विज्ञापन
विज्ञापन

ओडिशा से ग्राउंड रिपोर्टः क्या चुनाव जीतने के मास्टर प्लान में सफल होंगे मोदी-शाह?

Sanjiv Pandeyसंजीव पांडेय Updated Mon, 22 Apr 2019 05:52 PM IST
ओडिशा में चुनावी जंग सिर्फ दिल्ली के लिए नहीं भुवनेश्वर के लिए भी लड़ी जा रही है।
ओडिशा में चुनावी जंग सिर्फ दिल्ली के लिए नहीं भुवनेश्वर के लिए भी लड़ी जा रही है। - फोटो : अमर उजाला
ख़बर सुनें
भारत के पूर्वी राज्य ओडिशा में चुनावी जंग सिर्फ दिल्ली के लिए नहीं भुवनेश्वर के लिए भी लड़ी जा रही है। खनिज संसाधनों से भरपूर इस अमीर राज्य में भाजपा, बीस सालों से सता पर काबिज बीजू जनता दल को कड़ी टक्कर दे रही है। ओडिशा के लोग सिर्फ नरेंद्र मोदी के भाग्य का फैसला नहीं कर रहे, बल्कि नवीन पटनायक के भाग्य का भी फैसला करने वाले हैं। वे मुख्यमंत्री और देश के प्रधानमंत्री दोनों के लिए वोट कर रहे हैं। 
विज्ञापन
कहां है मोदी लहर और भाजपा? 
ओडिशा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता का ग्राफ और भी बढ़ा है। ग्रामीण इलाकों में मोदी और शंख (बीजू जनता दल के चुनाव चिन्ह) की बात हो रही है। हालांकि प्रदेश के मुख्यमंत्री के पद के लिए अभी भी नवीन पटनायक ही जनता की पहली पसंद है। निश्चित तौर पर भाजपा मजबूती से विधानसभा औऱ लोकसभा लड़ रही है और पार्टी को कोई चमत्कार होने की उम्मीद है। हालांकि विधानसभा में पटनायक परंपरा को मात देना मुश्किल है। हालांकि कांग्रेस की अपनी चमक है लेकिन वैसी नहीं है जैसी हाल ही में गुजरात, मप्र और छत्तीसगढ़ या राजस्थान जैसे चुनावों में थी। 

ओडिशा में क्या है सीटों की स्थिति?  क्यों बढ़ा है बीजेपी का आत्मविश्वास? 
प्रदेश की जनता चार चऱणों में 147 विधानसभा और 21 लोकसभा क्षेत्रों में अपने प्रतिनिधियों को चुनने के लिए वोटिंग कर रही है। इस समय प्रदेश के 147 सदस्यों वाली विधानसभा में बीजू जनता दल के पास 117 सीटें है। प्रदेश में बहुमत के लिए 74 सीटों की जरूरत होती है। जबकि 2014 में हुए लोकसभा चुनवों में प्रदेश की कुल 21 सीटों में से 20 सीटें बीजू जनता दल ने जीतीं थीं। जबकि 1 सीट भाजपा ने जीती थी।

दरअसल, 2017 में हुए पंचायत चुनावों में भाजपा के 300 से ज्यादा सीटें जीतने के बाद भाजपा का मनोबल बढ़ा हुआ है। पार्टी को लगता है कि प्रदेश के ग्रामीण इलाको में भाजपा की पकड़ पहले से मजबूत हो गई है।

दो परिवारों का पिछले पचास सालों से वर्चस्व
ओडिशा की राजनीति काफी दिलचस्प है और यहां  बेशक बीजू जनता दल, भाजपा और कांग्रेस का नियंत्रण दिखाई देता है। राज्य की राजनीति पर लंबे समय से कुछ परिवारों का कब्जा है और उसमें बीजू पटनायक के परिवार का असर आज भी है। वहीं विपक्ष की राजनीति करने वाली कांग्रेस भी कुछ परिवारों के प्रभाव में रही है। कांग्रेस में लंबे समय तक प्रभावी रहे स्वर्गीय जानकी वल्लभ पटनायक के परिवार का दबदबा आज भी ओडिशा में है। उनके दामाद सौम्य रंजन पटनायक बीजू जनता दल के साथ हैं।

बता दें कि सौम्य रंजन पटनायक एक बड़ा अखबार निकालते हैं और उनके भाई निरंजन पटनायक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हैं। भाजपा फिलहाल परिवारों की राजनीति से मुक्त है, पर इसमें बीजू जनता दल के कुछ मजबूत अमीर राजनेता प्रवेश कर गए हैं। बीजद के मजबूत उद्योगपति नेता विजयंत पंडा भाजपा की टिकट पर केंद्रपाड़ा से चुनाव लड़ रहे हैं। जबकि भाजपा के ओडिशा से सबसे बड़े चेहरे धर्मेंद्र प्रधान की स्थिति प्रदेश में काफी कमजोर है। ओडिशा के लोग कुछ राजनीतिक परिवारों को अपना भगवान मानते रहे हैं। इन राजनीतिक परिवारों में कुछ लोग राजघरानों से भी संबंध रखते रहे हैं। 
विज्ञापन
आगे पढ़ें

विज्ञापन

Recommended

OPPO के Big Diwali Big Offers से होगी आपकी दिवाली खूबसूरत और रौशन
Oppo Reno2

OPPO के Big Diwali Big Offers से होगी आपकी दिवाली खूबसूरत और रौशन

कराएं दिवाली की रात लक्ष्मी कुबेर यज्ञ, होगी अपार धन, समृद्धि  व्  सर्वांगीण कल्याण  की प्राप्ति : 27-अक्टूबर-2019
Astrology Services

कराएं दिवाली की रात लक्ष्मी कुबेर यज्ञ, होगी अपार धन, समृद्धि व् सर्वांगीण कल्याण की प्राप्ति : 27-अक्टूबर-2019

विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला की खबरों को फेसबुक पर पाने के लिए लाइक करें

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Most Read

Blog

एड्स के खिलाफ जंग में बाजार कस रहा है कमर, ऐसे बन रही प्लानिंग

एड्स से लड़ने वालों का अब नया नारा है- 'एड्स अब डैथ सेंटस यानी मृत्यु दण्ड नहीं।' एड्स रोग को मैनज किया जा सकता है ठीक वैसे जैसे डॉक्टर उच्च रक्तचाप और डायबटीज का प्रबंधन करते हैं।

18 अक्टूबर 2019

विज्ञापन

जिया खान के जिक्र पर यूं भर आया सूरज पंचोली का गला

सूरज पंचोली की फिल्म सैटेलाइट शंकर का ट्रेलर लॉन्च हो गया है। इस दौरान मीडिया से बातचीत के दौरान जिया खान के जिक्र पर सूरज पंचोली का गला भर आया।

17 अक्टूबर 2019

आज का मुद्दा
View more polls

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree