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Space: अंतरिक्ष क्षेत्र के वैश्विक बाजार में पैठ बनाने में जुटे भारतीय स्टार्टअप, पीएम मोदी ने बढ़ाई उम्मीद
Mon, 10 Jul 2023 05:06 AM IST
गुलाम अहमद
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली
Published by: गुलाम अहमद
Updated Mon, 10 Jul 2023 05:06 AM IST
सार
उद्योग जगत के जुड़े दिग्गजों का मानना है कि निर्यात नियंत्रण और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण जैसे मसले हल होने से निजी खिलाड़ियों के मौके और बढ़ेंगे।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
अपनी कक्षा में घूमते सैटेलाइट पर फिर से ईंधन भरने का लक्ष्य हो या फिर जलवायु परिवर्तन से बिगड़ती पृथ्वी की सेहत के बारे में जानकारी जुटाना, भारतीय स्टार्टअप हर तरह की सेवाएं देने में पूरी तरह सक्षम हैं। वैश्विक स्तर पर बढ़े वाणिज्यिक अवसरों के बीच ऐसे तमाम स्टार्टअप विश्व बाजार में अपनी पैठ बनाने की कोशिश में जुटे हैं।
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भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में फोकस करने, दो साल पहले आर्टमिस करार का हिस्सा बनने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अमेरिका यात्रा के बाद उन्हें विशिष्ट बाजार तक पहुंच हासिल होने की उम्मीद बढ़ी है। भारत ने 2020 में अपने अंतरिक्ष क्षेत्र को खोला था और तबसे लेकर अब तक 150 से अधिक ऐसे स्टार्टअप उभरे हैं जो रॉकेट और उपग्रहों के निर्माण, अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण सुविधा देने और अंतरिक्ष पर्यटन की संभावनाएं तलाशने जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे हैं।
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उद्योग जगत के जुड़े दिग्गजों का मानना है कि निर्यात नियंत्रण और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण जैसे मसले हल होने से निजी खिलाड़ियों के मौके और बढ़ेंगे। मनस्तु स्पेस के सह-संस्थापक तुषार जाधव कहते हैं, यह अच्छी शुरुआत है, क्योंकि 10-15 साल पहले अमेरिका के लिए किसी अंतरिक्ष या रक्षा-संबंधी तकनीक की आपूर्ति के बारे में सुना भी नहीं जाता था। तब यह अकल्पनीय था। अब हम इन क्षेत्रों में साथ मिलकर काम करने की बात कर रहे हैं।
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प्रक्रिया आसान होने की उम्मीद
मुंबई स्थित मनस्तु उपग्रहों के लिए हरित प्रोपल्शन सिस्टम विकसित कर रहा है और उसे आगामी वर्ष में परीक्षण उड़ान के दौरान अपनी तकनीक पर मुहर लगने की उम्मीद है। इसके अलावा यह स्टार्टअप कक्षा में घूमते सैटेलाइट में ईंधन भरने की सेवा प्रदान करने के लिए अंतरिक्ष में एक ईंधन स्टेशन की डिजाइन पर भी काम कर रहा है। भारतीय अंतरिक्ष संघ के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल एके भट्ट (सेवानिवृत्त) कहते हैं, अंतरिक्ष क्षेत्र में कई प्रौद्योगिकियां दोहरे उपयोग वाली हैं, लेकिन अब ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि अब इसके लिए प्रक्रिया आसान होगी।
लगातार रच रहे इतिहास
हैदराबाद स्थित स्काईरूट एयरोस्पेस ने महज चार साल में पहली बार निजी तौर पर निर्मित अंतरिक्ष रॉकेट विक्रम-एस रॉकेट का सफल प्रक्षेपण कर इतिहास रचा। इसरो के पूर्व वैज्ञानिकों द्वारा स्थापित यह कंपनी अब छोटे उपग्रहों को कक्षा में स्थापित करने के लिए विक्रम शृंखला के रॉकेट विकसित कर रही है। चेन्नई स्थित अग्निकुल कॉसमॉस ने पिछले साल श्रीहरिकोटा में सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के भीतर अपने खुद के लॉन्चपैड का उद्घाटन किया, जहां से इसरो अपने अंतरिक्ष प्रक्षेपण करता है। चूंकि भारत में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष डेटा की मांग बहुत कम है, घरेलू निजी खिलाड़ी अपने उत्पादों के लिए वैश्विक बाजार तलाश रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने खोले निजी क्षेत्र के लिए रास्ते
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी को निजी क्षेत्र के लिए खोलकर अतीत की वर्जनाएं तोड़ी हैं। तीन वर्षों के भीतर हमारे पास 150 से अधिक स्टार्ट-अप हैं, उनमें से कुछ अपनी तरह के पहले हैं। इन्हें विश्व मानकों पर स्वीकार किया जा रहा है। - जितेंद्र सिंह, केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री