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दून मेडिकल कॉलेज में खत्म होगा दवा संकट
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 25 May 2016 04:18 AM IST
सार
- प्रमुख सचिव ओमप्रकाश ने बैठक कर दिए निर्देश
- मेडिकल एजुकेशन वाले अस्पतालों को 15 दिन दवाई उधार
- सभी जिला अस्पतालों को जल्द मिलेगी दवाईयां
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विस्तार
राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में अब दवाईयों का संकट खत्म होने जा रहा है। प्रमुख सचिव ओमप्रकाश ने मातहतों के साथ बैठक कर फिलहाल 15 दिन के लिए स्वास्थ्य निदेशालय से दवाईयां उधार देने के निर्देश दिए। जैसे ही चिकित्सा शिक्षा के अस्पतालों में दवाईयों की खरीद फरोख्त हो जाएगी तो उधार की दवाईयां लौटा दी जाएंगी। उन्होंने सभी जिला अस्पतालों में भी जल्द दवाईयां उपलब्ध कराने को कहा।
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दून अस्पताल के राजकीय दून मेडिकल कॉलेज में शामिल होने के बाद यहां दवाईयों की सप्लाई बंद हो गई थी। दरअसल, पहले दवाईयां स्वास्थ्य महकमा उपलब्ध कराता था, लेकिन चिकित्सा शिक्षा विभाग का हिस्सा बनने के बाद दवाईयों की सप्लाई बंद कर दी गई थी। इस वजह से मरीजों को हर दिन बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था।
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चार दिन में दवा उपलब्ध कराने के निर्देश
प्रमुख सचिव ओमप्रकाश ने मंगलवार को अधिकारियों की बैठक बुलाई। बैठक में स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. कुसुम नरियाल, निदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. आशुतोष सयाना, दून मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ. प्रदीप भारती गुप्ता, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केके टम्टा शामिल हुए। प्रमुख सचिव ने स्वास्थ्य महानिदेशक को निर्देश दिए कि सभी दवाईयों की सैंपल टेस्टिंग हो चुकी है, लिहाजा चार दिन में सभी जिला अस्पतालों को दवाईयां उपलब्ध कराई जाएं।
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उन्होंने मेडिकल एजुकेशन से जुड़े अस्पतालों को भी 15 दिन के लिए उधार में दवाईयां उपलब्ध कराने को कहा। मेडिकल कॉलेजों के अस्पतालों की दवाईयों के खरीद की प्रक्रिया चल रही है, लिहाजा दवाईयां आते ही स्वास्थ्य महकमे को लौटा दी जाएंगी। प्रमुख सचिव ने कहा कि प्रदेश में दवाईयों की कमी नहीं होने दी जानी चाहिए।
स्वास्थ्य बीमा योजना के टेंडर जल्द
प्रमुख सचिव ओमप्रकाश ने बताया कि मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के टेंडर जल्द वेबसाइट पर जारी कर दिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि इस बार सरकारी के साथ ही प्राइवेट कंपनियों को भी टेंडर प्रक्रिया में जगह दी गई है।
न हीमोफीलिया का टीका, न रैबीज की दवा
दून मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय में आने वाले मरीज इन दिनों बेहद परेशानियों से गुजर रहे हैं। हॉस्पिटल में न तो कंप्लीट ब्लड काउंट टेस्ट हो रहा है और न ही हीमोग्लोबीन का टी 3 व टी 4 टेस्ट। लीवर से संबंधित टेस्ट बंद हैं तो पीलिया, थायराइड के भी टेस्ट नहीं हो रहे हैं। हीमोफीलिया का टीका न होने से बच्चे वंचित हैं और अभिभावक परेशान हैं। प्रदेश में इसके करीब 165 मरीज पंजीकृत हैं। प्रदेश में चार अस्पतालों में ही यह टीका मिलता है, लेकिन इन दिनों न टीका न होने की वजह से अभिभावक प्रदेश में इधर-उधर भटक रहे हैं। रेबीज की दवाई का न होना किसी के लिए जानलेवा बन सकता है। शुगर से जुड़ा कोई टेस्ट अस्पताल में नहीं हो रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि प्रमुख सचिव के निर्देशों के बाद हालात में कुछ सुधार आएगा।