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'टीचिंग एक्सपीरियंस' में दर्ज होगा शोध छात्रों का PhD का समय

Thu, 10 Mar 2016 08:59 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 10 Mar 2016 08:59 PM IST
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PhD time period count in teaching experience.
यूजीसी - फोटो : demo

देशभर में पीएचडी कर रहे शोधार्थियों के लिए अच्छी खबर है। पीएचडी में लगने वाले समय को अब टीचिंग एक्सपीरियंस माना जाएगा। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग(यूजीसी) ने इस संबंध में सभी विश्वविद्यालयों को सर्कुलर जारी करते हुए अवगत कराया है।

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यूजीसी के सचिव डॉ. जसपाल एस संधू के मुताबिक यूजीसी की चार फरवरी को हुई 512वीं बैठक में यह फैसला लिया गया है। उन्होंने बताया कि रिसर्च डिग्री पीएचडी करने में लगाया गया सक्रिय समय शिक्षण अनुभव माना जाएगा। इससे यह लाभ होगा कि जो युवा पीएचडी करते हैं, उनका यह समय उनकी सर्विस का हिस्सा बन जाएगा।
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प्रमोशन में होगा फायदा
इस आधार पर पहले से बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर जॉब कर रहे युवाओं को सीधे एसोसिएट प्रोफेसर पर प्रमोट होने का भी मौका मिल सकता है। यूजीसी का यह नियम न केवल सर्विस करने वाले शोधार्थियों बल्कि उनके लिए भी लागू होगा जो कि पार्ट टाइम पीएचडी कर रहे हैं। यूजीसी ने देशभर के विश्वविद्यालयों में खाली पड़ी फैकल्टी पोस्ट को भरने के लिए लिया है।
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दून विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वीके जैन ने बताया कि अगर कोई शिक्षक बिना स्टडी लीव लिए पीएचडी कर रहा है तो उसका वह समय टीचिंग का माना जाएगा। अगर कोई स्टडी लीव लेकर पीएचडी करता है तो वह समय काउंट नहीं होगा। यूजीसी ने पहली बार युवाओं को यह मौका दिया है।

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