीएम बनकर भाजपा का साइलैंट से वाइब्रैंट ब्रैंड बनेंगे?