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UOU को प्राइवेट परीक्षा का जिम्मा सौंपने पर मची खलबली
भूपेंद्र मोहन रौतेला/ अमर उजाला, नैनीताल
Updated Wed, 04 May 2016 03:31 PM IST
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एक बार फिर शासन की ओर से प्राइवेट परीक्षा का जिम्मा उत्तराखंड मुक्त विवि (यूओयू) को दिए जाने की हलचल से कुमाऊं विवि में खलबली मच गई है।
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बाकायदा इसके लिए राज्यपाल डॉ. केके पॉल की ओर से जारी दिशा निर्देश भी विवि को प्राप्त हो चुके हैं। परीक्षा का जिम्मा छिनने से कुमाऊं विवि को हर वर्ष करीब साढ़े तेरह करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ेगा। कुमाऊं विवि वर्ष 1994 से लगातार प्राइवेट एग्जाम कराते आ रहा है। वर्तमान में विवि अल्मोड़ा व नैनीताल परिसरों समेत विवि से संबद्ध 55 डिग्री कालेजों की प्राइवेट परीक्षा करा रहा है।
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यूओयू को प्राइवेट परीक्षा कराने की बात शासन द्वारा सितंबर 2015 में भी उठाई गई थी लेकिन उसके बाद विवि के कर्मचारी व छात्रों संगठनों के बढ़ते दबाव के बाद यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया। अब फिर शासन की ओर से इस मामले में अंतिम फैसला लेने की वजह से इतना तो तय हो गया है कि अब कुमाऊं विवि प्राइवेट एग्जाम नहीं करा पाएगा।
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कुविवि में हर वर्ष करीब 1 लाख परीक्षार्थी प्राइवेट परीक्षा देते हैं जिसमें यूजी स्तर में 60 हजार तथा पीजी स्तर के 40 हजार परीक्षार्थी होते हैं। यूजी से करीब 8 करोड़ 40 लाख और पीजी से 5 करोड़ 70 लाख रुपये की आय परीक्षा शुल्क के रूप में होती है। खास बात यह है कि विवि को परीक्षा कराने के लिए न तो राज्य सरकार कोई बजट देती है और न ही यूजीसी। प्राइवेट परीक्षा की आय से ही रेगुलर की परीक्षा कराने में विवि को मदद मिलती थी।
प्राइवेट एग्जाम न कराने से विवि में वित्तीय संकट होना तय है। शासन प्राइवेट परीक्षा से विवि को हो रहे वित्तीय नुकसान की भरपाई करे। वित्तीय सहायता विवि को अधिक से अधिक मिले इस मामले को शासन स्तर प्राथमिकता से रखा जाएगा।
- प्रो.होशियार सिंह धामी, कुलपति, कुविवि नैनीताल
प्राइवेट परीक्षा के शुल्क से ही रेगुलर एग्जाम कराने में भी विवि को मदद मिल जाया करती थी। अब रेगुलर की परीक्षा कराने के लिए परीक्षा शुल्क बढ़ाना विवि की मजबूरी होगी। इस मामले में फैसला विवि की परीक्षा समिति की बैठक में ही लिया जाएगा।
- प्रो.रजनीश पांडे, मुख्य परीक्षा नियंत्रक,कुविवि नैनीताल
प्राइवेट एग्जाम के लिए करीब दो दर्जन कर्मी अतिरिक्त भी रखे गए हैं। परीक्षा शुल्क से ही इनका भी खर्चा निकलता है। शासन की ओर से विवि को बीते वर्ष में 29 करोड़ की मदद मिली थी लेकिन अबकी बार 60 करोड़ की मांग की गई थी जिसमें से 30 करोड़ ही स्वीकृत हुआ है। शासन से वित्तीय ठीक कराने को शिष्टमंडल गवर्नर से मिलेगा।
- दीपक बिष्ट, अध्यक्ष, कुविवि प्रशासनिक भवन शिक्षणेत्तर कर्मचारी संघ नैनीताल