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दो साल से अटकी बीएड परीक्षा, अधर में हजारों का भविष्य

Tue, 03 May 2016 10:26 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 03 May 2016 10:26 AM IST
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sri dev suman university b.ed exam
- फोटो : अमर उजाला

श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों में बीएड(एक वर्षीय) करने आए करीब पांच हजार छात्रों का इंतजार पीएचडी जैसा हो गया है। दो साल हो गए लेकिन अब तक परीक्षाएं नहीं हुई। हालात यह हैं कि छात्र पूरी फीस भरने और पढ़ाई करने के बावजूद न तो कहीं और दाखिला ले सकते हैं और न ही कहीं नौकरी कर सकते हैं।

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श्रीदेव सुमन विवि में सत्र 2014-15 में करीब 2400 दाखिले संबद्ध कॉलेजों में हुए थे। सीटें भरने की हड़बड़ाहट में संबद्ध कॉलेजों ने आरक्षित सीटों पर सामान्य वर्ग के दाखिले कर दिए। कॉलेजों से नियमों का पूर्णत: पालने करने के शपथ पत्र लिए जाने के बावजूद कॉलेजों ने सरकारी कोटे की सीटें भी बिना प्रवेश परीक्षा ही भर दीं। मामला विवि के संज्ञान में आया तो विवि प्रशासन ने परीक्षाएं रोक दी थी।
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तब से लेकर आज तक परीक्षाएं अटकी हुई हैं। कई बार प्रयास किए गए लेकिन कॉलेज अपनी गलती मानने को तैयार नहीं हैं। इस वजह से सत्र 2014-15 के करीब 2400 और सत्र 2015-16 के करीब 2600 छात्रों की परीक्षाएं अटकी हुई हैं। मामले में विवि प्रशासन की ओर से शासन को अवगत कराया गया है। अभी शासन का कोई फैसला आने का इंतजार है। 2014 में दाखिला लेने वाले छात्रों के हालात तो अब पीएचडी जैसे हो गए हैं, जिसमें कम से कम तीन से साढ़े तीन साल में डिग्री मिल जाती है।
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क्या होगा बीएड का
अब यहां छात्रों को इस बात की चिंता है कि एक सत्र की परीक्षाएं अटकने से पांच हजार से ज्यादा छात्र प्रभावित हैं। सत्र लेट हो रहा है। नए सत्र के लिए गढ़वाल विवि नोटिफिकेशन जारी कर चुका है, जिसकी प्रवेश परीक्षा 12 जून को होने जा रही है लेकिन श्रीदेव सुमन विवि नए सत्र के लिए भी कोई तिथि अभी तक तय नहीं कर पाया है। लिहाजा, विवि में बीएड की व्यवस्था कॉलेजों की मनमानी की वजह से लड़खड़ा सी गई है।

हमने शासन को कॉलेजों के गलत एडमिशन के पूरे मामले से अवगत करा दिया है। अभी तक कोई जवाब नहीं आया है। जैसे भी निर्देश मिलेंगे तो उनका अनुपालन किया जाएगा। यह पूर्ण रूप से कॉलेजों के स्तर से की गई गलती है।

- एसएस रावत, कुलसचिव, श्रीदेव सुमन विवि

शासन को चाहिए कि सभी विश्वविद्यालयों का एक कॉमन एंट्रेंस कराए। एक ही एकेडमिक कैलेंडर हो। पूरे प्रदेश में सत्र लेट नहीं होगा और छात्रों को असुविधा भी नहीं होगी। सत्र रेगुलर रहना सबसे ज्यादा जरूरी है।
- सुनील अग्रवाल, अध्यक्ष, एसोसिएशन ऑफ सेल्फ फाइनेंस इंस्टीट्यूट

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