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छात्रों के साथ 65 वर्षीय प्रोफेसर ने भी ली पीएचडी की डिग्री
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 20 Nov 2016 01:11 AM IST
सार
पढ़ाई में उम्र नहीं होती रुकावट
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डिग्री
- फोटो : AmarUjala
विस्तार
पढ़ाई में उम्र कभी रुकावट नहीं बन सकती है। यह कहना है 65 साल की डॉ. देवेंद्र मोहिनी आहूजा का। वह कहती हैं कि जैसे जैसे उम्र बढ़ती है वैसे-वैसे समझ भी बढ़ती जाती है। वर्तमान में वह रामजस कॉलेज में अंग्रेजी की एसोसिएट प्रोफेसर हैं।
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नौकरी के साथ-साथ उन्होंने अपनी पढ़ाई को जारी रखा। इसमें उन्हें घर का काफी सहयोग मिला। डॉ. आहूजा के लिए यह डबल बोनेंजा जैसा है, क्योंकि उनके साथ ही उनके कुछ छात्रों को भी पीएचडी की डिग्री मिली है। वर्ष 2008 में उन्होंने पीएचडी में नामांकन कराया और वर्ष 2014 में थीसिस जमा कराया।
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इस उम्र में पीएचडी करने का ख्याल कैसे आया, इस पर उन्होंने कहा कि कुछ सालों से मन कर रहा था कि कुछ अलग करूं। लिहाजा दृढ़ इच्छाशक्ति से पीएचडी को कर पाई। पीएचडी करने के दौरान कोई परेशानी आई, इस पर उन्होंने कहा कि परेशानी तो हर चीज में आती है, यह आपके ऊपर है कि आप उसे कैसे पार पाते हैं। ज्ञान ऐसा खजाना है जिसे जितना पाया जाए उतना ही कम है। जीवन में कुछ भी करें यह सोच कर करें कि आप अपने लिए ही कुछ कर रहे हैं।
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कम समय में पूरी की डिग्री
साइकोलॉजी में पीएचडी की डिग्री पाने वाले डॉ. सुनील गुप्ता ने कम समय में डिग्री पूरी की है। वह कहते हैं कि थीसिस जमा कराने की अधिकतम सीमा पांच साल होती है। डॉ. सुनील ने केवल दो साल 6 महीने 11 दिन में इसे पूरा किया। वह काम को अधूरा छोड़ने में विश्वास नहीं करते। लिहाजा अपने शोध को भी समय से पहले पूरा किया। वह डीयू में बतौर तदर्थ शिक्षक पढ़ा रहे हैं।