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श्रीदेव सुमन विवि के लिए आसान नहीं होगी कालेजों की संबद्धता

Tue, 15 Mar 2016 10:32 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई टिहरी
ब्यूरो/अमर उजाला, नई टिहरी Updated Tue, 15 Mar 2016 10:32 PM IST
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colleges Affiliation with sridev suman university
श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय - फोटो : file photo

श्रीदेव सुमन विवि को इस सत्र में राजकीय महाविद्यालयों को संबद्धता देना आसान नहीं होगा। क्योंकि विवि के पास संसाधनों का अभाव बना हुआ है। कॉलेजों के निरीक्षण के लिए विवि के पास एक भी फैकल्टी नहीं है। ऐसे में राजकीय महाविद्यालयों का श्रीदेव सुमन विवि से संबद्धता होने की उम्मीद नजर नहीं आ रही है।

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गढ़वाल विवि से संबद्ध राजकीय महाविद्यालयों को सत्र से श्रीदेव सुमन विवि से संबद्ध होने की प्रक्रिया शुरू होनी थी। गढ़वाल विवि ने राजकीय महाविद्यालयों के डिएफिलेशन के लिए गत वर्ष फरवरी में मानव संसाधन विकास मंत्रालय को पत्र भेजा था, लेकिन श्रीदेव सुमन विवि के पास राजकीय महाविद्यालयों को संबद्धता देने के लिए संसाधनों का अभाव है।
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2012 से विवि 19 उपनल कर्मियों और गढ़वाल विवि के सेवानिवृत्त चार कर्मियों के भरोसे ही चल रहा है। राजकीय महाविद्यालयों को संबद्धता देने से पहले विवि की एक्सपर्ट कमेटी ने कॉलेजों का अप्रैल और मई में निरीक्षण करना है, लेकिन विवि के पास फैकल्टी के नाम पर एक भी प्रोफेसर नहीं है।
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प्रवेश के मानक तैयार करने के लिए चाहिए वक्त
बिना फैकल्टी के कॉलेजों का निरीक्षण कैसे संभव हो पाएगा। यदि श्रीदेव सुमन विवि दूसरे विश्वविद्यालयों के एक्सपर्ट कमेटी से निरीक्षण करवाता भी है, तो संबद्धता देने पर जुलाई में राजकीय महाविद्यालयों में प्रवेश के लिए विवि को अपने नियम और मानक तय करने होंगे।

प्रवेश के नियम और मानक तय करने के लिए विवि को कम से कम दो माह का समय चाहिए। क्योंकि जुलाई से महाविद्यालयों में प्रवेश की प्रक्रिया शुरू होनी है।

मई से जून तक श्रीदेव सुमन विवि की मुख्य परीक्षा होनी है। उसके बाद विवि पर परीक्षा परिणाम घोषित करने का दबाव है। ऐसे में राजकीय महाविद्यालयों को संबद्धता देना विवि को इस सत्र में भी आसान नहीं रह गया है।


इनका है कहना
राजकीय महाविद्यालयों को संबद्धता देने में कोई बड़ी कठिनाई नहीं है। कॉलेजों के निरीक्षण के लिए एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया जाएगा। विवि में कर्मियों और अधिकारियों की कमी जरूर है। कर्मियों और अधिकारियों की तैनाती का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।
-डॉ. यूएस रावत, कुलपति, श्रीदेव सुमन विवि बादशाहीथौल

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