कोरोना काल और संकट: आखिर जनता के मानसिक स्वास्थ्य की चिंता कौन करेगा?

Dr.Naaz Parveenडॉ. नाज परवीन Updated Tue, 28 Jul 2020 11:35 AM IST
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विशेषज्ञों की माने तो 93 प्रतिशत तक आत्महत्याएं मानसिक कारणों से ही होती हैं- सांकेतिक तस्वीर
विशेषज्ञों की माने तो 93 प्रतिशत तक आत्महत्याएं मानसिक कारणों से ही होती हैं- सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Pixabay

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सार

  • महामारी से जुडे मुद्दों पर लोगों की निरंतर काउंसलिंग, सलाह आदि के माध्यम से समझ मजबूत करनी चाहिए।
  • भारत में मानसिक रोगों के प्रति जागरूकता का आभाव है। ज्यादातर मामलों में मानसिक रोगी को पागल ही समझा जाता है।
  • खौफ के इस वातावरण में अवसाद, चिंता, पैनिक अटैक, तनाव, एंग्जाइटी इत्यादि की समस्या काफी बढ़ गई है।

विस्तार

दिन-प्रतिदिन कोरोना वायरस के बढ़ते ग्राफ ने निःसंदेह लोगों के माथे पर चिंता की लकीरें बढ़ा दी हैं। महामारी की चिंता ने लोगों का जीवन बदल कर रख दिया है। सामान्य व्यक्ति को डर और खौफ ने अपने घेरे में ले रखा है। ऐसे में जो पहले से किसी बीमारी में ग्रसित था, उसके हालात बद से बदतर हो गई है। 
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दुनिया पिछले कुछ हफ्तों से अपने घरों में बंद हैं। लोगों की आवाजाही थमीं हुई है। लोग इस महामारी के समय अकेले हैं। आम-तौर पर बीमार व्यक्ति का इलाज अस्पतालों में ही होता है, लेकिन कोरोना महामारी ने सारा सिस्टम बदल कर रख दिया है।
अब तो अपना डाॅक्टर स्वयं बनों जैसी कहावतें समाज में जोर पकड़े हुए हैं। ऐसे में तनाव, डर और जीवन बचाने की जददो-जहद ने लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाला है। डब्ल्यू.एच.ओ. ने बहुत पहले ही कोरोना वायरस को पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित करते हुए लोगों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के प्रति आगाह किया था।
 
डब्ल्यू.एच.ओ. ने कहा था कि कोरोना संकट में उपजे लाॅकडाउन, आइसोलेशन, सोशल डिस्टेसिंग जैसे शब्द कई तरह की दूसरी समस्याएं जैसे चिंता, डिप्रेशन और भय बढा सकते हैं। जिससे लोगों में कई तरह की मानसिक स्वास्थ्य संबधी समस्याएं पैदा हो सकती है।

निश्चित तौर पर आम जनजीवन में इस तरह की समस्याओं का विस्तार हुआ है। जिसका गंभीर परिणाम आत्महत्या के ग्राफ में दर्ज होती बढ़त के तौर पर देखा जा सकता है। विशेषज्ञों की माने तो 93 प्रतिशत तक आत्महत्याएं मानसिक कारणों से ही होती हैं। भले ही हम सामाजिक दायरे में इसे कोई और नाम क्यों न दें?

इंडियन साइकेट्रिक सोसाइटी के अध्ययन के मुताबिक कोरोना महामारी के कारण देश में मानसिक रोगों के मरीजों की संख्या में 15 से 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिली है। कोरोना से जुड़ी मुख्य तीन वजहें हैं, जो लोगों को बेहद परेशान कर रहीं है-
  • कोरोना वायरस से संक्रमित होने का डर।
  • लाॅकडाउन से जन्मा अकेलापन और सोशल रिसेशन।
  • नौकरी और बिजनेस को लेकर अनिश्चितता।
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समाज का गलत बर्ताव कई बार मानसिक विकार को छुपाने के अहम कारण बनते हैं...

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