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ब्रह्मा विष्णु महेश की तरह हैं कार्यपालिका, व्यवस्थापिका व न्यायपालिका
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
Updated Sat, 18 Mar 2017 04:32 PM IST
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कार्यक्रम में मौजूद अतिथि
- फोटो : अमर उजाला
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कार्यपालिका, व्यवस्थापिका व न्यायपालिका ब्रह्मा विष्णु महेश की तरह हैं, तीनों का काम अलग-अलग हैं। उन्हें इसकी जानकारी होनी चाहिए। यह कहना था जस्टिस एनके जैन का। वे सुबोध कालेज में शनिवार को आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे।
एसएस जैन सुबोध पीजी कालेज में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग नई दिल्ली की ओर से मानवाधिकारों पर एक बुनियादी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि जस्टिस एन.के. जैन थे।
उन्होंने कहा कि मानव अधिकारों को हमारे संविधान में शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि कार्यपालिका, व्यवस्थापिका व न्यायपालिका ब्रह्मा विष्णु महेश की तरह हैं, इन तीनों का कार्य अलग-अलग है और ये एक दूसरे के काम में दखलंदाजी नहीं करते। इसके लिए हमें अपने अधिकारों व कर्तव्यों की जानकारी होना बेहद जरूरी है।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता एमडीएस यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. कैलाश सोढ़ानी ने की। उन्होंने कहा कि हम अपनी गुलामी की मानसिकता और भय से बाहर नहीं निकले, हमें अधिकारों के लिए जागरुक होना चाहिए। इसके लिए बुद्धिजीवियों को अपने लेखन से समाज में जागृति का काम करना चाहिए। कार्यक्रम में चार तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। जिनमें मानवाधिकारों से जुड़े कई पहलुओं पर चर्चा की गई।
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एसएस जैन सुबोध पीजी कालेज में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग नई दिल्ली की ओर से मानवाधिकारों पर एक बुनियादी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि जस्टिस एन.के. जैन थे।
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उन्होंने कहा कि मानव अधिकारों को हमारे संविधान में शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि कार्यपालिका, व्यवस्थापिका व न्यायपालिका ब्रह्मा विष्णु महेश की तरह हैं, इन तीनों का कार्य अलग-अलग है और ये एक दूसरे के काम में दखलंदाजी नहीं करते। इसके लिए हमें अपने अधिकारों व कर्तव्यों की जानकारी होना बेहद जरूरी है।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता एमडीएस यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. कैलाश सोढ़ानी ने की। उन्होंने कहा कि हम अपनी गुलामी की मानसिकता और भय से बाहर नहीं निकले, हमें अधिकारों के लिए जागरुक होना चाहिए। इसके लिए बुद्धिजीवियों को अपने लेखन से समाज में जागृति का काम करना चाहिए। कार्यक्रम में चार तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। जिनमें मानवाधिकारों से जुड़े कई पहलुओं पर चर्चा की गई।