{"_id":"5ee418178ebc3e433471ebaf","slug":"supreme-court-suggests-airlines-can-issue-credit-notes-for-tickets-canceled-in-lockdown","type":"story","status":"publish","title_hn":"सुप्रीम सुझाव: लॉकडाउन में रद्द टिकटों के बदले क्रेडिट नोट जारी कर सकती हैं विमानन कंपनियां","category":{"title":"Business","title_hn":"कारोबार","slug":"business"}}
सुप्रीम सुझाव: लॉकडाउन में रद्द टिकटों के बदले क्रेडिट नोट जारी कर सकती हैं विमानन कंपनियां
Sat, 13 Jun 2020 05:34 AM IST
संजीव कुमार झा
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Sat, 13 Jun 2020 05:34 AM IST
विज्ञापन
एयर इंडिया
- फोटो : PTI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को नागरिक उड्डयन मंत्रालय और विमानन कंपनियों को लॉकडाउन के दौरान रद्द टिकटों की किराया वापसी के लिए बेहतर तंत्र बनाने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा, उपभोक्ताओं को बिना किसी मुसीबत के कम समय में इस राशि का भुगतान किया जाना चाहिए। कोर्ट ने सुझाव दिया कि एक रास्ता यह भी है कि कंपनियां उपभोक्ताओं को कम से कम दो साल के लिए क्रेडिट नोट जारी करें और इसका इस्तेमाल किसी भी रूट पर किया जा सके।
विज्ञापन
जस्टिस अशोक भूषण की पीठ ने मंत्रालय और विमानन कंपनियों से लॉकडाउन के दौरान रद्द टिकटों पर पूरा किराया वापस मांगने वाली याचिकाओं पर जवाब मांगा है। पीठ ने केंद्र सरकार से एक रुख अपनाने और मंत्रालय व विमानन कंपनियों से किराया वापसी के तरीकों पर चर्चा कर कोर्ट को तीन हफ्ते में अवगत कराने को कहा है। सुनवाई के दौरान स्पाइसजेट ने कोर्ट को बताया, दुनिया में कहीं भी पूरा किराया वापस नहीं किया जा रहा। कंपनी ने कहा, हम मंत्रालय से विचार-विमर्श कर समाधान निकालेंगे।
विज्ञापन
याचिकाओं ने मांग की थी कि कंपनियाें द्वारा पूरा किराया वापस न करने को उड्डयन मंत्रालय के निर्देश का उल्लंघन करार दिया जाए। इसमें दावा किया गया कि मंत्रालय ने 16 अप्रैल को आदेश जारी किया था जिसमें स्पष्ट था कि लॉकडाउन के दौरान बुक टिकटों के रद्द होने पर पूरा किराया वापस होगा। जिन लोगों ने लॉकडाउन से पहले टिकट कराए थे उन्हें पूरा किराया न वापस किया जाए। याचिका में कहा गया कि अगर उड़ान लॉकडाउन के कारण रद्द हुई तो उपभोक्ताओं के साथ भेदभाव है। यह संविधान के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
विज्ञापन