कानो-देखी : राहुल गांधी राजनीति के चमकते सितारे
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कांग्रेस पार्टी के कलेजे को काफी ठंडक पहुंची है। सोनिया गांधी भी खुश बताई जा रही हैं, इसकी तीन बड़ी वजह हैं। पहली तो यह राहुल गांधी ने राफेल लड़ाकू विमान के सौदे पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, मोदी के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार, भाजपा और यहां तक कि आरएसएस को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है। राफेल लड़ाकू विमान सौदे की चर्चा भारत के साथ-साथ देश के बाहर के देशों में भी होने लगी है।
दूसरी वजह राजस्थान और मध्यप्रदेश में उमड़ रही भीड़। राहुल मध्यप्रदेश के दौरे से लौटे हैं। वह रात 11 बजे तक रोड शो में थे और भारी जनसमूह उमड़ रहा था। जबकि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के कार्यक्रम में कम उत्साह देखने को मिल रहा है। तीसरी और आखिरी वजह सबसे कीमती है। वह है शरद पवार का बयान।
शरद पवार ने मराठी में दिए इंटरव्यू में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सॉफ्ट कार्नर रखा और उनकी ही पार्टी में बगावत हो गई। तारिक अनवर और मुनफ हकीम ने इस्तीफा दे दिया। बताते हैं पहली बार पवार के दो लाइन के बयान ने उनकी विश्वसनीयता पर ही सवाल खड़ा कर दिया। इस पर कांग्रेस के एक महासचिव का कहना है कि राजनीति के बदलते वक्त को कोई न पहचान पाए तो इसमें राहुल गांधी की क्या गलती?
गोल टोपी क्यों पहनना चाहते हैं मोहन भागवत
भाजपा के मार्गदर्शक मंडल से लेकर निचले दर्जे के नेता भी हैरान हैं। सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने वाले कई लोगों के गले यह सवाल नहीं उतर रहा है। संघ के लिए पूरा जीवन खपा आए और 1990 से डॉ. मुरली मनोहर जोशी के साथ उनके प्रचार-प्रसार में खुद को झोक देने वाले सूत्र की भी यही परेशानी है।
सरसंघचालक पद के औरा के कारण कोई खुलकर नहीं बोल रहा है, लेकिन किसी को भी समझ में नहीं आ रहा है कि मोहनराव मधुकारराव भागवत गोल टोपी क्यों पहनना चाह रहे हैं। संघ के ही एक विचारक का कहना है कि संघ जीवन भर कांग्रेस पर मुस्लिमतुष्टीकरण की नीति का आरोप लगाता रहा है।
भाजपा और संघ कांग्रेस की धर्मनिरपेक्षता को छद्म धर्म निरपेक्षता से जोड़ता रहा है। ऐसे में सरसंघचालक भागवत के व्याख्यान देने के बाद लोगों को उत्तर देना भारी पड़ रहा है। वहीं भाजपा के नेताओं का कहना है कि यही हाल रहा तोमुसलमान भले हमारे साथ न आएं, लेकिन हिन्दू मतदाता जरूर साथ साथ छोडक़र चले जाएंगे।
राष्ट्रीय स्तर पर महागठबंधन होगा
बसपा प्रमुख मायावती ने हरियाणा इंडियन नेशनल लोकदल, कर्नाटक में जद(एस), तेलंगाना में टीआरएस, छत्तीसगढ़ में अजीत जोगी की पार्टी से तालमेल कर लिया है। लेकिन इसके बावजूद राष्ट्रीय स्तर पर महागठबंधन अस्तित्व में आएगा।
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि गुलाम नबी आजाद, कमलनाथ समेत कुछ कांग्रेस के नेता मायावती के लगातार संपर्क में हैं। इन सभी को उम्मीद है कि संसद का शीतकालीन सत्र समाप्त होने के बाद महागठबंधन की संभावना जोर पकड़ने लगेगी। तृणमूल कांग्रेस के भी एक बड़े नेता का कहना है कि विपक्ष एक साथ मिलकर लड़ेगा।सूत्र का कहना है कि विपक्ष की एकता मजबूरी है।
यदि विपक्ष एक जुट न हुआ तो सबसे बड़ा खतरा क्षेत्रिय दलों के लिए है। इनका अस्तित्व कहानियों का हिस्सा बन सकता है। एनसीपी के डीपी त्रिपाठी को भी विपक्षी दलों के बीच में एक राय पर आने की पूरी संभावना नजर आ रही है। मायावती की पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का भी कहना है कि बहन जी आराम से निर्णय लेती है। अभी विधानसभा चुनावों का दौर है, इसे बीत जाने दीजिए।
रक्षा मंत्री निर्मला की 'रामलीला'
रक्षामंत्री ने एक दिन अचानक निर्णय लिया कि वह भाजपा कवर करने वाले पत्रकारों को राफेल का सच बताएंगी। सच ऑफ दि रिकार्ड अनौपचारिक बातचीत के जरिए बताएंगी। पार्टी कार्यालय ने लोगों को जानकारी दी और मीडिया के लोग पहुंच गए। थोड़ी देर बाद रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण आईं, सीतारमण ने लटके-झटके और स्टाइल से भरी बॉडी लैंग्वेज के साथ पक्ष रखना शुरू किया।
अचानक उनकी नजर एक विदेशी दिखने वाले ब्लूमबर्ग के पत्रकार पर पड़ी। बस फिर क्या था, निर्मला मीडिया प्रभारी के कान में बुदबुदाई और अमुक पत्रकार को बाहर कर दिया गया। यह एक अनोखी घटना थी। इसलिए पत्रकारों के चेहरे पर विस्मय के भाव बने रहे। ब्रीफिंग समाप्त होने के बाद बताया गया कि एक नहीं कोई तीन पत्रकार निकाले गए।
खास बात यह भी रही इस अनौपचारिक ब्रीफिंग का किसी पत्रकार को कोई मतलब समझ में नहीं आया, क्योंकि निर्मला जी ने ऐसी कोई बात ही नहीं की। इससे भी दिलचस्प यह रहा कि निर्मला जी की ब्रीफिंग के बाद केन्द्र सरकार में राज्य मंत्री गजेन्द्र शेखावत की प्रेसवार्ता थी और इसमें शेखावत निर्मला जी का उल्टा बोल रहे थे।
हरियाणा में घमासान
हरियाणा में कांग्रेस के भीतर घमासान का फाइनल राउंड चल रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र हुड्डा और रणदीप सुरजेवाला आखिरी दांव खेल रहे हैं। हरियाणा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष तंवर के बारे में कहा जा रहा है कि वह पश्त हो चुके हैं। उन्हें अब केवल राहुल गांधी का सहारा है। तंवर को हरियाणा में अपने लिए विधानसभा सीट की पहचान करना भी चुनौती है।
वहीं शैलजा अपने चिरपरिचित अंदाज में राजनीति कर रही है। सुरजेवाला को राहुल गांधी का स्नेह प्राप्त है। वह कांग्रेस मीडिया विभाग के प्रमुख के साथ चैंपियन प्रवक्ता हैं। कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य हैं, लगातार प्रोफाइल बढ़ रहा है। विरोधी सुरजेवाला का ग्राफ देखकर हुड्डा ने भी दांव चल दिया है।
बताते हैं कि जल्द ही एआईसीसी में महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चौह्वाण की इंट्री होने वाली है। चौह्वाण को महासचिव के साथ-साथ हरियाणा का प्रभार दिया जा सकता है। ऐसा हुआ तो हुड्डा के हाथ में भी बाजी लगना तय माना जा रहा है। कांग्रेस मानकर चल रही है कि सब ठीक रहा तो खट्टर जी जाएंगे, हुड्डा जी ही आएंगे।
यूपी में कुंभ का सहारा
भाजपा को उत्तर प्रदेश में कुंभ का सहारा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी कुंभ की तैयारियों की रुपरेखा से प्रसन्न हैं। योगी आदित्यनाथ भी कुंभ की तैयारियों के बहाने साधु संतों में पूरी साख बनाने की तत्परता दिखा रहे हैं। कुंभ का बजट भी कोई छोटा-मोटा नहीं है। छह हजार करोड़ रुपये तक जा सकता है। स्विस काटेज आदि की व्यवस्था हो रही है। शानदार टॉयलेट की सुविधा के साथ मेला परिसर को एलईडी लाइट से जगमंगाने का इंतजाम है। सीएम बनने के बाद से योगी 11 से अधिक बार इलाहाबाद जा चुके हैं।
इलाहाबाद में योगी कहीं जाएं या न जाएं लेकिन नरेन्द्र गिरी के पास जाना नहीं भूलते। भाजपा के रणनीतिकारों को लग रहा है कि जनवरी के तीसरे सप्ताह में बनारस में प्रवासी भारतीय दिवस का आयोजन हो रहा है, इससे पहले देव दीपावली है। कुल मिलाकर यदि बनारस, इलाहाबाद सध गया तो 2019 के लोकसभा चुनाव में बंपर हवा बन जाएगी।
वहीं दूसरी तरफ प्रचार में लगे नेताओं के जमीनी स्तर पर बढ़ रही नाराजगी से हाथ-पांव फूल रहे हैं। भाजपा का कार्यकर्ता जहां मुंह फुलाए है, वहीं एससी-एसटी एक्ट और अगड़ी जातियों की नाराजगी, पेट्रोल-डीजल के दाम उसके हाथ-पांव फुला रहे हैं। हालत यह है कि जौनपुर, इलाहाबाद, भदोही, आजमगढ़, गाजीपुर, चंदौली, मिर्जापुर समेत तमाम जिलों में बूथ स्तर की भाजपा की तैयारी का भी काम ठप सा पड़ा है।