टी-20 वर्ल्ड कप: धैर्य और आत्मविश्वास ने अनिश्चितता को निश्चितता में बदला
इस पूरे टी-20 वर्ल्ड कप में खास बात यही रही कि हमारे गेंदबाजों ने पूरे आत्मविश्वास के साथ विरोधी टीमों को धवस्त किया। अपने धैर्य और आत्मविश्वास की बदौलत भारतीय खिलाड़ियों ने दक्षिण अफ्रीका के जबड़ों से जीत को खींच लिया
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क्रिकेट को अनिश्चितता का खेल कहते हैं, लेकिन यदि धैर्य और आत्मविश्वास आपके भीतर हो तो अनिश्चितता को निश्चितता में बदला जा सकता है। टी-20 क्रिकेट वर्ल्ड कप जीतकर भारतीय खिलाड़ियों ने यही साबित किया है। जिस धौर्य और आत्मविश्वास के साथ पूरे वर्ल्ड कप में रोहित शर्मा व टीम के खिलाड़ी खेले हैं और अजेय रहे हैं, ये किसी चमत्कार की बदौलत नहीं, बल्कि धैर्य और आत्मविश्वास के कारण सफलता मिली है।
दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ फाइनल मुकाबला आसान नहीं था। वेस्टइंडीज के बारबडोस में तेज हवाओं के बीच बिल्कुल सपॉट पिच पर 176 रन कोई बड़ा स्कोर नहीं था। फिर टीम इंडिया ने 34 रन पर कप्तान रोहित शर्मा, ऋषभ पंत और सूर्य कुमार यादव जैसे स्थापित बल्लेबाजों के विकेट गंवा दिए।
ऐसे समय में यदि एक-दो विकेट और गिर जाते तो टीम इंडिया को 100 रन पकड़ना मुश्किल होता, लेकिन जिस धैर्य का परिचय विराट कोहली ने दिया और दूसरे छोर से जिस आत्मविश्वास के साथ अक्षर पटेल ने चार छक्के लगाए, उसने एक बड़े स्कोर की नींव रख दी।
जब विराट कोहली धीमा खेल रहे थे तो सोशल मीडिया पर कुछ लोग उनको यह कहकर ट्रोल कर रहे थे कि जब टीम को तेजी से रन बनाने की जरूरत है तो विराट कोहली टीम के लिए संकट पैदा कर रहे हैं। विराट कोहली को फाइनल के प्रेशर का अनुभव था और उन्होंने धैर्यवान बने रहना उचित समझा।
एक छोर से वो विकेट को पकड़कर खड़े रहे और दूसरे छोर से पहले युवा अक्षर पटेल और उसके बाद शिवम दुबे को शॉट्स खेलने का पूरा मौका दिया। जैसे ही मैच ने 17वें ओवर में प्रवेश किया, विराट कोहली ने अपना विराट रूप दिखाया। तेजी से दो छक्के और एक चौका लगाकर टीम का स्कोर 160 रन के ऊपर ले गए। सपाट पिच पर दक्षिण अफ्रीका की बैटिंग के आगे 177 रन का टारगेट बहुत बड़ा नहीं था।
आत्मविश्वास से भरपूर दिखी टीम इंडिया
इस पूरे टी-20 वर्ल्ड कप में खास बात यही रही कि हमारे गेंदबाजों ने पूरे आत्मविश्वास के साथ विरोधी टीमों को धवस्त किया। फाइनल में दक्षिण अफ्रीका के दो विकेट गिरने के बाद जिस तरह से पहले स्टब्स, उसके बाद क्लासेन और डिकॉक मैच को आगे ले जा रहे थे तो लग रहा था कि टीम इंडिया के खिलाड़ियों का आत्मविश्वास हिल गया है, लेकिन यहां कप्तान रोहित शर्मा के धैर्य की तारीफ करनी होगी। वो दबाव में नहीं आए।
15 ओवर तक यह साफ लग रहा था कि अब मैच बचेगा नहीं। संभवत: 90 प्रतिशत भारतीय प्रशंसक यह मन भी चुके थे, लेकिन जिस आत्मविश्वास का परिचय हार्दिक पांड्या, जसप्रीत बुमराह और अर्शदीप सिंह ने दिया, उसकी जितनी तारीफ की जाए, कम है।
सूर्य कुमार यादव बल्लेबाजी में कुछ खास कमाल नहीं दिखा सकते थे, लेकिन 20वें ओवर की पहली गेंद पर खतरनाक डेविड मिलर का जो अविश्वसनीय कैच बॉउंड्री पर उन्होंने पकड़ा, उसमें उनका आत्मविश्वास साफ झलका। थर्ड अंपायर ने तो कुछ देर बाद कैच की पुष्टि की, लेकिन जिस जोश और चमक के साथ सूर्य कुमार यादव ने विजय मुद्रा दिखाइए तो साफ हो गया था कि मिलर की वापसी और भारत की जीत लॉक हो चुकी है।
हार के जबड़े से खींचा मैच
अपने धैर्य और आत्मविश्वास की बदौलत भारतीय खिलाड़ियों ने दक्षिण अफ्रीका के जबड़ों से जीत को खींच लिया। 7 रनों से दक्षिण अफ्रीका को मात दी। कुछ-कुछ ऐसा ही टीम इंडिया ने पाकिस्तान के साथ वाले मुकाबले में किया था। जब मात्र 120 रन के टारगेट के बावजूद भारतीय गेंदबाजों ने पाकिस्तान को 6 रनों से शिकस्त दी थी।
यह नई यंग टीम इंडिया है, जो न तो किसी से डरती है, न पीछे हटती है। अब यंग टीम इंडिया के पास रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे महान खिलाड़ियों की विरासत को आगे बढ़ने का मौका है। निश्चित ही हमारे यंग खिलाड़ी इसी धैर्य और आत्मविश्वास का परिचय देते रहेंगे, जैसा ये महान क्रिकेट विरासत में छोड़कर जा रहे हैं।
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