Rupee vs Dollar : रुपये में गिरावट का दौर जारी, सबसे निचले स्तर 78.83 रुपये प्रति डॉलर पर पहुंचा
बाजार में रुपये की गिरावट का कारण एफआईआई की ओर से लगातार की जा रही बिकवाली भी है। भारतीय रुपये के कमजोर होने कारण इक्विटी मार्केट में चल रही मंदी है। एफआईआई लगातार बाजार से पैसे बाहर निकाल रहे हैं इससे रुपये पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
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Rupee vs Dollar : रुपये में डॉलर के मुकाबले गिरावट का दौर मंगलवार को भी जारी रहा। मंगलवार को रुपया 46 पैसे टूटकर अपने अब तक के सबसे निचले स्तर 78.83 रुपये प्रति डॉलर के भाव पर आ गया है। घरेलू शेयर बाजार में अनिश्चितता और अमेरिकी डॉलर की मजबूती के चलते रुपया बुधवार को और कमजोर हुआ।
इससे पहले रुपया सोमवार को 78.34 प्रति डॉलर पर पर बंद हुआ था. वहीं आज शुरूआती कारोबार में 18 पैसे गिरकर 78.52 प्रति डॉलर पर खुला था। आज के कारोबार में यह 78.60 के महत्वपूर्ण लेवल को भी पार कर गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में फिर तेजी भी रुपये में गिरावट की एक और बड़ी वजह बनी।
बाजार में रुपये की गिरावट का कारण एफआईआई की ओर से लगातार की जा रही बिकवाली भी है। शेयरखान के रिसर्च एनालिस्ट अनुज चौधरी का रुपए की गिरावट पर कहना है कि भारतीय रुपये के कमजोर होने कारण इक्विटी मार्केट में चल रही मंदी है। एफआईआई लगातार बाजार से पैसे बाहर निकाल रहे हैं इससे रुपये पर दबाव बढ़ता जा रहा है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर 0.01 प्रतिशत की उछाल के साथ 103.95 पर ट्रेड कर रहा है।
सीबीडीटी ने कहा- क्रिप्टो के लेनदेन में खरीदार-विक्रेता दोनों को ही काटना होगा टीडीएस
डिजिटल परिसंपत्ति (वीडीए) या क्रिप्टोकरेंसी के लेनदेन में खरीदार-विक्रेता दोनों को ही अपने स्तर टीडीएस काटना होगा। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने क्रिप्टो के लेनदेन पर स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा, आयकर अधिनियम की धारा 194एस के मुताबिक खरीदार को वीडीए के लेनदेन में कर कटौती करनी होगी।
सीबीडीटी ने कहा, एक्सचेंज से अलग किए जाने वाले वीडीए के लेनदेन में खरीदार को कर कटौती करने की जरूरत है। ऐसी देनदारी के लिए जिम्मेदार व्यक्ति को सुनिश्चित करना होगा कि कटौती किए गए कर का भुगतान किया जा चुका हो। बोर्ड ने उदाहरण के जरिये कहा, अगर 'ए' वीडीए को 'बी' वीडीए के बदले दिया जा रहा हो तो दोनों ही पक्ष खरीदार होने के साथ विक्रेता भी हैं।
निजी नेटवर्क लाइसेंस के लिए नियम जारी
दूरसंचार विभाग ने निजी गैर-सार्वजनिक नेटवर्क (सीएनपीएन) लगाने वाली कंपनियों के लिए नियम जारी किया है। इसके तहत सरकार से स्पेक्ट्रम की मांग करने वाले आवेदकों का न्यूनतम नेटवर्थ 100 करोड़ से कम नहीं होना चाहिए। विभाग ने कहा, कंपनी अधिनियम के तहत पंजीकृत घरेलू कंपनियां इसके लिए आवेदन कर सकती है। विभाग के अनुसार, सीएनपीएन लाइसेंस के लिए किसी भी तरह का प्रवेश और लाइसेंस शुल्क नहीं देना होगा। सीएनपीएन लाइसेंस 10 साल तक वैध होगा।
पीएलआई : एसी व एलईडी बनाने वाली 15 कंपनियों का चयन
सरकार ने एसी-एलईडी जैसे व्हाइट गुड्स बनाने वाली 15 और कंपनियों का उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के लिए चयन किया है। इसमें अदाणी कॉपर ट्यूबस्, एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स, विप्रो एंटरप्राइज और अन्य हैं। ये 1,368 करोड़ का निवेश करेंगी। इससे 4,000 लोगों को रोजगार मिलेगा। योजना के तहत 19 कंपनियों ने आवेदन किया था, जिसमें चार खारिज हो गए। इससे पहले नवंबर, 2021 में 42 कंपनियों को चुना गया था, जिन्होंने 4,614 करोड़ के निवेश का प्रावधान किया था।
इंस्टाग्राम, फेसबुक ने गर्भपात की गोलियों के विज्ञापन हटाए
फेसबुक और इंस्टाग्राम ने अमेरिका में उन विज्ञापन व पोस्ट को हटाना शुरू कर दिया है, जो महिलाओं को गर्भपात की गोलियां बेचने की पेशकश करते हैं। अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद महिलाओं से गर्भपात का सांविधानिक अधिकार छिन गया है। इन पोस्ट का उद्देश्य प्रतिबंध लागू करने वाले राज्यों में रहने वाली महिलाओं की मदद करना था। सोशल मीडिया पर मीम और स्टेटस अपडेट डाले जा रहे हैं, जो महिलाओं को गर्भपात के रास्ते बताते हैं।
डेढ़ से ढाई फीसदी कीमत बढ़ाएगी टाटा मोटर्स
टाटा मोटर्स ने कहा है कि वह एक जुलाई से अपने व्यावसायिक उत्पादों की कीमतों में डेढ़ से ढाई फीसदी की बढ़ोतरी करेगी। सभी रेंज के वाहनों में इसका असर होगा। कंपनी ने कहा कि बढ़ती कच्ची सामग्रियों की कीमतों के कारण उसे ऐसा करना पड़ रहा है। इससे पहले अप्रैल में इसने यात्री वाहनों के दाम में 1.1 फीसदी और व्यावसायिक वाहनों के भाव में 2 से 2.5 फीसदी की बढ़ोतरी की थी।
भारती इन्फ्राटेल पर एक लाख का जुर्माना
सेबी ने एंप्लॉयीज स्टॉक ऑप्शन के नियमों के उल्लंघन मामले में भारती इन्फ्राटेल पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। सेबीने जारी आदेश में कहा कि यह मामला मार्च, 2017 का है। कंपनी को इसके लिए नोटिस दिया गया था। कंपनी का नाम दिसंबर, 2020 में बदलकर इंडस टावर कर दिया गया था।