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10वीं की पहली 4 टॉपर्स से सुनिए सफलता की कहानी और उनका लक्ष्य
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़।
Updated Tue, 24 May 2016 01:07 PM IST
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10वीं में प्रदेश टॉपर गांव सुरजनवास स्थित बीआर ज्ञानदीप स्कूल की छात्रा आन्या
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हरियाणा बोर्ड की 10वीं के रिजल्ट में प्रदेश टॉपर अनन्या, द्वितीय रही संदीप कौर और संयुक्त रहीं सीमा और स्नेहलता गुप्ता से विशेष बातचीत।
आईएएस बन देश सेवा करना चाहती है आन्या
महेंद्रगढ़। मेरी उपलब्धियों से मेरे परिजन और गौरवान्वित हों ताकि समाज में बेटियों के लिए एक सकारात्मक संदेश जाए। आईएएस अधिकारी बनकर देश की सेवा करने का मेरा सपना है। अमर उजाला के साथ विशेष बातचीत के दौरान हरियाणा बोर्ड 10वीं में प्रदेश टॉपर गांव सुरजनवास स्थित बीआर ज्ञानदीप स्कूल की छात्रा आन्या ने अपनी इच्छा जाहिर की। आन्या ने 500 में से 494 अंक प्राप्त किए हैं। आन्या के पिता शुभकरण सरकारी स्कूल में अध्यापक हैं और मां किरण देवी गृहणी।
आन्या ने कहा कि अगर किसी मंजिल को पाने के लिए व्यक्ति दृढ़ संकल्पित हो जाए तो उसे कोई रोक नहीं सकता। न संसाधनों की कमी बाधा बनती है और न ही गरीबी। इसके लिए महत्वपूर्ण है कि संकल्प के प्रति ईमानदारी से कड़ी मेहनत की जाए। ऐसा संकल्पित व्यक्ति ही समाज में बदलाव लाता है और नेतृत्व करता है। आन्या ने कहा कि वह सदा ही कुछ नया करने में विश्वास रखती है, देश और समाज के लिए बहुत कुछ करने का उसका सपना है।
इसके लिए अभी से मेहनत शुरू कर दी है। आन्या ने अपनी सफलता का श्रेय अपने परिजनों और अध्यापकों तथा स्कूल प्रबंधन को दिया। आन्या की मां किरण ने कहा कि विश्वास था कि बेटी का रिजल्ट बहुत अच्छा रहेगा। आन्या के जिला टॉप करने की उम्मीद थी। लेकिन उसने अपनी मेहनत से प्रदेश में टॉपर करके उम्मीद से भी बढ़कर रिजल्ट दिया है।
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आईएएस बन देश सेवा करना चाहती है आन्या
महेंद्रगढ़। मेरी उपलब्धियों से मेरे परिजन और गौरवान्वित हों ताकि समाज में बेटियों के लिए एक सकारात्मक संदेश जाए। आईएएस अधिकारी बनकर देश की सेवा करने का मेरा सपना है। अमर उजाला के साथ विशेष बातचीत के दौरान हरियाणा बोर्ड 10वीं में प्रदेश टॉपर गांव सुरजनवास स्थित बीआर ज्ञानदीप स्कूल की छात्रा आन्या ने अपनी इच्छा जाहिर की। आन्या ने 500 में से 494 अंक प्राप्त किए हैं। आन्या के पिता शुभकरण सरकारी स्कूल में अध्यापक हैं और मां किरण देवी गृहणी।
आन्या ने कहा कि अगर किसी मंजिल को पाने के लिए व्यक्ति दृढ़ संकल्पित हो जाए तो उसे कोई रोक नहीं सकता। न संसाधनों की कमी बाधा बनती है और न ही गरीबी। इसके लिए महत्वपूर्ण है कि संकल्प के प्रति ईमानदारी से कड़ी मेहनत की जाए। ऐसा संकल्पित व्यक्ति ही समाज में बदलाव लाता है और नेतृत्व करता है। आन्या ने कहा कि वह सदा ही कुछ नया करने में विश्वास रखती है, देश और समाज के लिए बहुत कुछ करने का उसका सपना है।
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इसके लिए अभी से मेहनत शुरू कर दी है। आन्या ने अपनी सफलता का श्रेय अपने परिजनों और अध्यापकों तथा स्कूल प्रबंधन को दिया। आन्या की मां किरण ने कहा कि विश्वास था कि बेटी का रिजल्ट बहुत अच्छा रहेगा। आन्या के जिला टॉप करने की उम्मीद थी। लेकिन उसने अपनी मेहनत से प्रदेश में टॉपर करके उम्मीद से भी बढ़कर रिजल्ट दिया है।
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आईएएस बन समाजसेवा करना चाहती है मैकेनिक की बेटी
मैकेनिक बूटा सिंह की बेटी संदीप कौर
ऐलनाबाद। इरादे मजबूत हो तो कोई भी अभाव मंजिल तक पहुंचने की राह में रोड़ा नहीं बन सकते। कठिन परिश्रम, समर्पण और आत्मविश्वास ही सफलता की कुंजी है। यदि ये सब विद्यार्थी में है तो उसका लक्ष्य तक पहुंचना तय है।
कुछ ऐसा ही कर दिखाया है हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड द्वारा घोषित 10वीं के परीक्षा परिणाम में हरियाणा में दूसरा और जिला टॉप करने वाली सरस्वती हाईस्कूल की छात्रा संदीप ने।
ऐलनाबाद वार्ड 12 के मध्यवर्गीय नामधारी परिवार के पंप टेसि्टंग मैकेनिक बूटा सिंह की बेटी संदीप कौर ने 10वीं में कुल 500 में से 492 अंक (98.4 प्रतिशत) प्राप्त किए हैं। बिना कोई ट्यूशन लिए उसने यह मुकाम हासिल किया और अपने अभिभावकों और स्कूल का नाम रोशन किया है। पिता बूटा सिंह और माता बलजीत कौर बेटी का रिजल्ट देख फूले नहीं समा रहे हैं। आखिर उनके संघर्ष को नई पहचान जो मिली है। आर्थिक स्थिति में अनेक उतार-चढ़ाव आने के बावजूद बूटा सिंह ने अपनी बेटी को पढ़ाया।
अभावों से जूझते परिवार और माता-पिता के सपने को पूरा करने के लिए संदीप कौर ने दिनरात पढ़ाई की। सफलता पाने वाली संदीप कौर परिवार की पहली आईएएस बनने तमन्ना रखती है और समाजसेवा करना चाहती है। संदीप कौर ने इस कामयाबी का श्रेय माता-पिता और गुरुजनों को दिया। फिलहाल संदीप कौर 11वीं के लिए नचिकेतन पब्लिक स्कूल में प्रवेश ले रही है। संदीप कौर ने बताया कि उसने इससे पहले की सभी कक्षाएं भी अव्वल श्रेणी में उत्तीर्ण की है और स्कूल समय के अलावा रोजाना सात घंटे नियमित रूप से घर पर पढ़ाई की। उसने आज तक कभी भी ट्यूशन का सहारा नहीं लिया। संदीप कौर का बड़ा भाई पंजाबी विश्वविद्यालय पटियाला में एलएलबी का छात्र है।
कुछ ऐसा ही कर दिखाया है हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड द्वारा घोषित 10वीं के परीक्षा परिणाम में हरियाणा में दूसरा और जिला टॉप करने वाली सरस्वती हाईस्कूल की छात्रा संदीप ने।
ऐलनाबाद वार्ड 12 के मध्यवर्गीय नामधारी परिवार के पंप टेसि्टंग मैकेनिक बूटा सिंह की बेटी संदीप कौर ने 10वीं में कुल 500 में से 492 अंक (98.4 प्रतिशत) प्राप्त किए हैं। बिना कोई ट्यूशन लिए उसने यह मुकाम हासिल किया और अपने अभिभावकों और स्कूल का नाम रोशन किया है। पिता बूटा सिंह और माता बलजीत कौर बेटी का रिजल्ट देख फूले नहीं समा रहे हैं। आखिर उनके संघर्ष को नई पहचान जो मिली है। आर्थिक स्थिति में अनेक उतार-चढ़ाव आने के बावजूद बूटा सिंह ने अपनी बेटी को पढ़ाया।
अभावों से जूझते परिवार और माता-पिता के सपने को पूरा करने के लिए संदीप कौर ने दिनरात पढ़ाई की। सफलता पाने वाली संदीप कौर परिवार की पहली आईएएस बनने तमन्ना रखती है और समाजसेवा करना चाहती है। संदीप कौर ने इस कामयाबी का श्रेय माता-पिता और गुरुजनों को दिया। फिलहाल संदीप कौर 11वीं के लिए नचिकेतन पब्लिक स्कूल में प्रवेश ले रही है। संदीप कौर ने बताया कि उसने इससे पहले की सभी कक्षाएं भी अव्वल श्रेणी में उत्तीर्ण की है और स्कूल समय के अलावा रोजाना सात घंटे नियमित रूप से घर पर पढ़ाई की। उसने आज तक कभी भी ट्यूशन का सहारा नहीं लिया। संदीप कौर का बड़ा भाई पंजाबी विश्वविद्यालय पटियाला में एलएलबी का छात्र है।
गांवों की बेटियों ने लहराया परचम
सीमा राजथल गांव की, जबकि स्नेहा पेटवाड़ गांव की
हिसार। शिक्षा बोर्ड की दसवीं परीक्षा में प्रदेश भर में तीसरे स्थान पर आने वाली दोनों छात्राएं गांवों की रहने वाली हैं। छात्रा सीमा राजथल गांव की, जबकि स्नेहा पेटवाड़ गांव की है। नारनौंद के टैगोर सीनियर सेकेंडरी स्कूल की दोनों छात्राओं ने 500 में से 491 अंक हासिल किए हैं। इनकी कुल प्रतिशतता 98.2 बैठती है।
किसान की बेटी सीमा ने फहराया परचम
गांव राजथल के किसान की बेटी सीमा ने दसवीं में 500 में से 491 अंक हासिल कर प्रदेश में तीसरा स्थान हासिल किया है। बेटी की इस सफलता पर माता-पिता फूले नहीं समा रहे हैं। सीमा ने बताया कि उसने पूरी मेहनत के साथ परीक्षा दी थी। लेकिन सोचा नहीं था कि वह प्रदेश में तीसरा स्थान हासिल कर लेगी। उसने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और गुरुजनों को दिया। दो भाई बहनों में छोटी सीमा ने बताया कि वह आईएएस ऑफिसर बनकर देश की सेवा करना चाहती है। वह इसके लिए कड़ी मेहनत कर रही है। सीमा के पिता सुभाष चहल किसान हैं।
मां के स्नेह ने बनाया स्नेहलता को टॉपर
हिसार। बचपन से पिता का साया सिर से उठ जाने के बाद मां के आंचल में ही पल बढ़कर बड़ी हुई स्नेहलता ने भी प्रदेश में तीसरा स्थान हासिल किया है। स्नेहलता का उपनाम स्नेहा है। स्नेहलता ने 500 में से 491 अंक प्राप्त किए हैं। उनकी पास प्रतिशतता भी 98.2 बैठती है। स्नेहा के पिता सुरेंद्र कौशिक का निधन हो चुका है। इसके बाद स्नेहा की मां सुदेश ने ही उन्हें लाड़ प्यार से पाला। स्नेहा के दादा रामधारी कौशिक सेवानिवृत्त शिक्षक हैं।
उन्होंने उन्हें लगातार पढ़ाई के लिए प्रेरित किया। स्नेहा अपनी इस सफलता का श्रेय अपने अध्यापकों और अपने परिवार को देती है। तीन भाई-बहनों में मंझली स्नेहा ने बताया कि उसने खूब मेहनत करके परीक्षा दी थी। यह उसकी मेहनत का ही फल है कि उसने राज्य में तीसरा स्थान पाया है। स्नेहा ने बताया किञ उसका लक्ष्य डॉक्टर बनना है।
दोनों सखी सहेली
दसवीं कक्षा की सीमा और स्नेहा ने कड़ी मेहनत से यह सफलता पाई है। दोनों सखी सहेली भी हैं। रिजल्ट आने के बाद दोनों लड़कियां अपने परिजनों के साथ खुशी खुशी स्कूल पहुंची।
किसान की बेटी सीमा ने फहराया परचम
गांव राजथल के किसान की बेटी सीमा ने दसवीं में 500 में से 491 अंक हासिल कर प्रदेश में तीसरा स्थान हासिल किया है। बेटी की इस सफलता पर माता-पिता फूले नहीं समा रहे हैं। सीमा ने बताया कि उसने पूरी मेहनत के साथ परीक्षा दी थी। लेकिन सोचा नहीं था कि वह प्रदेश में तीसरा स्थान हासिल कर लेगी। उसने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और गुरुजनों को दिया। दो भाई बहनों में छोटी सीमा ने बताया कि वह आईएएस ऑफिसर बनकर देश की सेवा करना चाहती है। वह इसके लिए कड़ी मेहनत कर रही है। सीमा के पिता सुभाष चहल किसान हैं।
मां के स्नेह ने बनाया स्नेहलता को टॉपर
हिसार। बचपन से पिता का साया सिर से उठ जाने के बाद मां के आंचल में ही पल बढ़कर बड़ी हुई स्नेहलता ने भी प्रदेश में तीसरा स्थान हासिल किया है। स्नेहलता का उपनाम स्नेहा है। स्नेहलता ने 500 में से 491 अंक प्राप्त किए हैं। उनकी पास प्रतिशतता भी 98.2 बैठती है। स्नेहा के पिता सुरेंद्र कौशिक का निधन हो चुका है। इसके बाद स्नेहा की मां सुदेश ने ही उन्हें लाड़ प्यार से पाला। स्नेहा के दादा रामधारी कौशिक सेवानिवृत्त शिक्षक हैं।
उन्होंने उन्हें लगातार पढ़ाई के लिए प्रेरित किया। स्नेहा अपनी इस सफलता का श्रेय अपने अध्यापकों और अपने परिवार को देती है। तीन भाई-बहनों में मंझली स्नेहा ने बताया कि उसने खूब मेहनत करके परीक्षा दी थी। यह उसकी मेहनत का ही फल है कि उसने राज्य में तीसरा स्थान पाया है। स्नेहा ने बताया किञ उसका लक्ष्य डॉक्टर बनना है।
दोनों सखी सहेली
दसवीं कक्षा की सीमा और स्नेहा ने कड़ी मेहनत से यह सफलता पाई है। दोनों सखी सहेली भी हैं। रिजल्ट आने के बाद दोनों लड़कियां अपने परिजनों के साथ खुशी खुशी स्कूल पहुंची।