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आपसी भाई चारा देख ब्रिटेन के छात्र हुए दून के कायल

Sat, 26 Mar 2016 01:45 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 26 Mar 2016 01:45 PM IST
सार

  • सौहार्द और सद्भाव सीखने दून आए है यह ब्रिटिश छात्र
  • ब्रिटेन के लीड्स बैकेट् विश्वविद्यालय के पांच छात्र
  • भारतीय-तिब्बती समाज के संबंधों पर कर रहे अध्ययन

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British student arrived Dehradun.
छात्र - फोटो : amar ujala

विस्तार

पूरी दुनिया में विभिन्न स्तर पर धर्म, समुदाय, नस्ल, विचारधारा के नाम पर भयंकर मारकाट हो रही है व तनाव बना हुआ है। यूरोप में आई शरणार्थियों की बाढ़ से वहां हलचल मची हुई है। यूरोप समेत ब्रिटेन में भी धर्म व नस्ल को लेकर तनाव व टकराव का वातावरण बना हुआ है। 

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ऐसे में ब्रिटेन के विख्यात लीड्स बैकेट् विश्वविद्यालय के पांच छात्र दून में तिब्बती समाज के भारतीयों के साथ सामंजस्य और मेलमिलाप का अध्ययन करने पहुंचे हैं। ब्रिटेन के ये होनहार छात्र इस बात को देखकर मंत्रमुग्ध हैं कि दून में तिब्बतियों को प्रगति और विकास के शानदार अवसर मिल रहे हैं। 
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उनका कहना है कि उत्तराखंडी समाज ने जिस तरह से तिब्बतियों को गले लगाया और इनको खुद की पहचान कायम रखने देते हुए तरक्की के जो मौके दिए है वह खुद में नज़ीर है। 
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तिब्बती रिलीफ फंड परियोजना के तहत दून पहुंचे छात्र
ब्रिटेन के लीड्स बैकेट् विश्वविद्यालय से रीबैकेह पियरसन, एलेक्स ब्रूम, एलेक्स बोवर्स, हैयलेय ओगले, आर्थर ओलियने कुछ दिनों पहले ही दून पहुंचे हैं। यूनिवर्सिटी रिलेशनशिप प्रोग्राम और तिब्बती रिलीफ फंड परियोजना के तहत ये छात्र दून पहुंचे हैं।

ये लोग तिब्बती समाज, इनके जीवन के सभी आयामों, भारतीय समाज व राज्य व्यवस्था के साथ इनके संबंधों का अध्ययन करने यहां आ रखे हैं। इनके अध्ययन में इस बात पर विशेष जोर है कि भारतीयों के साथ इनके समरसतापूर्ण व सौहार्द्धपूर्ण संबंधों का राज क्या है। 

समुदाय के जीवन को समझने का कर रहे प्रयास
इसलिए ये छात्र देहरादून के सभी तिब्बती संस्थानों में घूम-घूमकर समुदाय के जीवन के सभी पक्षों को समझने की कोशिश कर रहे हैं। इनकी शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य-चिकित्सा ढांचे, धार्मिक सांस्कृतिक जीवन को तो ये समझ ही रहे हैं। लेकिन इनके अध्ययन के केंद्र में है भारतीय समाज के साथ इनका बेहद सौहार्द्धपूर्ण संबंधों का होना। 

इस बाबत रीबैकेह पियरसन, एलेक्स ब्रूम, एलेक्स बोवर्स, हैयलेय ओगले, आर्थर ओलियने का कहना है हम इस फिनामिना को बहुत महत्व देते हैं। चूंकि ब्रिटेन भी संस्कृतियों का मेलटिंग पॉट है। 

छात्रों को पसंद आ रहे भारतीय और तिब्बती पकवान

British student arrived Dehradun.
छात्र - फोटो : amar ujala

पांच ब्रितानी छात्रों को भारत व तिब्बत के पकवान बहुत पसंद आ रहे हैं। छमछो डोलमा, दोरजी फुनसौक व तेनजिन डिकीय इनके लिए एक से बढ़कर एक पकवान व भोजन बनाते हैं। ये लोग यहां पर पंजाबी, मारवाड़ी, गढ़वाली, दक्षिण भारतीय भोजन का लुत्फ उठा रहे हैं। इन्हें स्थानीय व्यंजन बेहद पसंद आ रहे हैं। 

इसी तरह दून में भी विभिन्न समुदायों, राष्ट्रीयताओं के लोग शांतिपूर्ण तरीके से रहते हैं। तिब्बती समुदाय ने अपनी पहचान कायम रखते हुए खुद को भारत का हिस्सा बना लिया है। अभी ये लोग कई हफ्तों तक गहन शोध व अध्ययन कर सकारात्मक दागों को समझेंगे व परखेंगे। 

चुनौतीपूर्ण बच्चों की कर रहे सेवा
ब्रिटेन से आए छात्र सामाजिक अध्ययन के साथ ही ये लोग शारीरिक व मानसिक तौर पर विकलांग बच्चों व किशोरों के लिए चल रहे रचनात्मक कार्यक्रमों में भी शिरकत कर रहे हैं। 

तिब्बती नगयौंगा स्कूल में ये लोग चल रही परियोजना का हिस्सा बन गए हैं। मानसिक व शारीरिक तौर पर चुनौतीपूर्ण बच्चों के लिए चल रहे सेवा कार्यों में प्रतिभाग कर रहे हैं। 

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