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हाल-ए- सरकारी स्कूल: शिक्षा सत्र शुरु, बच्चों को नहीं मिली किताबें
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 01 Apr 2016 10:39 PM IST
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किताबें
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एक अप्रैल से नया शिक्षा सत्र शुरू हो गया, लेकिन सरकारी स्कूलों के बच्चों को किताबें नहीं मिल पाई हैं। शिक्षकों ने किताबें न मिलने पर नाराजगी जताते हुए कहा कि विभाग की ओर से शिक्षा में गुणवत्ता की बात की जाती है, लेकिन हर साल बच्चों को समय पर किताबें नहीं मिलती।
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राजधानी में शिक्षा सत्र के पहले दिन जूनियर हाईस्कूलों के बच्चों को 24 किताबों में से मात्र नौ किताबें मिल पाई हैं। जबकि बेसिक स्कूलों के बच्चों को एक भी किताब नहीं मिली। बच्चों को बगैर किताब के खाली हाथ लौटना पड़ा।
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हर साल होती यह समस्या
प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष वीरेंद्र कृषाली ने कहा कि समय पर किताबें न मिलने से बच्चों को हर साल परेशानी होती है। इससे शिक्षा गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि विभाग को मालूम है कि एक अप्रैल से नया शिक्षा सत्र शुरू हो रहा है। ऐसे में पहले से विभाग को पाठ्य पुस्तकों की व्यवस्था करनी चाहिए थी।
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जिलाध्यक्ष ने राजधानी के 70 स्कूलों में मानक के अनुरूप शिक्षकों की तैनाती न होने पर भी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि एसएसए के शिक्षकों, सीआरपी और बीआरपी का वेतन ट्रेजरी के माध्यम से दिया जाए। उन्होंने कहा कि ऐसा न हुआ तो संगठन आंदोलन को बाध्य होगा। रविंद्र गुसाई, प्रमोद रावत, सुभाष कुकरेती, संदीप सोलंकी आदि शिक्षकों ने कहा कि शिक्षकों की सभी मांगों पर शीघ्र अमल किया जाए।
जूनियर हाईस्कूलों के छात्रों को नौ किताबें दे चुके हैं, जैसे-जैसे किताबें आएंगी बच्चों को बांट दी जाएंगी। बच्चों के पास पुरानी किताबें भी हैं नई किताबें मिलने तक उससे काम चलाया जा सकता है।
-मेहरबान सिंह बिष्ट, जिला शिक्षा अधिकारी देहरादून।