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बेटे भी नहीं पीछे, हर साल बेहतर हो रहा रिजल्ट
विजेंद्र श्रीवास्तव/अमर उजाला, हल्द्वानी
Updated Thu, 26 May 2016 01:34 AM IST
सार
- पांच सालों में 6 फीसदी बढ़ा हाईस्कूल के लड़कों का पास प्रतिशत
- बेटियां 76 प्रतिशत पर ही टिकी हुई
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लड़कों के परिणाम में हर साल सुधार हो रहा है।
- फोटो : अमरउजाला
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विस्तार
आमतौर पर परीक्षा परिणाम आने पर बेटियों की मेहनत और परिणाम की बात होती है, यह सच भी है। पर बेटे भी मेहनत करने में पीछे नहीं है। अगर बीते सालों के हाई स्कूल के परिणामों पर नजर डालें तो यह साफ तौर पर दिखाई देता है।
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2012 में हाईस्कूल का परिणाम आया तो उसमें 64.97 बालक परीक्षा में सफल रहे। 2013 में बालकों ने और जोर लगाया। इस साल परिणाम 66.68 प्रतिशत तक पहुंचा।
इस साल लंबी छलांग
2014 में बालकों के परिणाम में काफी गिरावट आई और ओवरआल परिणाम 61.53 पर टिक गया। पर अगले साल बालकों ने मेहनत कर पिछली कमियों को दूर करने की कोशिश की। 2015 में परिणाम 65.08 तक पहुंच गया। इस साल तो बेटों ने लंबी छलांग लगाई। परिणाम में पांच प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि हुई। इस साल बेटों का परिणाम 70.48 तक पहुंच गया।
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अगर बेटियों की बात करें, तो उनका परिणाम 2012 से 76 प्रतिशत के आसपास ही टिका हुआ है। न इसमें कोई खास गिरावट आई और न ही बढ़ोतरी हुई।
2012 में बेटियों का परिणाम 76.10, 2013 में 76.66, 2014 में 73.66, 2015 में 76.49 प्रतिशत रहा। इस साल बेटियों के परिणाम में थोड़ा बहुत बढ़कर 76.54 प्रतिशत हो गया। परिणाम बताता है कि बेटियां मेहनत से जहां अपने स्थान पर टिकी हुई हैं, तो बेटे परिश्रम के जरिये लगातार आगे बढ़ने के लिए कोशिश कर रहे हैं।
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