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भ्रष्टाचार में लिप्त बोर्ड सदस्य को ब्लैकलिस्ट जरूर करे सेबी, इंफोसिस संस्थापक ने व्हिसलब्लोअरों के लिए मांगी सुरक्षा

Tue, 22 Sep 2020 06:33 AM IST
Rajeev Rai बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Rajeev Rai Updated Tue, 22 Sep 2020 06:33 AM IST
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SEBI must blacklist board member indulging in corruption, Infosys founder seeks security for whistleblowers
एन आर नारायण मूर्ति

इंफोसिस के संस्थापक एन आर नारायणमूर्ति ने कॉरपोरेट अधिकारियों के खिलाफ शिकायत करने वालों के पक्ष में आवाज उठाई है। राष्ट्रीय प्रबंधन संगठन के 47वें अधिवेशन में सोमवार को उन्होंने कहा कि बाजार नियामक सेबी को भ्रष्टाचार में लिप्त और प्रशासनिक कार्य में असफल कंपनी के बोर्ड सदस्यों को हर हाल में ब्लैकलिस्ट कर देना चाहिए। उनसे क्षतिपूर्ति वसूली की भी कार्रवाई करनी चाहिए।

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नारायणमूर्ति ने कंपनी के उच्चाधिकारियों के खिलाफ आवाज उठाने वाले व्हिसलब्लोअर को सुरक्षा देने की भी वकालत की। उन्होंने कहा कि अगर शिकायतकर्ता की बात में सच्चाई है, तो कंपनी के खिलाफ आवाज उठाना बदले की कार्रवाई नहीं मानी जाएगी। अगर जांच में निकलता है कि किसी अधिकारी ने अपने विवेकाधीन कार्यों का सही से पालन नहीं किया है और उसकी वजह से कंपनी या बोर्ड को नुकसान हुआ, तो उसका इस्तीफा मांगा जा सकता है। ऐसे अधिकारियों और बोर्ड सदस्यों को सेबी ब्लैकलिस्ट कर दे और शेयरहोल्डर भी उसे बाहर करने के लिए वोट करें। इतना ही नहीं इस अवधि में शेयरधारक को हुए नुकसान की भरपाई भी संबंधित अधिकारी से वसूली के जरिये होनी चाहिए।
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बड़े अधिकारियों पर बोर्ड नहीं ले सकता फैसला
इंफोसिस के संस्थापक ने कहा कि अगर निचले या मध्यम स्तर के कर्मचारियों के खिलाफ शिकायत आती है, तो आंतरिक समिति बनाकर जांच की जानी चाहिए। चेयरमैन, सीईओ या कार्यकारी निदेशकों के खिलाफ शिकायत की जांच पर फैसला बोर्ड नहीं कर सकता। गौरतलब है कि 2018 में एक व्हिसलब्लोअरने इंफोसिस के कॉरपोरेट संचालन पर सवाल उठाते हुए सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि पर आरोप लगाए थे और सेबी को पत्र लिखा था। इसके बाद 2019 में फिर एक व्हिसलब्लोअर ने सीईओ सलिल पारेश व सीएफओ निलंजन रॉय पर अकाउंटिंग अनियमितताओं का आरोप लगाया था। हालांकि, दोनों ही मामलों में कंपनी को क्लीनचिट मिल गई थी।

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