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शिक्षा विभाग का कारनामा, आदेश के इंतजार में करोड़ों लैप्स
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 05 Apr 2016 06:06 PM IST
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शिक्षा विभाग के कारनामे भी अजब है, यहां की कार्यशैली गजब है। बात दरअसल यह है कि विभाग ने मॉडल स्कूलों में कंप्यूटर हार्डवेयर एवं साफ्टवेयर के लिए इसी वर्ष फरवरी में 3.80 करोड़ रुपये जारी किए थे।
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प्रत्येक स्कूलों को दो लाख रुपये दिए थे, लेकिन धनराशि खर्च करने की अनुमति नहीं मिलने से 190 स्कूलों ने दी गई धनराशि सरेंडर कर दी थी। इससे माडल स्कूलों में स्मार्ट क्लास की योजना लटक गई है।
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प्रदेश के प्रत्येक ब्लॉक में दो माध्यमिक विद्यालयों को मॉडल विद्यालय के रूप में संचालित किया जा रहा है। इन विद्यालयों में स्मार्ट क्लास शुरू की जा सके इसके लिए प्रत्येक विद्यालय में कंप्यूटर हार्डवेयर एवं साफ्टवेयर के लिए विभाग ने धनराशि जारी की थी।
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आदेश न मिलने तक धनराशि नहीं की खर्च
गौर करने वाली बात यह है कि विभाग ने यह कहकर स्कूलों के हाथ बांध दिए थे कि कंप्यूटर हार्डवेयर एवं साफ्टवेयर खरीदने के लिए विभाग से अलग से निर्देश दिए जाएंगे। कंप्यूटर मद में धनराशि जारी होते ही कई स्कूलों ने ब्रॉड बैंड एवं वाईफाई कनेक्शन ले लिए, लेकिन विभाग की ओर से धनराशि से कंप्यूटर खरीदने के आदेश जारी नहीं हुए।
कुछ प्रिंसिपलों ने तो आदेश के लिए 31 मार्च तक इंतजार किया, लेकिन आदेश नहीं होने पर प्रिंसिपलों ने विभाग से मिली धनराशि सरेंडर कर दी।
कंप्यूटर क्रय करने के लिए आईटी विभाग से अनुमति लेनी होती है, विभाग की ओर से आईटी विभाग को लिखा गया, लेकिन विभाग ने क्रय आदेश के नियमानुसार इसे क्रय करने को कहा, जिससे मामले में देरी हुई।
-आरके कुंवर, शिक्षा निदेशक माध्यमिक शिक्षा