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आखिर चाबी ताले को कैसे खोलती है: इसमें छिपा सुरक्षा का बड़ा राज
Thu, 16 Apr 2026 07:40 AM IST
Nitin Gautam
स्कॉट क्रेवर, अमर उजाला
स्कॉट क्रेवर, अमर उजाला
Published by: Nitin Gautam
Updated Thu, 16 Apr 2026 07:40 AM IST
सार
ताले के अंदर मौजूद सिलिंडर तभी घूमता है, जब चाबी के सभी खांचे उसी गहराई के हों, जो उस खास ताले के लिए सही है।
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
क्या आपने कभी सोचा है कि एक छोटी-सी चाबी भारी-भरकम ताले को कैसे खोल देती है? कंप्यूटर सुरक्षा के पाठ्यक्रमों में अक्सर तालों की कार्यप्रणाली और उन्हें भेदने के तरीकों को पढ़ाया जाता है, क्योंकि एक ताला हमें सुरक्षा के बुनियादी सिद्धांतों की गहरी समझ देता है।
यदि आप चाबी को गौर से देखें, तो इसके ऊपरी किनारे पर आपको अंग्रेजी के ‘वी’ आकार के कई खांचे (कट) नजर आएंगे। एक पैमाने से मापने पर आप पाएंगे कि इन खांचों के बीच की दूरी एक समान होती है। दरअसल, इन खांचों की गहराई ही वह ‘गुप्त कोड’ है, जिसे ताला स्वीकार करता है। ताले के अंदर एक सिलिंडर होता है। यह वही हिस्सा होता है, जो चाबी डालने पर घूमता है। यह तभी घूमता है, जब चाबी के सभी खांचे उसी गहराई के हों, जो उस खास ताले के लिए सही हैं। अब सवाल यह है कि ताला कैसे पहचानता है कि चाबी सही है या नहीं? वास्तव में, ताले के अंदर हर खांचे के ऊपर एक-एक खड़ी नली (शाफ्ट) होती है। इन नलियों के अंदर दो-दो धातु की पिन लगी होती है, जो ऊपर-नीचे आसानी से खिसक सकती है। अगर ये पिन सही जगह पर न हों, तो वे सिलिंडर को घूमने से रोक देती हैं और ताला नहीं खुलता। ऐसा तब होता है, जब कोई पिन सिलिंडर के बीच में ही अटक जाती है।
जब आप चाबी ताले में डालते हैं, तो पिन उन खांचों में बैठ जाती है। अगर खांचा ज्यादा ऊंचा है, तो पिन बाहर की ओर निकलकर सिलिंडर को जाम कर देती है। अगर खांचा ज्यादा गहरा है, तो पिन नीचे धंस जाती है और ऊपर वाली पिन सिलिंडर में आकर उसे जाम कर देती है। पर अगर चाबी बिल्कुल सही, यानी हर खांचे की गहराई सही हो, तो सभी पिन एक सीध में आ जाती हैं और सिलिंडर आसानी से घूम जाता है। नतीजतन, ताला खुल जाता है। एक ताला बनाने वाला (लॉकस्मिथ) पिन बदलकर उसे नई चाबी के हिसाब से भी सेट कर सकता है। चाबी भी एक तरह का पासवर्ड ही है, बस यह धातु पर कटे हुए पैटर्न के रूप में होती है। बिना चाबी के भी ताला खोला जा सकता है, जिसे ‘लॉक पिकिंग’ कहते हैं। इसमें एक पतली धातु की चीज डालकर पिन को एक-एक करके सही ऊंचाई पर सेट किया जाता है। हालांकि, यह काम बेहद कठिन है और इसके लिए बहुत अभ्यास व कौशल की जरूरत होती है।
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यह हमें सुरक्षा के दो बड़े सबक सिखाता है। पहला, सुरक्षा को इतना जटिल बनाया जाए कि उसका अनुमान लगाना या उसकी नकल करना असंभव हो। दूसरा, सिस्टम को इस तरह डिजाइन किया जाए कि वह पूरी चाबी या पासवर्ड के हर एक हिस्से के सटीक होने पर ही काम करे। - द कन्वर्सेशन
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यदि आप चाबी को गौर से देखें, तो इसके ऊपरी किनारे पर आपको अंग्रेजी के ‘वी’ आकार के कई खांचे (कट) नजर आएंगे। एक पैमाने से मापने पर आप पाएंगे कि इन खांचों के बीच की दूरी एक समान होती है। दरअसल, इन खांचों की गहराई ही वह ‘गुप्त कोड’ है, जिसे ताला स्वीकार करता है। ताले के अंदर एक सिलिंडर होता है। यह वही हिस्सा होता है, जो चाबी डालने पर घूमता है। यह तभी घूमता है, जब चाबी के सभी खांचे उसी गहराई के हों, जो उस खास ताले के लिए सही हैं। अब सवाल यह है कि ताला कैसे पहचानता है कि चाबी सही है या नहीं? वास्तव में, ताले के अंदर हर खांचे के ऊपर एक-एक खड़ी नली (शाफ्ट) होती है। इन नलियों के अंदर दो-दो धातु की पिन लगी होती है, जो ऊपर-नीचे आसानी से खिसक सकती है। अगर ये पिन सही जगह पर न हों, तो वे सिलिंडर को घूमने से रोक देती हैं और ताला नहीं खुलता। ऐसा तब होता है, जब कोई पिन सिलिंडर के बीच में ही अटक जाती है।
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जब आप चाबी ताले में डालते हैं, तो पिन उन खांचों में बैठ जाती है। अगर खांचा ज्यादा ऊंचा है, तो पिन बाहर की ओर निकलकर सिलिंडर को जाम कर देती है। अगर खांचा ज्यादा गहरा है, तो पिन नीचे धंस जाती है और ऊपर वाली पिन सिलिंडर में आकर उसे जाम कर देती है। पर अगर चाबी बिल्कुल सही, यानी हर खांचे की गहराई सही हो, तो सभी पिन एक सीध में आ जाती हैं और सिलिंडर आसानी से घूम जाता है। नतीजतन, ताला खुल जाता है। एक ताला बनाने वाला (लॉकस्मिथ) पिन बदलकर उसे नई चाबी के हिसाब से भी सेट कर सकता है। चाबी भी एक तरह का पासवर्ड ही है, बस यह धातु पर कटे हुए पैटर्न के रूप में होती है। बिना चाबी के भी ताला खोला जा सकता है, जिसे ‘लॉक पिकिंग’ कहते हैं। इसमें एक पतली धातु की चीज डालकर पिन को एक-एक करके सही ऊंचाई पर सेट किया जाता है। हालांकि, यह काम बेहद कठिन है और इसके लिए बहुत अभ्यास व कौशल की जरूरत होती है।
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यह हमें सुरक्षा के दो बड़े सबक सिखाता है। पहला, सुरक्षा को इतना जटिल बनाया जाए कि उसका अनुमान लगाना या उसकी नकल करना असंभव हो। दूसरा, सिस्टम को इस तरह डिजाइन किया जाए कि वह पूरी चाबी या पासवर्ड के हर एक हिस्से के सटीक होने पर ही काम करे। - द कन्वर्सेशन