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बड़ी खबरः बगैर अनुमति फीस नहीं बढ़ा सकेंगे पब्लिक स्कूल

Wed, 27 Apr 2016 12:25 PM IST
बिशन सिंह बोरा / अमर उजाला, देहरादून
बिशन सिंह बोरा / अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 27 Apr 2016 12:25 PM IST
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public school can not increased fee without permission

दिल्ली के बाद अब उत्तराखंड में भी पब्लिक स्कूलों पर नकेल कसने की तैयारी है। स्कूल बगैर अनुमति के फीस नहीं बढ़ा सकेंगे।

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यह भी तय होगा कि किस क्लास में कितनी फीस होगी। खास बात यह है कि फीस स्कूल में उपलब्ध सुविधाओं के अनुसार होगी। इसके लिए प्रदेश में जल्द अधिसूचना जारी हो सकती है। शिक्षा सचिव डी सेंथिल पांडियन ने कहा कि इसके लिए तैयार ड्राफ्ट को जल्द अंतिम रूप दे दिया जाएगा।
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प्रदेश में पब्लिक स्कूलों की मनमानी से अभिभावक परेशान हैं। कहीं, स्कूल परिसर में ही किताबें, कापियां और स्कूल ड्रेस बेची जा रही है तो कहीं अभिभावकों को किसी खास दुकान से खरीदने के लिए बाध्य किया जाता है।
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इसके अलावा मासिक शुल्क के साथ अतिरिक्त कैपिटेशन फीस की भी शिकायतें मिल रही हैं। लेकिन अब शासन पब्लिक स्कूलों की मनमानी पर नकेल कसने की तैयारी में हैं। इसके लिए ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है। जिसकी अधिसूचना जारी होने के बाद पब्लिक स्कूल सरकार की अनुमति के बगैर फीस में बढ़ोतरी नहीं कर सकेंगे।

कैबिनेट से मिल चुकी है मंजूरी

public school can not increased fee without permission
स्कूल

हर जनपद के पब्लिक स्कूल को यह भी घोषित करना होगा कि किस क्लास में वे कितनी फीस ले रहे हैं। स्कूल प्रबंधन को स्कूल में उपलब्ध सुविधाओं का भी पूरा ब्यौरा देना होगा।

स्कूलों को यह घोषित करना होगा कि स्कूल में कितना स्टाफ है, कक्षों की संख्या कितनी है, स्कूल में खेल मैदान है या नहीं, पुस्तकालय, स्मार्ट क्लास आदि के संबंध में शासन को स्कूल का पूरा विवरण उपलब्ध कराना होगा।

पब्लिक स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाई जा सके इसका प्रस्ताव पूर्व में कैबिनेट में पास हो चुका है। कांग्रेस की हरीश रावत सरकार में इस प्रस्ताव को पास किया था, जिसकी अब अधिसूचना जारी होनी है। 

स्कूलों को यह घोषित करना होगा कि वह किस क्लास में कितनी फीस ले रहे हैं और छात्रों को क्या सुविधाएं दी जा रही हैं। एक्ट को लेकर कार्मिक, वित्त और न्याय विभाग से परामर्श लिया जा रहा है। कानून बनाकर इसका क्रियान्वयन भी कराना है। ऐसे में सभी बिंदुओं पर विचार किया जा रहा है।
- डी सेंथिल पांडियन शिक्षा सचिव

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