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खाका तैयार... निरफ रैंकिंग में टॉप-40 इंजीनियरिंग संस्थानों में आने के लिए पेक ने कसी कमर
Mon, 05 Oct 2020 11:30 AM IST
खुशबू गोयल
सुशील कुमार, चंडीगढ़
सुशील कुमार, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 05 Oct 2020 11:30 AM IST
सार
- वर्तमान रैंकिंग 68, वर्ष 2019-20 में निरफ में मिला था 78वां स्थान
- रैकिंग के लिए शिक्षकों की संख्या बढ़ाना बेहद जरूरी...
- 3300 से अधिक छात्रों के लिए हैं लगभग 105 शिक्षक
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पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़
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विस्तार
पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी (पेक) ने एक नया खाका तैयार किया है। योजना है कि टॉप- 40 इंजीनियरिंग शिक्षण संस्थानों में जगह बनानी है। यह तभी होगा जब निरफ रैंकिंग में भी यही स्थान मिले। इसके लिए पेक ने काम करना शुरू कर दिया है। रिसर्च से लेकर टीचिंग के क्षेत्र में बड़ा सुधार किया जाएगा। निरफ रैंकिंग के पैरामीटर पर खरा उतरने की तैयारी है।
पेक को ओवरआल रैंकिंग में पिछले कई वर्षों से बेहतर स्थान नहीं मिला। इंजीनियरिंग शिक्षण संस्थानों की सूची में कुछ बेहतर प्रदर्शन इस साल किया था। पेक की रैंकिंग 78 पायदान से 68 पर आ गई यानी संस्थान की ओर से बेहतर सुधार किए गए। कुल अंक 41.43 मिले थे। कमी छात्र-शिक्षक अनुपात की रही। शिक्षकों की संख्या यहां कम है। अस्थायी शिक्षकों के बलबूते विद्यार्थियों को पढ़ाया जा रहा है।
रिसर्च का क्षेत्र भी इसके कारण पिछड़ा है, क्योंकि विद्यार्थियों को पढ़ाने की जिम्मेदारी इन्हीं शिक्षकों की है। ऐसे में शिक्षकों को रिसर्च के लिए समय ही नहीं मिला। वर्ष 2018-19 में पेक ने महज दो ही पेटेंट दर्ज कराए जबकि यहां रिसर्च का बड़ा मंच है। पेक को 38 सहायक रिसर्च प्रोजेक्ट मिले थे और एजेंसियों से 19 फंडिंग रिसर्च प्रोजेक्ट मिले थे। पेक के खाते में कुल 1.94 करोड़ की रकम आई थी जो कम रही।
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इसके अलावा जन संपर्क के मामले में भी पेक पिछड़ा है। बाहर जाकर शिक्षण संस्थानों में अपने कोर्सेज, संस्थान की छवि को बेहतर बनाने की कोशिश नहीं की गई थी। साथ ही संसाधनों के लिए बजट का भी अभाव रहा है।
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पेक को ओवरआल रैंकिंग में पिछले कई वर्षों से बेहतर स्थान नहीं मिला। इंजीनियरिंग शिक्षण संस्थानों की सूची में कुछ बेहतर प्रदर्शन इस साल किया था। पेक की रैंकिंग 78 पायदान से 68 पर आ गई यानी संस्थान की ओर से बेहतर सुधार किए गए। कुल अंक 41.43 मिले थे। कमी छात्र-शिक्षक अनुपात की रही। शिक्षकों की संख्या यहां कम है। अस्थायी शिक्षकों के बलबूते विद्यार्थियों को पढ़ाया जा रहा है।
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रिसर्च का क्षेत्र भी इसके कारण पिछड़ा है, क्योंकि विद्यार्थियों को पढ़ाने की जिम्मेदारी इन्हीं शिक्षकों की है। ऐसे में शिक्षकों को रिसर्च के लिए समय ही नहीं मिला। वर्ष 2018-19 में पेक ने महज दो ही पेटेंट दर्ज कराए जबकि यहां रिसर्च का बड़ा मंच है। पेक को 38 सहायक रिसर्च प्रोजेक्ट मिले थे और एजेंसियों से 19 फंडिंग रिसर्च प्रोजेक्ट मिले थे। पेक के खाते में कुल 1.94 करोड़ की रकम आई थी जो कम रही।
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इसके अलावा जन संपर्क के मामले में भी पेक पिछड़ा है। बाहर जाकर शिक्षण संस्थानों में अपने कोर्सेज, संस्थान की छवि को बेहतर बनाने की कोशिश नहीं की गई थी। साथ ही संसाधनों के लिए बजट का भी अभाव रहा है।
छात्र अनुपात में शिक्षकों की संख्या कम
पेक में स्थायी शिक्षकों की संख्या लगभग 105 और विद्यार्थियों की संख्या 3300 से अधिक है। छात्र अनुपात में शिक्षकों की संख्या कम है। शिक्षकों पर लगातार भार बढ़ता जा रहा है। यदि शिक्षकों की भर्ती पेक करने में सफल रहता है तो बड़ी कामयाबी मिलेगी। इसका रैंक पर भी बड़ा सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। साथ ही प्रशिक्षित शिक्षकों की भर्ती होनी चाहिए। हालांकि पेेक ने पीएचडी करने वाले लोगों को ही शिक्षक बनाने का निर्णय लिया है।
पेक इन बिंदुओं पर करेगा काम
- पढ़ाने, सीखने व संसाधन विकसित करने पर काम किया जाएगा।
- रिसर्च के लिए शिक्षकों को समय मिले, इसके लिए शिक्षकों की तैनाती की जाएगी।
- जनसंपर्क बेहतर किया जाएगा। एलुमनी आदि की मदद ली जाएगी।
- छात्रों की संख्या बढ़ाकर बेहतर सुविधाएं दी जाएंगी।
- विद्यार्थियों को रोजगार के अवसर अधिक मिलें इसके लिए प्रयास होंगे।
- पब्लिकेशंस की संख्या में वृद्धि की जाएगी।
- पीएचडी छात्रों में भी वृद्धि की जाएगी।
निरफ रैंकिंग में इस बार प्रदर्शन अच्छा रहा है। कोशिश की जा रही है कि इस रैंकिंग में और बेहतर कर पाएं। इसके लिए तैयारियां चल रही हैं। जहां कमियां रही हैं उनमें सुधार किया जा रहा है।
- प्रो. धीरज सांघी, निदेशक, पेक
पेक इन बिंदुओं पर करेगा काम
- पढ़ाने, सीखने व संसाधन विकसित करने पर काम किया जाएगा।
- रिसर्च के लिए शिक्षकों को समय मिले, इसके लिए शिक्षकों की तैनाती की जाएगी।
- जनसंपर्क बेहतर किया जाएगा। एलुमनी आदि की मदद ली जाएगी।
- छात्रों की संख्या बढ़ाकर बेहतर सुविधाएं दी जाएंगी।
- विद्यार्थियों को रोजगार के अवसर अधिक मिलें इसके लिए प्रयास होंगे।
- पब्लिकेशंस की संख्या में वृद्धि की जाएगी।
- पीएचडी छात्रों में भी वृद्धि की जाएगी।
निरफ रैंकिंग में इस बार प्रदर्शन अच्छा रहा है। कोशिश की जा रही है कि इस रैंकिंग में और बेहतर कर पाएं। इसके लिए तैयारियां चल रही हैं। जहां कमियां रही हैं उनमें सुधार किया जा रहा है।
- प्रो. धीरज सांघी, निदेशक, पेक