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दाखिले की खींचतान में उलझा गरीब बच्चों का भविष्य, नियम 134ए पर गतिरोध

Fri, 13 May 2016 01:02 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद Updated Fri, 13 May 2016 01:02 AM IST
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rule 134a  future of poor students in dark
स्कूल

नियम 134ए पर गतिरोध बरकरार है। निजी स्कूलों में ईडब्ल्यूएस के तहत आरक्षित सीटों पर दाखिला प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है। शिक्षा विभाग ने महज 143 बच्चों का ड्रा निकालकर खानापूर्ति कर दी है लेकिन जिन बच्चों को स्कूल अलॉट हुए हैं, उन्हें भी अभी तक दाखिला नहीं मिला है। सरकार और निजी स्कूलों के बीच चल रही खींचतान के बीच अभिभावक परेशान हैं।

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आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के बच्चों को निजी स्कूलों में दाखिले के लिए नियम 134ए लागू किया गया था। सरकार बदल गई लेकिन व्यवस्था में कोई सुधार नहीं आया। नया सत्र शुरू होने के महीनेभर बाद भी दाखिले की खींचतान जारी है। निजी स्कूलों में 10 प्रतिशत आरक्षित सीटों पर आवेदन प्रक्रिया शुरू करने में पहले तो शिक्षा विभाग लापरवाही बरतता गया।
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आवेदन हुए तो महज 384 बच्चों को ही लिखित परीक्षा के योग्य माना गया। एक मई को परीक्षा हुई तो इनमें से महज 143 बच्चे ही सफल हो पाए। ड्रा निकालकर इन बच्चों को स्कूल भी आवंटित कर दिए गए लेकिन निजी स्कूलों ने दाखिला देने से हाथ खड़े कर दिए। नियम 134ए के नाम पर दबाव बनाने का आरोप लगाते हुए पिछले दिनों निजी स्कूलों ने चार दिन की हड़ताल की थी। सत्र बीतता जा रहा है लेकिन बच्चों को शिक्षा का अधिकार नहीं मिला है। दाखिले के लिए अभिभावक स्कूलों के धक्के खा रहे हैं।
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आरटीई के पक्ष में स्कूल
निजी स्कूल नियम 134ए को खत्म करने की मांग कर रहे हैं। स्कूल संचालक मानते हैं जब पूरे देश में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई एक्ट) लागू है तो हरियाणा में 134ए का क्या औचित्य है। जिन स्कूलों को रियायती दरों पर जमीन मिली है, उनकी बात अलग है लेकिन स्कूल संचालक कहते हैं कि अन्य स्कूलों पर दबाव बनाना गलत है। हरियाणा प्रोग्रेसिव स्कूल कांफ्रेंस के प्रदेश अध्यक्ष एसएस गोसाईं ने बताया कि धारा 134ए के तहत दिशा-निर्देश स्पष्ट नहीं है। सरकार पहले स्थिति स्पष्ट करे।

हरियाणा बोर्ड के स्कूल भी लामबंद

rule 134a  future of poor students in dark

हरियाणा बोर्ड के स्कूल भी लामबंद
हरियाणा बोर्ड के सिलेबस में देरी के कारण बच्चाें की पढ़ाई पहले ही प्रभावित हो चुकी है। ऐसे में पिछले दिनों सीबीएसई स्कूलों की हड़ताल में हरियाणा बोर्ड के स्कूल शामिल नहीं हुए, लेकिन अब नियम 134ए को खत्म करने के लिए हरियाणा बोर्ड के स्कूल सीबीएसई स्कूलों के साथ कदम से कदम मिलाएंगे।

परेशान अभिभावकों का दर्द
भूपानी निवासी भगत ने बताया कि ड्रा में नाम आने के बाद भी स्कूल दाखिला नहीं दे रहा है। स्कूल में घुसने तक नहीं दिया जाता। अभिभावक अनीस ने बताया कि अपने बच्चे को लेकर वह कई बार आवंटित स्कूल में जा चुके हैं लेकिन वहां कोई सुनने को तैयार नहीं होता, जबकि बच्चा लिखित परीक्षा पास कर चुका है। कुछ ऐसी ही समस्या नरेंद्र, अमरपाल, राजेंद्र, इंद्रजीत और मुकेश की भी है। इस तरह के 143 बच्चे हैं, जिनको स्कूल तो आवंटित हो गए हैं लेकिन दाखिला नहीं मिला है। स्कूल के बाहर से ही इन्हें वापस भेज दिया जाता है।

क्या है नियम 134ए
आरटीई (शिक्षा का अधिकार अधिनियम) को ज्यादा प्रभावी बनाने के लिए तत्कालीन सरकार ने राज्य में नियम 134ए लागू किया था। इसका मकसद प्रत्येक निजी स्कूल में 25 फीसदी सीटों पर आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के बच्चों को दाखिला सुनिश्चित करना था। इन बच्चों को निशुल्क शिक्षा देने का प्रावधान किया गया लेकिन जब तक नियम लागू किया गया तब से लेकर आज तक इसको लेकर विवाद छिड़ा हुआ है। हालांकि बाद में आरक्षित सीटों का कोटा 25 से घटाकर 10 फीसदी कर दिया गया लेकिन इसके बाद भी दाखिले पर घमासान जारी है।

सरकार और निजी स्कूलों के बीच खींचतान की वजह से अभिभावक परेशान हैं। सरकारी स्कूलों की तर्ज पर आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के बच्चों से फीस ली जानी चाहिए। स्कूलों ने हड़ताल पर जाकर अभिभावकों का शोषण किया है। चार दिन स्कूल बंद रहे क्या अभिभावकों को इन चार दिनों की फीस लौटाई जाएगी। -एनएल जांगिड़, अध्यक्ष-फरीदाबाद अभिभावक एकता मंच

हरियाणा सरकार की गलत नीतियों के चलते यह विवाद बढ़ रहा है। जब पूरे देश में आरटीई लागू है तो हरियाणा में नियम 134ए क्यों लागू कर दिया गया है। आरटीई के तहत जब केंद्र सरकार बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठा रही है तो राज्य सरकार ऐसा क्यों नहीं कर रही। नियम 134ए को खत्म किया जाना चाहिए। -रमेश डागर, प्रदेशाध्यक्ष-प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन

निजी स्कूलों ने फैसला लिया था कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के बच्चों को पढ़ाने के लिए जब तक रिंबर्समेंट अमाउंट नहीं मिलता तब तक दाखिला नहीं दिया जाएगा, लेकिन अदालत के आदेश का पालन करते हुए जो क्वालीफाई बच्चा आ रहा है उसको दाखिला दिया जा रहा है।  -रमेश चंद्र, जिलाध्यक्ष-हरियाणा प्राग्रेसिव स्कूल कांफ्रेंस

यदि कोई स्कूल धारा 134-ए के तहत एडमिशन नहीं देता और नियमों पर काम नहीं करता, तो उसकी मान्यता रद्द करने के लिए शिक्षा विभाग को लिखा जाएगा। - डॉ. मनोज कौशिक, डीईओ फरीदाबाद

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