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Hindi News ›   Uttarakhand ›   poor children do not get Admission.

सीटें खाली रहती हैं लेकिन गरीब को नहीं मिलता एडमीशन

Tue, 05 Apr 2016 09:10 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 05 Apr 2016 09:10 PM IST
सार

  • गरीबों के बच्चों को एडमीशन में पब्लिक स्कूल कर रहे आनाकानी
  • वर्ष 2015-16 में आठ हजार से अधिक सीटें रह गईं थीं खाली 

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poor children do not get Admission.
शिक्षा के अधिकार अधिनियम

विस्तार

पब्लिक स्कूलों में 25 फीसदी सीटों का कोटा निर्धारित होने के बावजूद गरीबों के बच्चों को इनमें एडमीशन नहीं मिल पाता है। हर साल सीटें खाली रह जाती हैं। यह हालात केवल राजधानी दून में ही नहीं है बल्कि पूरे प्रदेश के लगभग सभी पब्लिक स्कूलों में है। शिक्षा सत्र वर्ष 2015-16 में कोटे की 8133 सीटें खाली रह गईं थीं।

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शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत गरीबों एवं अनुसूचित जाति, जनजाति के बच्चों के लिए पब्लिक स्कूलों में 25 फीसदी सीटें निर्धारित हैं, लेकिन शिक्षा विभाग के अधिकारियों और पब्लिक स्कूलों की मनमानी के चलते इन बच्चों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। 
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पात्र होकर भी बच्चों को नहीं मिल रहा लाभ
यही वजह है कि अभिभावक बच्चों के एडमीशन के लिए जहां विभागीय अधिकारियों और पब्लिक स्कूलों के चक्कर काट रहे हैं। वही विभागीय अधिकारी प्रदेश में वर्ष 2011-12 से आरटीई लागू होने के बावजूद निर्धारित सीटों पर बच्चों को एडमीशन नहीं दिलवा पा रहे हैं। इससे हर साल हजारों सीटें खली रह रही हैं। जिसका बच्चों को पात्र होने के बावजूद लाभ नहीं मिल पा रहा है।  

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25 फीसदी सीटों पर है इनका हक 

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स्कूल

ऐसे अभिभावक जिनकी वार्षिक आय 55 हजार या उससे कम है। इसके अलावा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, अनाथ बच्चे, शारीरिक रूप से विकलांग, विधवा, तलाकशुदा माता पर आश्रित बच्चे। 

यह सीटें रह गईं खाली 
वर्ष 2015-16 में अल्मोड़ा में 334, बागेश्वर में 180, चमोली में 168, देहरादून में 1215, ऊधम सिंह नगर में 388 सहित प्रदेश के सभी जनपदों में सैकड़ों सीटें खाली रह गई। 

आरटीई में पात्र बच्चों को एडमीशन मिलना चाहिए। हर साल सैकड़ों सीटें खाली क्यों रह जाती हैं, इसे दिखवाया जाएगा।
-वीएस रावत, अपर निदेशक शिक्षा महानिदेशालय 

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