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पूर्वोत्तर भारत में आंदोलन से पर्यटन उद्योग पर मार
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पिछले वर्ष नवंबर से जनवरी के बीच 4505 विदेशी पयर्टक और 4.25 लाख देसी पयर्टक आए थे।
- फोटो : social media
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पिछले एक दशक से पूर्वोत्तर में उग्रवादी हिंसा थमने के बाद पर्यटन उद्योग तेज से आगे बढ़ रहा है। पर्यटक अब गुवाहाटी और शिलांग से आगे बढ़कर अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड और मणिपुर के दूरदराज तक पहुंचने लगे थे। यह माना जाता है कि अक्टूबर से मार्च तक पूर्वोत्तर में पयर्टन का मौसम है। सबसे अधिक पर्यटक दिसंबर से 14 जनवरी तक आते हैं। अक्टूबर में राष्ट्रीय पार्कों के खुलने के बाद से पर्यटकों का आना आरंभ हो गया था।
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देसी-विदेशी पर्यटकों से काजीरंगा राष्ट्रीय पार्क भरने लगा था। आमतौर पर जो पर्यटक असम आते हैं, वे शिलांग भी जाते हैं। मेघायल का चेरापूंजी और आसपास के इलाके भी पयर्टकों से भर जाते हैं। पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए हर जगह होटल और रिसॉर्ट भी खुल रहे हैं।
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असम का माजुली एक बड़ा पर्यटन केंद्र बनता जा रहा है। सत्रीय संस्कृति का केंद्र होने की वजह से माजुली की अपनी अलग पहचान है। असम का ही मनाह और ओरांग राष्ट्रीय पार्क भीपर्यटकों को खूब पसंद आ रहे हैं। पयर्टकों की संख्या को देखते हुए काजीरंगा पर्यटन में उद्योग कुटीर उद्योग की तरह फैल गया है।
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काजीरंगा के आसपास के लोगों ने अपने घर के एक हिस्से को होम स्टे की तरह विकसित कर लिया है। राज्य सरकार भी इसमें मदद कर रही है। कई पर्यटक अब नगालैंड और मणिपुर की तरफ भी रुख करने लगे हैं, लेकिन सभी को असम के रास्ते से ही आगे जाने होता है।
10 दिसंबर से आरंभ हुए आंदोलन, हिंसा और बंद की वजह से सैंकड़ों पर्यटक असम और मेघालय में फंस गए। कई पर्यटकों को बीच रास्ते में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। बंद में फंसे लोगों ने बीच में अपनी सारी बुकिंग रद्द कर दी और किसी तरह वापस लौटे।
ज्यादातर लोग परिवार से साथ छुट्टी बिताने आए थे, लेकिन कई दिनों तक दहशत के माहौल पर होटल के अंदर ही बंद रहे और कर्फ्यू में ढील मिलते ही किसी तरह वापस लौटे। कई पर्यटकों को बीच रास्ते में आंदोलनकारियों के गुस्से का सामना करना पड़ा। वे छुट्टी के बीच में ही बुरे अनुभव लेकर लौट गए। वे शायद ही कभी पूर्वोत्तर के दौरे आएं या अपने किसी मित्र को सलाह देंगे।
असम पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष जयंत मल्ल बरुवा के अनुसार पिछले 15 दिनों में पर्यटन उद्योग को करीब 400 करोड़ रुपए का नुकसान होने का अनुमान है। पिछले वर्ष नवंबर से जनवरी के बीच 4505 विदेशी पयर्टक और 4.25 लाख देसी पयर्टक आए थे। इससे करीब 150 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ था, लेकिन इस बार पर्यटकों ने अपनी बुकिंग रद्द कर दी है। इसका असर अगले साल भी पड़ सकता है। पर्यटन उद्योग बढ़ने से स्थानीय टैक्सी चालक, हाथी मालिक, होटल व रेस्टूरेंट के साथ सड़क किनारे की छोटी दुकानों को भी काम मिलता था। स्थानीय कारीगरों के उत्पाद बिकते थे। अब सारे लोग बेकार हो गए हैं।
हिंसक आंदोलन और बंद की वजह से पर्यटन उद्योग प्रभावित होता है। लोग तनाव भरे माहौल पर में कभी छुट्टी मनाने नहीं आना चाहेंगे। हालांकि आरंभ के तीन दिनों बाद असम में हिंसक घटनाएं थम गई और शांतिपूर्ण आंदोलन अनवरत जारी है। लेकिन कोई पर्यटक ऐसे माहौल में नहीं आना चाहेगा। असम के पर्यटन स्थलों के साथ शिलोंग की भी यही स्थिति है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।