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दूसरा पहलू: वह रहस्य जिसने विज्ञान को उलझा रखा है

Thu, 18 Dec 2025 06:52 AM IST
लव गौर दीपांकर दत्ता
दीपांकर दत्ता Published by: लव गौर Updated Thu, 18 Dec 2025 06:52 AM IST
सार

डार्क मैटर और एंटीमैटर पूरी तरह से अलग चीजें हैं। एंटीमैटर बेहद दुर्लभ है, जबकि डार्क मैटर हर जगह मौजूद हैं, लेकिन दिखाई नहीं देते।

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Dark matter and antimatter mysteries that have baffled science
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

विस्तार

कल्पना कीजिए एक ऐसे वीडियो गेम की, जिसमें आपका पसंदीदा हीरो मुख्य किरदार है। कभी-कभी उसका एक जुड़वां सामने आता है, जो जिस भी चीज को छूता है, तो उसे विस्फोट से नष्ट कर देता है। खेल को और कठिन बनाने के लिए छोटे-छोटे दुश्मनों का एक रहस्यमय अदृश्य झुंड भी है, जो हर जगह मौजूद है, खेल के नियम बदलता रहता है, लेकिन कभी दिखाई नहीं देता।
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अगर इन किरदारों को पदार्थ के प्रकार मान लिए जाएं, तो यह खेल हमारे ब्रह्मांड जैसा ही है, जिसमें हीरो है सामान्य पदार्थ, यानी वह सब कुछ जिसे हम देख सकते हैं। एंटीमैटर वह विस्फोटक जुड़वां है, जिसे वैज्ञानिक अच्छी तरह समझते हैं, लेकिन यह बेहद दुर्लभ है। डार्क मैटर वे अदृश्य जीव हैं, जो हर जगह मौजूद हैं, लेकिन दिखाई नहीं देते और जिनके बारे में वैज्ञानिकों को नहीं पता कि वे वास्तव में हैं क्या। डार्क मैटर और एंटीमैटर पूरी तरह से अलग चीजें हैं। सामान्य पदार्थ परमाणुओं से बना होता है। हर परमाणु में धनात्मक आवेश वाले प्रोटॉन व उनके चारों ओर घूमने वाले ऋणात्मक आवेश वाले इलेक्ट्रॉन होते हैं। एंटीमैटर को सामान्य पदार्थ का उल्टे आवेश वाला जुड़वां समझा जा सकता है। हर कण का एक एंटी-कण होता है-जैसे इलेक्ट्रॉन का पॉजिट्रॉन और प्रोटॉन का एंटीप्रोटॉन। ये मिलकर एंटी-एटम बनाते हैं। जब पदार्थ व एंटीमैटर मिलते हैं, तो वे तेज चमक और ऊर्जा के साथ एक-दूसरे को नष्ट कर देते हैं।
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एंटीमैटर हमारे ब्रह्मांड में बहुत दुर्लभ है, लेकिन कुछ तत्व, जैसे पोटैशियम, टूटकर थोड़ी मात्रा में एंटीमैटर पैदा कर सकते हैं। जब आप केला या पोटैशियम-युक्त भोजन खाते हैं, तो आप सूक्ष्म मात्रा में ऐसे परमाणु भी लेते हैं, जो एंटीमैटर उत्पन्न करते हैं। यह मात्रा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नहीं है। एंटीमैटर की खोज लगभग 100 साल पहले हुई थी और आज वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं में इसे बनाकर अध्ययन कर सकते हैं। डार्क मैटर कहीं ज्यादा रहस्यमय है। इसे समझने के लिए एक तेज घूमते झूले की कल्पना करें।
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अगर उस पर अदृश्य जीव मौजूद हों, जो आपको पकड़े रखें, तो आप उड़ेंगे नहीं। करीब 50 साल पहले खगोलशास्त्री वेरा रुबिन ने पाया कि आकाशगंगाओं के बाहरी तारे उम्मीद से कहीं तेज घूमते हैं, फिर भी बाहर नहीं उड़ते। इसका एकमात्र कारण किसी अदृश्य पदार्थ का होना है, जो अतिरिक्त गुरुत्वाकर्षण प्रदान करता है। इसे ही वैज्ञानिकों ने डार्क मैटर कहा। तब से पता चला कि यह हर जगह मौजूद है। पिछले 50 वर्षों से वैज्ञानिक डार्क मैटर की खोज कर रहे हैं, पर अब तक असफल ही रहे हैं। इतना तय है कि यह हर जगह मौजूद है और पूरे ब्रह्मांड में सामान्य पदार्थ से लगभग पांच गुना अधिक है। - द कन्वर्सेशन से
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