फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   BJP takes a dig at opposition group's name INDIA why they want to rename it

बड़ा प्रश्न: अगर इंडिया ही भारत है तो फिर नाम बदलने की जरूरत क्यों?

Tue, 01 Aug 2023 11:07 AM IST
Jay singh Rawat जयसिंह रावत
Updated Tue, 01 Aug 2023 11:07 AM IST
सार

राज्यों का नाम बदलना या उनका गठन और विस्तार करने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत संसद को दिया गया है, लेकिन देश का नाम बदलने का उल्लेख अलग से कहीं नहीं है। इसलिए यह कार्य संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत ही किया जा सकता है। इस प्रावधान के अनुसार संविधान से इंडिया नाम हटाने के लिए उन प्रासंगिक प्रावधानों में संशोधन की आवश्यकता होगी जहां ‘‘इंडिया’’ नाम का उल्लेख है।

विज्ञापन
BJP takes a dig at opposition group's name INDIA why they want to rename it
विपक्षी दलों के नेता। - फोटो : amarujala

विस्तार

विपक्षी दलों के नए गठबंधन का नाम इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इनक्लूसिव अलायंस (इंडिया) रखे जाने के बाद भारत के वैकल्पिक संवैधानिक नाम ‘‘इंडिया’’ के बजूद पर ही सवाल खड़े हो गए हैं। इससे पहले भी इंडिया नाम को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गयी थी जिसे 3 जून 2020 को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था।

विज्ञापन


उस समय दिल्ली के एक व्यक्ति ने इसे औपनिवेशिक शब्द बता कर इसको संविधान के अनुच्छेद 1 से हटाने के लिए याचिका दायर की थी जिस पर तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश अरविन्द बोवडे की खण्डपीठ ने कहा था कि संविधान में पहले स्पष्ट किया गया है कि इंडिया ही भारत है। लेकिन अब तो सत्ताधारी भाजपा के सांसद नरेश बंसल ने भी इसे राज्यसभा में उठा दिया। 

विज्ञापन

भाजपा की ओर से उठी है इंडिया नाम हटाने की मांग

उत्तराखण्ड से राज्यसभा सांसद नरेश बंसल की मांग को हल्के ढंग से नहीं लिया जा सकता। उन्होंने प्रधानमंत्री को पिछले वर्ष लालकिले की प्राचीर से दिए गए उनके भाषण की ओर भी उनका ध्यान आकर्षित किया है, जिसमें प्रधानमंत्री ने कहा था कि दास्तां के प्रतीक औपनिवेशिक चिन्हों से देश को मुक्ति दिलाना है। साथ ही आजादी के अमृत काल के लिए 5 प्रणों में से एक प्रण औपनिवेशिक माइंडसेट से देश को मुक्ति दिलाना भी है।

विज्ञापन
विज्ञापन


केन्द्र की मोदी सरकार धारा 370 को हटाने जैसा कठिन कार्य कर चुकी है और समान नागरिक संहिता की ओर बढ़ रही है। इसलिए आगमी 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले संविधान के अनुच्छेद एक में संशोधन कर ‘‘इंडिया’’ शब्द को हटा दिया जाय तो आश्चर्य नहीं होगा। वैसे भी देश में औपनिवेशिक शासन की याद दिलाने वाले प्रतीक चिन्हों को मिटाने और नाम बदलने का अभियान चल ही रहा है।

देश का नाम बदलने का अलग से प्रावधान नहीं

राज्यों का नाम बदलना या उनका गठन और विस्तार करने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत संसद को दिया गया है, लेकिन देश का नाम बदलने का उल्लेख अलग से कहीं नहीं है। इसलिए यह कार्य संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत ही किया जा सकता है। इस प्रावधान के अनुसार संविधान से इंडिया नाम हटाने के लिए उन प्रासंगिक प्रावधानों में संशोधन की आवश्यकता होगी जहां ‘‘इंडिया’’ नाम का उल्लेख है।

संशोधित किए जाने वाले प्रावधान की प्रकृति के आधार पर, इसके लिए साधारण बहुमत या विशेष बहुमत की आवश्यकता हो सकती है। हालांकि, किसी भी संवैधानिक संशोधन की तरह, संविधान की कुछ ‘बुनियादी विशेषताएं’ हैं जिनमें संशोधन नहीं किया जा सकता है।

इन बुनियादी विशेषताओं, जिन्हें ‘‘बुनियादी संरचना’’ सिद्धांत के रूप में भी जाना जाता है, इनमें वे तत्व शामिल हैं जो संविधान और देश का सार और पहचान बनाते हैं। 

भारत के लोगों ने चुना इंडिया, अंग्रेजों ने नहीं थोपा

संविधान के भाग 1 अनुच्छेद (1) में देश के नाम और क्षेत्र का उल्लेख किया गया है। जिसमें साफ लिखा है कि राज्यों के संघ का नाम इंडिया यानी कि भारत होगा। मतलब साफ है कि देश का संवैधानिक नाम इंडिया और भारत दोनों ही है। इस नाम को संविधान सभा द्वारा भारत के लोगों की ओर से 26 नवम्बर 1949 को संविधान के साथ ही अंगीकार किया गया और यह 26 जनवरी 1950 को लागू हो गया।

नए गणतांत्रिक भारत के जन्म की ऐतिहासिक घड़ी में भारत के अंतिम गवर्नर जनरल चक्रवर्ती राजगोपालाचारी ने भारत के लोगों द्वारा 26 नवम्बर 1949 को संविधानसभा में अंगीकृत संविधान के अनुसार भारत को सम्प्रभुता सम्पन्न गणराज्य की अधिघोषणा करते हुए कहा था कि, ‘‘और जबकि उक्त संविधान द्वारा यह घोषित किया गया है कि इंडिया, यानी भारत, राज्यों का एक संघ होगा जिसमें संघ के भीतर वे क्षेत्र शामिल होंगे जो अब तक राज्यपाल के प्रांत, भारतीय राज्य और मुख्य आयुक्तों के प्रांत थे’’।

BJP takes a dig at opposition group's name INDIA why they want to rename it
NDA vs INDIA - फोटो : Amar Ujala

‘‘इंडिया’’ शब्द या नाम अपने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के कारण देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। ‘इंडिया’ नाम का इतिहास बहुत पुराना है और यह दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक से जुड़ा हुआ है। इस नाम का उपयोग सदियों से इस क्षेत्र और इसके लोगों को संदर्भित करने के लिए किया जाता रहा है। इस नाम को बनाए रखने से ऐतिहासिक निरंतरता और सांस्कृतिक पहचान की भावना सुनिश्चित होती है। ‘‘इंडिया’’ नाम देश के भीतर विविध संस्कृतियों के लिए एक एकीकृत कारक के रूप में कार्य करता है।

भारत एक बहु-जातीय, बहुभाषी और बहु-धार्मिक राष्ट्र है और ‘‘इंडिया’’ नाम इसके नागरिकों के बीच साझा पहचान और एकता की भावना प्रदान करता है। इंडिया नाम को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक मान्यता प्राप्त है। यह अंतरराष्ट्रीय संबंधों, राजनयिक बातचीत और विभिन्न वैश्विक प्लेटफार्मों में उपयोग किया जाने वाला आधिकारिक नाम है। 


नाम बदलने की प्रक्रिया होगी जटिल

इंडिया नाम देश के संविधान और कानूनी दस्तावेजों में निहित है। नाम बदलने के लिए जटिल कानूनी और संवैधानिक प्रक्रियाओं की आवश्यकता होगी, जिसे लागू करना चुनौतीपूर्ण होगा। इंडिया नाम देश के लिए एक ब्रांड बन गया है, जो इसकी समृद्ध संस्कृति, विरासत और परंपराओं का प्रतिनिधित्व करता है। यह पर्यटन को बढ़ावा देने और दुनियाभर से पर्यटकों को आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

इंडिया ने विश्व इतिहास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और सदियों से व्यापार, संस्कृति और ज्ञान का केंद्र रहा है। इंडिया नाम अपने साथ यह ऐतिहासिक और वैश्विक प्रभाव रखता है। कुल मिलाकर, ‘‘इंडिया’’ नाम देश के लिए घरेलू और अंतरारष्ट्रीय स्तर पर बहुत महत्व रखता है, क्योंकि यह इसके समृद्ध इतिहास, विविध संस्कृति और वैश्विक समुदाय में अद्वितीय पहचान को समाहित करता है।

यह सही है कि अंग्रेजों ने भारत पर शासन करने के लिए इंडिया शब्द का प्रयोग किया है। फिर भी इसे अंग्रेजों की देन या थोपा गया नाम नहीं कहा जा सकता है। इतिहास के पन्ने टटोलें तो  सिंधु नदी का दूसरा नाम इंडस भी था। इस नदी के किनारे विकसित सभ्यता इंडस वैली सिविलाइजेशन कहलाई। सिंधु नदी का इंडस नाम भारत आए विदेशियों ने रखा।  सिंधु सभ्यता के कारण भारत का पुराना नाम सिंधु भी था, जिसे यूनानी में इंडो या इंडस भी कहा जाता था।

जब ये शब्द लैटिन भाषा में पहुंचा तो बदलकर इंडिया हो गया। मौर्य काल में मेगस्थनीज द्वारा लिखी गई पुस्तक ‘‘इंडिका’’ भी इस बात का प्रमाण है कि इंडिया शब्द अपने आप में भारत का प्राचीन नाम है और इसे अंग्रेजों ने भारत पर नहीं थोपा था। दुनिया के लोग भारत को इंडिया के नाम से ही जानते थे।

विपक्षियों के गठबंधन के इंडिया नाम से विचलित हो कर इस शब्द को संविधान से हटाने पर सरकार को स्वयं असहज स्थिति का सामना करना पड़ेगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अब तक कम से कम 135 जनकल्याणकारी और प्रगतिशील योजनाएं शुरू कर चुके हैं जिनके लाभ देश को मिल रहे हैं। ऐसी कम से कम एक दर्जन योजनां इंडिया के नाम से चल रही हैं जिनमें मेक इन इंडिया, खेलो इंडिया, फेम इंडिया, डिजिटल इंडिया, स्किल इंडिया, स्टार्ट अप इंडिया, स्टैंड अप इंडिया और डिजिटल इंडिया आदि शामिल हैं।

ये योजनाएं सीधे जनता से जुड़ी हैं इसलिए नाम बदलने का स्पष्टीकरण सीधे जनता को देना पड़ेगा। वैसे भी विपक्षी दलों के गठबंधन बनते बिगड़ते रहते हैं। उनके नाम भी बदलते रहते हैं। बनते बिगड़ते राजनीतिक नामों के साथ देश के नाम भी बदलते रहना कितना तर्कसंगत होगा, यह देश की जनता ही तय करेगी।


-----------------
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): 
यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकताु, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed