{"_id":"589323ab4f1c1b9c35e80585","slug":"nursery-admission-neighbourhood-policy-in-admission","type":"story","status":"publish","title_hn":"सरकार का तर्क, बच्चों के प्रति बढ़ते अपराध के ध्यानार्थ यह नीति जरूरी","category":{"title":"Campus","title_hn":"कैंपस ","slug":"campus"}}
सरकार का तर्क, बच्चों के प्रति बढ़ते अपराध के ध्यानार्थ यह नीति जरूरी
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 03 Feb 2017 01:12 AM IST
विज्ञापन
file photo
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दिल्ली सरकार ने राजधानी में बढ़ते बाल अपराध का हवाला देकर हाईकोर्ट के समक्ष नर्सरी दाखिलों में अपनी नेबरहुड नीति का बचाव किया। सरकार ने तर्क रखा कि बच्चों के खिलाफ तेजी से बढ़ते अपराध और स्कूल बसों से होने वाले हादसों के ध्यानार्थ भी निजी स्कूलों में होने वाले दाखिले के लिए नेबरहुड नीति को लागू किया है। इतना ही नहीं सरकार ने कहा कि स्कूलों को लाभ के सेंटर बनाने की इजाजत नहीं दी जा सकती।
विज्ञापन
न्यायमूर्ति मनमोहन के समक्ष सरकार से सस्ती दर पर भूमि लेने वाले निजी स्कूलों में दाखिले के लिए जारी अपने दिशा-निर्देश का बचाव करते हुए सरकार ने कहा कि तेजी से बढ़ते बाल शोषण (चाइल्ड एब्यूज) से बच्चों को बचाने के लिए यह जरूरी है कि उनका दाखिला घर के आसपास के स्कूल में हो।
विज्ञापन
इतना ही नहीं सरकार ने दाखिले में नेबरहुड नीति को लागू करने के लिए प्रदूषण और यातायात जाम को भी प्रमुख वजह बताया। सरकार ने कहा है कि एक तरफ जहां प्रदूषण का स्तर काफी अधिक है, दूसरी तरफ हमेशा जाम की समस्या बनी रहती है। ऐसे में स्कूल से घर तक जाने में बच्चों को घंटों का सफर करना पड़ता है, जो उनके स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डालता है।
विज्ञापन
सरकार ने सुनवाई के दौरान अभिभावकों द्वारा भी नेवरहुड नीति को चुनौती याचिका पर पक्ष रखा। सरकार ने कहा कि जिन अभिभावकों ने नेबरहुड नीति का विरोध किया है, उन्होंने सिर्फ दो या तीन स्कूलों को ध्यान में रखकर किया है। सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता ने तर्क रखा कि सरकार के समक्ष हजारों अभिभावक आए हैं, जिन्होंने दाखिले का मुख्य आधार घर से स्कूल की दूरी को बनाने की मांग की है।