कोरोना से जंग: कहीं सोशल मीडिया बर्न आउट का शिकार तो नहीं हो रहे आप, इन लक्षणों पर तुरंत हो जाएं अलर्ट
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करोना वायरस ने एक साल में दुनिया बदल दी है। लोग हफ्तों से घरों में बंद रहने को मजबूर हुए हैं। भारत में भी लंबा लॉकडाउन चला लेकिन खतरा अब भी टला नहीं है। घरों में बंद लोगों के पास कोरोना से जुड़ी सूचनाओं का सबसे तेज सोर्स सोशल मीडिया है, यही नहीं लोगों की हर सोशल मीडिया पोस्ट या एक्टिविटी कोरोना से या लॉकडाउन एक्टिविटी से जुड़ी हुई है। इसके कारण लोग सोशल मीडिया बर्न आउट के शिकार भी हो रहे रहे हैं।
दरअसल, सोशल मीडिया बर्न आउट सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग से उपजी स्थिति होती है। जब हर कुछ मिनटों में आप अपना अकाउंट और नोटिफिकेशन चेक करते हैं और अपेक्षाकृत नई सूचना या अपडेट न मिलने पर झुंझलाहट, निराशा और कई बार अवसाद का शिकार भी हो सकते हैं।
सोशल मीडिया बर्न आउट की एक और गंभीर स्थिति होती है, जब आप सही और गलत खबर के मध्य अंतर नहीं कर पाते हैं। कोविड 19 में भी यही हो रहा है। लोग संक्रमण के आकंड़ों, उपचार, व उससेे जुड़ी खबरों को फेसबुक, ट्विटर और व्हाट्सप्प पर सर्च कर रहे हैं तथा शेयर कर रहे हैं और इससे इतना अधिक डाटा उत्पन्न हो रहा है कि यूजर के समक्ष सही-गलत, रियल- फेक के अंतर को समझने की चुनौती उत्पन्न हो रही है।
जहां एक तरफ समाज, करोना वायरस के कारण उत्पन्न हुई विभिन्न जनस्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था से संबंधित समस्याओं से जूझ रहा है वहीं उसे अब फेक न्यूज के कारण विभिन्न मनोवैज्ञानिक और सामजिक ताने बाने को चोट पहुंचाने वाली नई समस्याओं से भी जूझना पड़ रहा है। इस समस्या से हम अनुशासन, संयम और बुद्धिमत्ता से पार पा सकते हैं।
हमें यह समझना होगा की सोशल मीडिया कितनी भी तेज गति से चले, करोना से संबंधित अपडेट और जानकारियां अपनी गति से चलेंगी। सामान्यतः दिन में एक या दो बार सरकार के स्तर से अधिकृत सूचनाओं को जारी किया जाता है। इन्हीं सूचनाओं को विभिन्न माध्यम से दिनभर अलग-अलग कोणों से परोसते हैंं।
सामान्य रूप से आप दिन में एक दो बार स्वास्थ्य विभाग की वेबसाइट या सोशल मीडिया अकाउंट देख सकते हैं, जहां आपको अपने राज्य और पूरे देश की स्थिति पता चल सकती है। फेसबुक और ट्विटर दोनों ही माध्यमों में अधिकृत सरकारी स्रोतों, विश्व स्वास्थ्य संगठन के द्वारा दी गई जानकारी फ्लैग करके या डैशबोर्ड बनाकर प्रदर्शित की जा रही है।
भारत सरकार ने कोविड इंडिया सेवा नामक ट्विटर हैंडल शुरू किया है...
अभी भारत सरकार ने कोविड इंडिया सेवा नामक ट्विटर हैंडल शुरू किया है। आज के समय में प्रामाणिक और विस्तृत सूचना का सबसे बढ़िया स्रोत आपका अखबार है, जिसके पास बिना किसी हड़बड़ी के पूरे दिन सूचनाओं को वेरिफाई और क्रॉस वेरिफाई करने का टाइम होता है। इसके साथ ही सोशल मीडिया और व्हाट्सएप पर कोविड संक्रमण से जुड़ी हर सूचना को उसके स्रोत के आधार पर वर्गीकृत करें, चाहे वह करोना से संबंधित किसी इलाज की खबर हो या किसी व्यक्ति या वर्ग विशेष से जुड़ी कोई खबर, उसकी सत्यता को जानने का प्रयास करें।
याद रहें कोई भी बड़ी और महत्वपूर्ण घटना मुख्यधारा की मीडिया से छुपी नहीं रह सकती। यदि आप स्वयं खबर को वेरिफाई नहीं कर पा रहे हैं तो उस खबर को किसी अखबार या प्रतिष्ठित मीडिया की वेबसाइट पर तलाशने की कोशिश करिए।
याद रखिए इस संकट काल में फेक न्यूज हमारी समस्याओं में इजाफा करने का काम करेंगी। सोशल मीडिया बर्न आउट से बचने के लिए अपने सोशल मीडिया के उपयोग को नियंत्रित करिए, हर समय नोटिफिकेशन या टाइम लाइन चेक करने की आदत से बचिए।
सोशल मीडिया पर क्या पोस्ट कर सकते हैं, हर समय इस विचार से बाहर आने की कोशिश करिए। लॉकडाउन में बहुत से अच्छे और रचनात्मक कार्य कर सकते हैं, लेकिन हर बात सोशल मीडिया पर शेयर करने की आवश्यकता नहीं है।
इससे आप अपने अच्छे कार्य का परिणाम सोशल मीडिया पर प्राप्त होने वाले लाइक्स और शेयर्स से जोड़ कर देखने लगते हैं और फिर अपेक्षाकृत परिणाम न मिलने पर अवसाद का शिकार होने का खतरा है। अच्छी किताबें पढ़िए, बागवानी करिए, परिजनों के साथ समय बिताइए, कुछ लिखिए लेकिन सोशल मीडिया बर्न आउट से खुद को बचाइए।
किसी भी सूचना के लिए अधिकृत सोर्स पर भरोसा करिए। निराशावादी सोच से बाहर आइए, फेक न्यूज का बहिष्कार कीजिए और घर में रहकर ही करोना वारियर बनिए।
(लेखक उत्तराखंड के सूचना विभाग में उप निदेशक हैं।)
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।