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ऐसा क्या कि जम्मू-कश्मीर पुलिस ने, सेना हुई लाल
अमर उजाला चंडीगढ़
Updated Sat, 28 Sep 2013 02:06 AM IST
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वेस्टर्न कमांड के सांबा कैंप पर हुए आतंकवादी हमले में जम्मू-कश्मीर पुलिस की लापरवाही पर अब सवाल उठने लगे हैं। सेना का कहना है कि पहले पुलिस पोस्ट पर हमला हुआ और उसके बाद वे ट्रक से हाईवे पर पहुंचे।
आतंकवादियों ने करीब 18 किलोमीटर का रास्ता एक घंटे में पूरा किया। वेस्टर्न कमांड से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि हमले के एक घंटे बाद तक वे हाईवे पर घूमते रहे, लेकिन पुलिस की ओर से सेना के कैंप को कोई सूचना नहीं दी गई।
यदि सूचना दे दी जाती तो आतंकवादी हमला रोका जा सकता था, लेकिन हमले की सूचना सेना के साथ साझा नहीं की गई। यदि ऐसा होता तो सेना पहले से ही तैयार रहती है और कैंप में पहुंचने से पहले तीनों आतंकवादियों को पकड़ लिया जाता। सेना के अधिकारी चाहते हैं कि इस मामले की जांच भी होनी चाहिए कि ऐसा क्यों नहीं किया गया।
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जिस गेट पर सुरक्षा कम थी, उसी से दाखिल हुए सेना के अधिकारियों ने बताया कि सांबा कैंप में आतंकवादियों के हमले से अंदेशा जताया जा रहा है कि उन्होंने पहले इस इलाके की रेकी की हो, क्योंकि आतंकवादी उस गेट से अंदर दाखिल हुए, जिस गेट पर सुरक्षा बहुत कम थी।
आतंकवादी आसानी से कैंप पहुंचते हैं और संतरी को गोली मारकर अंदर पहुंच जाते हैं। सेना से जुड़े अधिकारी बताते हैं कि कैंप में इस तरह से घुसना संदेह पैदा करता है।
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आतंकवादियों ने करीब 18 किलोमीटर का रास्ता एक घंटे में पूरा किया। वेस्टर्न कमांड से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि हमले के एक घंटे बाद तक वे हाईवे पर घूमते रहे, लेकिन पुलिस की ओर से सेना के कैंप को कोई सूचना नहीं दी गई।
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यदि सूचना दे दी जाती तो आतंकवादी हमला रोका जा सकता था, लेकिन हमले की सूचना सेना के साथ साझा नहीं की गई। यदि ऐसा होता तो सेना पहले से ही तैयार रहती है और कैंप में पहुंचने से पहले तीनों आतंकवादियों को पकड़ लिया जाता। सेना के अधिकारी चाहते हैं कि इस मामले की जांच भी होनी चाहिए कि ऐसा क्यों नहीं किया गया।
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जिस गेट पर सुरक्षा कम थी, उसी से दाखिल हुए सेना के अधिकारियों ने बताया कि सांबा कैंप में आतंकवादियों के हमले से अंदेशा जताया जा रहा है कि उन्होंने पहले इस इलाके की रेकी की हो, क्योंकि आतंकवादी उस गेट से अंदर दाखिल हुए, जिस गेट पर सुरक्षा बहुत कम थी।
आतंकवादी आसानी से कैंप पहुंचते हैं और संतरी को गोली मारकर अंदर पहुंच जाते हैं। सेना से जुड़े अधिकारी बताते हैं कि कैंप में इस तरह से घुसना संदेह पैदा करता है।