{"_id":"5af891474f1c1be4408b505f","slug":"water-problem-in-jhansii","type":"story","status":"publish","title_hn":"बेकार बह रहा चार हजार लोगों के हिस्से का पानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बेकार बह रहा चार हजार लोगों के हिस्से का पानी
jhansi
Updated Mon, 14 May 2018 12:55 AM IST
विज्ञापन
प्रशासन
- फोटो : demo pic
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भीषण जलसंकट से जूझ रहे शहर में हर दिन करीब चार हजार लोगों के हिस्से का पानी सड़कों पर बहाया जा रहा है। महानगर के सर्विस सेंटरों में रोज औसत 2000 वाहनों की धुलाई होती है, जिससे इन पर खर्च होने वाला सवा लाख लीटर पानी बहकर बर्बाद हो रहा है। जलसंस्थान के मानकों के अनुसार एक व्यक्ति को रोज 35 लीटर पानी की जरूरत होती है, इस हिसाब से रोज लगभग चार हजार लोगों के हिस्से का पानी बर्बाद हो रहा है। शहर के सभी सर्विस सेंटरों में बोरिंग के जरिये धुलाई की जा रही है।
पारा 44 डिग्री का आंकड़ा पार कर चुका है। आने वाले दिनों में इसमें और बढ़ोत्तरी की संभावना जताई जा रही है। नलों में पानी की आपूर्ति लगातार घटती जा रही है। भूगर्भ जल का स्तर कम होने की वजह से हैंडपंप और बोरिंग साथ छोड़ते जा रहे हैं। जल संस्थान के तीस से अधिक टैंकर दिन में कई-कई चक्कर लगाने के बाद भी पानी की मांग पूरी नहीं कर पा रहे हैं। वहीं, तमाम लोग पानी खरीदकर काम चला रहे हैं। आने वाले दिनों में संकट और गहराने की संभावनाएं जताई जा रही हैं। बावजूद, उपलब्ध पानी के प्रबंधन और उसकी बचत के ठोस उपाय नहीं किए जा रहे हैं। इसकी तस्दीक शहर में चलने वाले तीन दर्जन से अधिक सर्विस सेंटरों को देखकर की जा सकती हैं, जहां रोजाना एक लाख लीटर से अधिक पानी गाड़ियों की धुलाई में खर्च किया जा रहा है। इस पानी को रिसाइकिल कर दुबारा इस्तेमाल करने के कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। गाड़ी की धुलाई के साथ यह पानी नालियों में बह जाता है। पानी बचाने के लिए हाल ही में कानपुर में सर्विस सेंटरों पर गाड़ियों की धुलाई पर रोक लगाई जा चुकी है, लेकिन यहां ऐसे कोई उपाय नहीं किए जा रहे हैं।
एक नजर में
-----------
- 40-50 लीटर पानी दुपहिया वाहन की धुलाई पर होता है खर्च
- 100-150 लीटर पानी चार पहिया गाड़ी की धुलाई पर होता है खर्च
- 40 से अधिक सर्विस स्टेशनों पर धोई जाती हैं गाड़ियां
- हर सेंटर पर औसतन पचास वाहन धोये जाती हैं
- 1.25 लाख लीटर पानी रोजाना खर्च होता है गाड़ियों की धुलाई पर
ये हो सकते हैं उपाय
------------------
- पंप से धुलाई करने की बजाय बाल्टी में पानी लेकर धुलाई करें। गीले कपड़े से दुपहिया वाहन साफ करने पर 25-30 लीटर और कार साफ करने पर 100 लीटर तक पानी बचाया जा सकता है।
विज्ञापन
- गाड़ियों की ड्राई वॉश के लिए बाजार में केमिकल भी उपलब्ध हैं। इनका इस्तेमाल कर गाड़ियों की सफाई की जा सकती है।
- एयर प्रेशर वॉशर से भी गाड़ियां साफ की जा सकती हैं। इससे अस्सी फीसदी तक पानी की बचत होती है।
अलग से नहीं होता लाइसेंस
गाड़ियों का धुलाई सेंटर संचालित करने के लिए अलग से कोई नगर निगम द्वारा लाइसेंस जारी नहीं किया जाता है। कॉमर्शियल लाइसेंस ही दिया जाता है। शहर में कितने सर्विस सेंटर बगैर लाइसेंस के चल रहे हैं। इसका पता कर कार्रवाई की जाएगी।
- रोहन सिंह, अपर नगर आयुक्त
विज्ञापन
पारा 44 डिग्री का आंकड़ा पार कर चुका है। आने वाले दिनों में इसमें और बढ़ोत्तरी की संभावना जताई जा रही है। नलों में पानी की आपूर्ति लगातार घटती जा रही है। भूगर्भ जल का स्तर कम होने की वजह से हैंडपंप और बोरिंग साथ छोड़ते जा रहे हैं। जल संस्थान के तीस से अधिक टैंकर दिन में कई-कई चक्कर लगाने के बाद भी पानी की मांग पूरी नहीं कर पा रहे हैं। वहीं, तमाम लोग पानी खरीदकर काम चला रहे हैं। आने वाले दिनों में संकट और गहराने की संभावनाएं जताई जा रही हैं। बावजूद, उपलब्ध पानी के प्रबंधन और उसकी बचत के ठोस उपाय नहीं किए जा रहे हैं। इसकी तस्दीक शहर में चलने वाले तीन दर्जन से अधिक सर्विस सेंटरों को देखकर की जा सकती हैं, जहां रोजाना एक लाख लीटर से अधिक पानी गाड़ियों की धुलाई में खर्च किया जा रहा है। इस पानी को रिसाइकिल कर दुबारा इस्तेमाल करने के कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। गाड़ी की धुलाई के साथ यह पानी नालियों में बह जाता है। पानी बचाने के लिए हाल ही में कानपुर में सर्विस सेंटरों पर गाड़ियों की धुलाई पर रोक लगाई जा चुकी है, लेकिन यहां ऐसे कोई उपाय नहीं किए जा रहे हैं।
विज्ञापन
एक नजर में
-----------
- 40-50 लीटर पानी दुपहिया वाहन की धुलाई पर होता है खर्च
- 100-150 लीटर पानी चार पहिया गाड़ी की धुलाई पर होता है खर्च
- 40 से अधिक सर्विस स्टेशनों पर धोई जाती हैं गाड़ियां
- हर सेंटर पर औसतन पचास वाहन धोये जाती हैं
- 1.25 लाख लीटर पानी रोजाना खर्च होता है गाड़ियों की धुलाई पर
ये हो सकते हैं उपाय
------------------
- पंप से धुलाई करने की बजाय बाल्टी में पानी लेकर धुलाई करें। गीले कपड़े से दुपहिया वाहन साफ करने पर 25-30 लीटर और कार साफ करने पर 100 लीटर तक पानी बचाया जा सकता है।
विज्ञापन
- गाड़ियों की ड्राई वॉश के लिए बाजार में केमिकल भी उपलब्ध हैं। इनका इस्तेमाल कर गाड़ियों की सफाई की जा सकती है।
- एयर प्रेशर वॉशर से भी गाड़ियां साफ की जा सकती हैं। इससे अस्सी फीसदी तक पानी की बचत होती है।
अलग से नहीं होता लाइसेंस
गाड़ियों का धुलाई सेंटर संचालित करने के लिए अलग से कोई नगर निगम द्वारा लाइसेंस जारी नहीं किया जाता है। कॉमर्शियल लाइसेंस ही दिया जाता है। शहर में कितने सर्विस सेंटर बगैर लाइसेंस के चल रहे हैं। इसका पता कर कार्रवाई की जाएगी।
- रोहन सिंह, अपर नगर आयुक्त