Lok sabha election 2019 result: क्या देश की 542 सीटों पर केवल मोदी लड़ रहे थे चुनाव?
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भारतीय जनता पार्टी जीत की ओर अग्रसर है। संभावना यह व्यक्त की जा रही है कि पार्टी को अजेय बहुमत हासिल होगा। सच पूछिए तो ऐसा प्रतीत होता है जैसे इस बार देश की 542 सीटों पर नरेन्द्र मोदी खुद चुनाव लड़ रहे थे।
7 चरण के चुनाव संपन्न होने के बाद कर्नाटक के वरिष्ठ पत्रकार श्रीकांत कहते हैं- यहां के भाजपा उम्मीदवार न तो पार्टी की नीति और सिद्धांतों की बात कर रहे हैं और न ही सरकार की उपलब्धि गिना रहे हैं। यहां तो सारे उम्मीदवार केवल और केवल मोदी के नाम पर वोट मांग रहे हैं। यही हाल मध्य प्रदेश का भी दिखा।
दिग्विजय सिंह के पास थे कई मुद्दे
मध्य प्रदेश के बारे में समय जगत दैनिक अखबार के प्रधान संपादक अशोक त्रिपाठी कहते हैं- यहां सारे उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी के नाम पर वोट मांग रहे थे। यहां तक कि साध्वी प्रज्ञा ठाकुर भी नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए वोट मांग रही थी। उनके पास कोई अन्य मुद्दा था ही नहीं जबकि कांग्रेस के उम्मीदवार प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह कई मुद्दों को लेकर चुनाव लड़ रहे थे, लेकिन साध्वी के दो ही मुद्दे थे एक हिन्दुत्व और दूसरा नरेन्द्र मोदी का कुशल नेतृत्व।
छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार संजय द्वीवेदी कहते हैं- छत्तीसगढ़ में भाजपा के उम्मीदवार मुद्दों की बात नहीं कर रहे थे। यहां के सभी चुनावी रैलियों में केवल मोदी की चर्चा हो रही थी। एक सवाल के जवाब में संजय कहते हैं- यहां तो मोदी के काम की भी चर्चा नहीं हो रही थी। यहां केवल मोदी को प्रधानमंत्री बनाना है इसलिए भाजपा को वोट दें इस प्रकार का प्रचार चल रहा था। बिहार में भी लगभग वही माहौल था। बिहार में तो जनता दल यूनाइटेड और रामविलास पासवान के नेतृत्व वाली लोकशक्ति पार्टी के उम्मीदवार भी मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए वोट मांग रहे थे।
यह जीत नरेन्द्र मोदी के राष्ट्रवाद की जीत है
पंजाब में भाजपा का सरदार प्रकाश सिंह बादल के नेतृत्व वाली शिरोमणि अकाली दल के साथ चुनावी समझौता था। बठिंडा की अकाली उम्मीदवार बीवी हरसिंमरत कौर बादल अपने कई चुनावी संबोधन में नरेन्द्र मोदी की चर्चा की और साफ तौर पर कहा कि नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाना है इसलिए इस बार गठबंधन के उम्मीदवार को आप वोट दें। इस आधार पर निःसंदेह यह जीत नरेन्द्र मोदी के राष्ट्रवाद की जीत है।
नरेन्द्र मोदी के राष्ट्रवाद की जीत इसलिए इसे कहा जाना चाहिए कि इस राष्ट्रवाद के व्याख्याता और अधिष्ठाता दोनों नरेन्द्र मोदी हैं। मोदी के इस राष्ट्रवाद में केवल राष्ट्रीय सुरक्षा नहीं है, इसमें राष्ट्र के जन का अन्त्योदय भी है। भाजपा की इस जीत ने यह साबित कर दिया है कि नरेन्द्र मोदी की योजना साकार हुई है। मोदी ने अपने राष्ट्रवाद में केवल संस्कृति और धर्म का समावेश नहीं किया है। यहां जन कल्याणकारी योजनाओं का भी बोलबाला है। मसलन, आयुष्मान भारत, शौचालय, सफाई, उज्वला योजना, किसान सम्मान योजना आदि आदि। इन योजनाओं ने मोदी को अजेय बना दिया है।
आखिर किस वजह से विजय रहे मोदी?
मोदी की जीत के लिए दोनों ही प्रभावशाली तत्व जिम्मेवार हैं। एक ओर नरेन्द्र मोदी ने जहां देश की सुरक्षा के लिए अभेद्य सुरक्षा पंक्ति खड़ी की वहीं दूसरी ओर जनकल्याणकारी योजनाओं का निर्माण किया और पूरी तनमयता के साथ लक्ष्य तक पहुंचाने की कोशिश की। यह एक कुशल नेतृत्व का पहला गुण होता है जो उसे अजेय बनाता है। नरेन्द्र मोदी में यह गुण साफ झलकता है।
हालांकि विरोधी नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार पर पूरे पांच साल तक हमलावर रहे। यहां तक कि राफेल युद्धक विमान में मोदी को घेरने के लिए प्रतिपक्षी नेता राहुल गांधी ने ‘‘चौकीदार चोर’’ तक नारा लगाया लेकिन वे असफल रहे। वे यह साबित नहीं कर पाए कि सचमुच देश का प्रधानमंत्री चोर है। आखिरकार देश की सर्वोच्च पंचायत ने भी यह साबित कर दिया कि राॅफेल में किसी प्रकार की कोई गड़बड़ी नहीं हुई है।
कुल मिलाकर देखें तो प्रतिपक्षी नेता केवल हल्ला करते रहे कि प्रधानमंत्री और उसके नेतृत्व वाली सरकार भ्रष्टाचारी है लेकिन वे यह साबित करने में नाकाम रहे। यह जनादेश इसका भी संकेत है कि जो लोग केवल आरोप लगाते हैं उसके साथ जनता कभी नहीं नहीं जाती। जनता सदा सही व्यक्ति के साथ खड़ी रहती है।
यह जनादेश इस बात की भी संकेत है कि आने वाले समय में भी सही नेतृत्व के साथ ही जनता रहेगी।इस जीत के लिए मोदी के टीम की भी सराहना होनी चाहिए। चुनाव प्रचार और प्रबंधन के लिए नरेन्द्र मोदी ने कुशल व्यक्ति की टीम बनाई और सही व्यक्ति का चयन कर उसे काम सौंपा। युद्ध चाहे किसी स्तर पर लड़े जाएं, युद्ध युद्ध की तरह ही लड़ा जाता है।
नरेन्द्र मोदी के सिपहसालार भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने अपने कार्यकर्ताओं के एक खास टीम को संबोधित करते हुए कहा था कि यह चुनाव हमारे लिए युद्ध है और हम इसे युद्ध की तरह लड़ेंगे। सचमुच अमित शाह ने इस चुनाव को युद्ध की तरह लिया और उसी प्रकार के आक्रामक प्रबंधन के आधार पर लड़ाई लड़ी।
राष्ट्रवाद के नाम पर नरेन्द्र मोदी ने जनता से अपील की
यह भारत के इतिहास का पहला चुनाव है जहां बड़े पैमाने पर आधुनिक प्रचार तकनीक और प्रबंधन का उपयोग किया गया है। भारत नहीं दुनिया के किसी भी देश के इतिहास या युद्ध को उठाकर देख लें नेतृत्व की कुशलता तो होती ही है जबतक उसके साथ आधुनिक तकनीक का उपयोग नहीं किया जाता है तबतक जीत में संदेह रहता है।
जहां एक ओर नरेन्द मोदी की फौज ने अमित शाह के नेतृत्व में कुशल प्रबंधन और आधुनिक प्रचार तकनीक से लैस थी वहीं विपक्ष खासकर कांग्रेस पारंपरिक तकनीक का उपयोग कर रही थी। इसलिए यह तो पहले ही साबित हो गया था कि प्रतिपक्ष इस बार भी कमजोर रहेगा और नरेन्द्र मोदी एक बार फिर बाजी मार ले जाएंगे।
राष्ट्रवाद के आगे फीके रहे सारे मुद्दे
आधुनिक भारत अपने उत्पत्ति काल से लगातार जतिवाद और संप्रदायवाद का दंश झेलता रहा है। यह पहली बार ऐसा हुआ है कि राष्ट्रवाद के नाम पर नरेन्द्र मोदी ने जनता से अपील की और उसका जवाब भी जनता ने सकारात्मक दिया। इस चुनाव के बाद नरेन्द्र मोदी एक चमत्कारी नेतृत्व के प्रणेता के रूप में उभरकर सामने आए हैं। आने वाले समय में देश की दिशा क्या होगी वह अब केवल मोदी तय करेंगे क्योंकि यह चुनाव दो मुद्दों पर लड़ा गया है एक तो राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा और दूसरा मोदी का व्यक्तित्व।
यही नहीं आने वाले समय में देश की नीतियां भी लगभग इन्हीं दो बातों पर आधारित रहेगी। समूल रूप से देखें तो देश एक नये रूप-रंग में एन दौर में और नए युग में प्रवेश कर रहा है, जो केवल मोदी का होगा उसके प्रणेता, अधिष्ठाता और व्याख्याता तीनों मोदी हैं। इसीलिए तो कहता हूं कि यह मोदी के राष्ट्रवाद की जीत है।
कुल मिलाकर देखें तो देश के 542 सीटों पर नरेन्द्र मोदी खड़े दिख रहे थे और उन्हीं के व्यक्तित्व के आधार पर उम्मीदवार वोट मांग रहे थे। इसीलिए इस जीत को खालिस नरेन्द्र मोदी की जीत ही कही जानी चाहिए।
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