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आवासीय संपत्तियों की हिस्सेदारी एक दशक में बढ़कर 88 फीसदी पहुंची
Tue, 22 Sep 2020 12:38 AM IST
Amit Mandal
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Tue, 22 Sep 2020 12:38 AM IST
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आवासीय परियोजना
बड़े कॉरपोरेट के आने और छोटे बिल्डरों का बड़ी कंपनियों में विलय से भारतीय संपत्ति बाजार का विस्तार हुआ है। इसमें आवासीय परियोजनाओं की भूमिका अहम रही है। फिक्की एवं संपत्ति सलाहकार एनारॉक की रिपोर्ट के मुताबिक, एक दशक में आवासीय संपत्तियों की हिस्सेदारी बढ़कर 88 फीसदी पर पहुंच गई है, जो 2009 में 49 फीसदी रही थी।
इस दौरान निर्माणाधीन संपत्तियों का मूल्य 2020 की पहली छमाही में 2.6 गुना बढ़कर 243 अरब डॉलर (करीब 17.89 लाख करोड़ रुपये) पहुंच गया है। 2009 में यह मूल्य 94 अरब डॉलर था। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2012 से 2019 के बीच देश के शीर्ष-14 शहरों में बिल्डरों की संख्या में 53 फीसदी कमी आई है।
हालांकि, इस दौरान बड़े कॉरपोरेट की संपत्ति बाजार में हिस्सेदारी बढ़ी है। एनारॉक चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा, बड़े कॉरपोरेट के आने के साथ नीतिगत एवं संरचनात्मक सुधारों से रियल एस्टेट कारोबार बेहतर और व्यवस्थित हुआ है। पिछले 7-8 वर्षों में मकानों की कीमतें सीमित दायरे में रही हैं।
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इस दौरान निर्माणाधीन संपत्तियों का मूल्य 2020 की पहली छमाही में 2.6 गुना बढ़कर 243 अरब डॉलर (करीब 17.89 लाख करोड़ रुपये) पहुंच गया है। 2009 में यह मूल्य 94 अरब डॉलर था। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2012 से 2019 के बीच देश के शीर्ष-14 शहरों में बिल्डरों की संख्या में 53 फीसदी कमी आई है।
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हालांकि, इस दौरान बड़े कॉरपोरेट की संपत्ति बाजार में हिस्सेदारी बढ़ी है। एनारॉक चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा, बड़े कॉरपोरेट के आने के साथ नीतिगत एवं संरचनात्मक सुधारों से रियल एस्टेट कारोबार बेहतर और व्यवस्थित हुआ है। पिछले 7-8 वर्षों में मकानों की कीमतें सीमित दायरे में रही हैं।
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